विशेषज्ञों की सलाह, जब सभी अंग्रेजी दवाएं हुईं फेल तो होम्योपैथी दवा के सफल होने के आसार

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दुनिया को कोरोना के क’हर से बचाने के लिए वैज्ञानिक लगातार इसकी दवाई और वैक्सीन बनाने की कोशिश में जुटे हैं लेकिन अभी तक किसी को कोई सफलता नहीं मिल पाई है. बीच बीच में तरह तरह की दवाइयों से कोरोना पार काबू पाने की अटकलें लगती रही है लेकिन वास्तविक सफलता नहीं मिल पाई है. ऐसे में विशेषज्ञों की मानना है कि होम्योपैथी की मदद से कोरोना पर काबू पाया जा सकता है.

देश में होम्योपैथी के जाने-माने चिकित्सक डॉ कल्याण बनर्जी का कहना है कि होम्योपैथी से कोरोना को कंट्रोल किया जा सकता है. होम्योपैथी की दवाएं शरीर में प्रतिरोधी क्षमताएं बढ़ाती है जो विषाणु से लड़ने में कारगर साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि होम्योपैथी दवाइयों में महामारी के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमताएं विकसित करने का लम्बा इतिहास रहा है. ऐसे में इसे कोरोना के खिलाफ आजमाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के प्रति पूर्वाग्रहों को दूर रखकर इसे एक प्रयोग के तौर पर आजमाना हाहिये क्योंकि इस वक़्त लोगों की जिंदगियों को बचाना पहली प्राथमिकता है और इसे बचाने के लिए जो भी संभव उपाय हो उसे आजमाया जाना चाहिए.

गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद फैले स्पैनिश फ़्लू को काबू करने में होम्योपैथी कारगर साबित हुई थी. हालाँकि अभी दुनिया भर में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोरोना के इलाज के लिए हो रहा है. हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन मलेरिया में इस्तेमाल की जाती है. अभी भी विशेषज्ञों में इस दवाई को लेकर कोई आम राय नहीं है. लेकिन कई देशों का कहना है कि ये दवाई कोरोना के इलाज में कारगर साबित हो रही है.