आपको ये ज़रूर जानना चहिए कि आख़िर क्यो पप्पू नही है राहुल गांधी

राहुल शब्द सुनते ही पता नही क्यो लोगो के चेहरे पर अजीब सी स्माइल दौड़ जाती है । इंटरनेट पर पप्पू शब्द लिखते ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तस्वीर निकल कर सामने आ जाती है। नंबर वाइज करके अगर उनके पिछले बयानों को सुने तो उनको सिरियस लेने का वाकई मन नही करता। लेकिन जरा रुकिए क्या पप्पू वाकई पप्पू है या उन्हें जबरदस्ती पप्पू बनाया जा रहा है??? लंदन से पढ़े लिखे राहुल गांधी जैसे ही भारत आए तो उन्हें बगैर मेहनत किये विरासत में राज सिंघासन मिल गया। मतलब गद्दी भले ही उन्होंने खुद ना संभाली हो पर देश के नीति निर्यता की भूमिका में उनका परिवार ही था।

ख़ैर समय बदला,सत्ता बदली,भूमिका भी बदली,कभी सत्ता की कुर्सी पर रहने वाली कांग्रेस पार्टी अपने गलत कामो के चलते विपक्ष मे आ गयीं और मां सोनिया गांधी ने पूरा राजकाज राहुल को सौंप दिया। राहुल को अध्य्क्ष पद नही मानो मुसीबतों का पहाड़ मिला।

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जुगलबंदी के चलते कांग्रेस लगातार पूरे देश मे हार रही थी । कांग्रेस को वापिस से सहेजना काफी मुश्किल था। ऊपर से लोगो के ताने किसी का भी मोरल डाउन कर सकतेलेकिन उन्होंने हार नही मानी और अपने लोगो को धीरे धीरे जोड़ने में लगे रहे।

इसे राजनीति की समझ ना होना कहे या सही व्यक्ति का साथ ना होना । कारण कुछ भी रहा हो लेकिन उनकी कुछ हरकते ऐसी रही जिससे लोग उन्हें लगातार ट्रोल करते रहे। पप्पू,उल्लू,नाली का कीड़ा और भी ना जाने क्या क्या सुना। जमकर ट्रोल झेला ।

अगर किसी और आदमी को इतना कुछ कहा जाए तो शायद वो दुनिया को छोड़ दे लेकिन राहुल बस मैदान में डंटे रहे। मध्य प्रदेश,राजस्थान,छत्तीसगढ जैसी जगहों पर चुनाव होने से पहले बीजेपी के लिए फुल कॉन्फिडेंस से अपने जीतने की बात करते रहे वही राहुल गांधी चुपचाप सभी लोगो को एकजुट करने मे जुटे रहे । नतीजा क्या हुआ वो सभी लोग बखूबी जानते है। सत्तापक्ष जिस तरह से राहुल गांधी से डरकर सफाई दी रहा है उससे इतना तो साफ है कि राहुल गांधी पप्पू तो बिल्कुल नही है बस उल्टी सीधी हरकतों और बयानों की वजह शायद परिपक्वता की कमी रहा हो लेकिन जैसे जैसे समय आगे बढ़ रहा है राहुल सीख रहे है और इसके अच्छे नतीजे भी अब देखने को मिल रहे है।

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