जब SS, NCP और कांग्रेस के नेता हसीन सपने में खोये थे, तब फडणवीस ले रहे थे शपथ

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भाई शनिवार की सुबह जो झटका सबको मिला है न, वो तो अलग है लेकिन यही झटका जब शिवसेना को मिला होगा तब सोचिये उसके दिल पर क्या बीत रही होगी! और शिवसेना के संजय राउत की तो बात ही छोड़ दीजिये.


महाराष्ट्र की सियासत में जो नया भूचाल आया है. क्या ये भूचाल महीने भर से चले आ रहे घमासान को खत्म कर देगा. उम्मीद तो ऐसी ही है, लेकिन जो झटका महाराष्ट्र की कुछ राजनीतिक पार्टियों और राजनीतिक पंडितों को लगा है ना.. वही झटका हमें भी लगा.. कि कैसे भाई कैसे.. रात में जब अजीत पवार.. शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे.. तो बीजेपी मानों गायब सी थी.. उसकी चर्चा दूर दूर नही थी.. मीडिया में, अख़बारों में.. सोशल मीडिया पर हर तरफ महाराष्ट्र में सिर्फ इस गठबंधन की चर्चा हो रही थी कि अब सरकार इस बेमेल गठबधन की बनने जा रही है.. लेकिन जब रात के सन्नाटे में नेता हसीन सपने में खोये थे तभी महाराष्ट्र में बीजेपी के नेता असली कुर्सी की जुगत में लगे थे.. एक तरफ जहाँ एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना सरकार बनाने को लेकर आश्वस्त हो चुके थे.. वहीँ दूसरी तरफ बीजेपी के नेता चुपचाप अपने काम में लगे हुए
 शनिवार की सुबह होते होते.. देवेन्द्र फदंवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली.. और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री बन गये.. ये खबर सबको चौकाने वाली थी.. वाकई में अगर देखा जाए तो किसी को इस बात की एक परसेंट भी उम्मीद नही थी..

दरअसल शनिवार सुबह 5.47 बजे महाराष्ट्र में लगे राष्ट्रपति शासन को हटाने का नोटिफिकेशन जारी किया गया. इसके बाद मुंबई में सुबह 8.05 बजे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई..

 इस सरकार गठन में सबसे मजेदार बात ये रही कि सरकार बनाने के लिए जो चेहरे ज्यादा चर्चा में रहते हो तो बैठकों और मीटिंग से दूर रहे.. न अमित शाह कोई बैठक कर रहे थे और ना ही देवेन्द्र फडणवीस .. इससे मीडिया का पूरा ध्यान एनसीपी..कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं की तरफ था.. और इधर बीजेपी और अजीत पवार लगातार रोड मैप बना रहे थे.. महाराष्ट्र से आ रही ख़बरों की माने तो अजीत पवार लगातार शरद पवार पर बीजेपी को समर्थन करने के लिए दबाव बना रहे थे.. लेकिन शरद पवार इसके लिय राजी नही थे.. हालाँकि जब अजीत पवार को लगा कि अब महाराष्ट्र में एनसीपी शिवसेना और कांग्रेस मिलकर सरकार बना लेंगी तो अजीत पवार ने पार्टी को तोड़ने का फैसला किया और बीजेपी को समर्थन दे दिया और सरकार भी बना ली..

एनसीपी में शरद पवार की विरासत को लेकर पहले से ही सुप्रिया सुले और अजित पवार में खींचतान चल रही थी. इस खींचतान की भनक लोकसभा चुनाव के दौरान भी लोगों को लग गयी थी. उस वक्त अजित पवार के बेटे पार्थ को टिकट देने के मामले पर भी शरद पवार और अजित पवार के बीच मतभेद की खबरें सामने आईं थीं.

 सरकार बन जाने के बाद शिवसेना का खेल बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार कहे जाने वाले संजय राउत ने कहा कि शुक्रवार रात को बैठक के दौरान अजित पवार नजरें मिला कर नहीं बोल रहे थे. जो व्यक्ति पाप करता है उसकी नजरें जैसे झुकती हैं वैसे ही झुकी नजरों से बात कर रहे थे. इसके बाद वे अचानक उठे और गायब हो गए. उस समय हमें शक भी हुआ था. लेकिन ऐसा करेंगे किसी ने सोचा नहीं था.
सोशल मीडिया पर भी लगातार लोग शिवसेना के मजे ले रहे है.. भाई देखा भी जाये तो शिवसेना ही मजाक का पात्र इस पूरे घटनाक्रम में बनी है. क्योंकि सीएम की कुर्सी को लेकर ही बीजेपी के साथ शिवसेना का गठबंधन टूटा था.. और मुख्यमंत्री की कुर्सी के एक दम पास पहुँचने के बाद कोई छीन ले.. तो कुछ लोगों दुःख भी होता है तो कुछ को हंसी भी आती है..


खैर महाराष्ट्र में सरकार बनने पर आप सभी को बधाई.. इस पूरे घटनाक्रम पर आप क्या सोचते है नीचे कमेंट करके जरूर बताइए..