कश्मीर मुद्दा सुलझाने चला चीन अब खुद बहुत परेशान हो गया है

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कुछ लोगों की आदत होती है दाल भात में मूसलचंद बनने की, ऐसा ही हाल कुछ चीन का भी है. कश्मीर के मुद्दे पर चौधरी बनने चला चीन अब खुद फंसता जा रहा है. चीन खुद मुसीबत में घिर गया है. उसे यूएन में जाकर जवाब देना पड़ सकता है. हॉन्ग कॉन्ग में पिछले करीब 3 महीने से प्रदर्शन कर रहे लाखों लोकतंत्र समर्थकों को आतंकवादी बता चीन उनके बर्बर दमन की तैयारी में लगा है। चीन ने हॉन्ग कॉन्ग की सीमा के नजदीक सैकड़ों बख्तरबंद गाड़ियों और सेना का मार्च कराकर धमकी दी है कि वह 10 मिनट में प्रदर्शनकारियों को निशाना बना सकता है. लेकिन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का सहयोग करने वाले चीन की अब किरकिरी हो सकती है.कहा जा रहा है संयुक्त राष्ट्र ने हॉन्ग कॉन्ग के मसले को लेकर अहम बैठक बुलाने का फैसला किया है.

चीनी सरकारी मीडिया ने भी चेतावनी देते हुए कहा है कि 10 हफ्तों से चले आ रहे प्रदर्शन को खत्म करने के लिए चीन दखल कर सकता है। यह सीधे-सीधे संभावित सैन्य कार्रवाई की तरफ इशारा है. चीन की इस धमकी ने थियानमेन चौक पर 30 साल पहले चीन द्वारा किए गए बर्बर नरसंहार को दोहराए जाने की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस सैन्य कार्रवाई में 10 हजार लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है.


हंगामा क्यों मचा है? दरअसल इसका कारण है एक विधेयक है, नाम है प्रत्यर्पण विधेयक, जिसमें प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति चीन में अपराध करके हॉन्ग कॉन्ग में शरण लेता है तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेज दिया जाएगा। यह बिल पास हुआ तो चीन को उन क्षेत्रों में भी संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाएगी, जिनके साथ हॉन्ग कॉन्ग के समझौते नहीं हैं। जैसे आरोपित व्यक्ति को ताइवान और मकाऊ में भी प्रत्यर्पित किया जा सकेगा। जून में इस बिल को पास करने की कोशिश की गई तो इसका जबरदस्त विरोध शुरू हो गया, जो अबतक चला आ रहा है. दरअसल चीन और हांग कोंग का बिलय कुछ शर्तो के साथ हुआ था. जबरदस्त विरोध के बाद जहां इस बिल को अस्थायी रूप से तो निलंबित कर दिया गया है लेकिन इस बिल को पूरी तरह से खत्म की मांग की जा रही है.


तो अब कश्मीर मुद्दे पर चौधरी बनने चला चीन अपने ही घर की समस्या सुलझा नही पा रहा है, कश्मीर को सुलझाने की बात करता है. मतलब अपने घर में आग लगी और पानी पडोसी को दे रहे हैं… कश्मीर को एक छोटी सी सलाह है. चीन हमारा बड़ा भाई था, अब छोटा भाई भी तो बड़ा होगा तो अब हो गया है…अब छोटे भाई को अपनी समस्या खुद सुलझाने दीजिये. नही तोफिर कहीं ऐसा ना हो जाए कि कश्मीर के चक्कर में होन्ग कोंग हाथ से चला जाए.