क्या वास्तव में कलिंग यु’द्ध में हुए र’क्तपा’त से खिन्न होकर सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया था?

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इतिहास, यानी बीती हुई बात. वर्तमान जिसे कहानियों की तरह पढ़ कर अपनी धारणा बनाता है, वो इतिहास ही है. वर्तमान जिससे सबक ले कर भविष्य को संवारता है वो इतिहास ही है. इतिहास को हम तक पहुँचाने की जिम्मेदारी होती है इतिहासकार की. लेकिन क्या इतिहासकार ने हम तक सही इतिहास पहुँचाया है? ये कैसे तय होगा? इतिहास का जिक्र हम आज यूँ ही नहीं कर रहे हैं. इसकी एक ख़ास वजह है और वो वजह है सम्राट अशोक.

बचपन से हम सम्राट अशोक के बारे में कहानियां पढ़ते आये है. सम्राट अशोक, मौर्य वंश का वो शासक जिसने उत्तर में हिन्दुकश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी तक और पूरब में बंगाल से पश्चिम में अफगानिस्तान तक अपने मौर्य सम्राज्य का विस्तार किया था. अशोक ने 269 ईसापूर्व से 232 ईसापूर्व तक राज किया. इसके साथ ही हम बचपन से इतिहास की किताबों में ये भी पढ़ते आये हैं कि अशोक ने अपने मौर्य सम्राज्य का विस्तार करने के लिए कलिंग राज्य पर आ’क्रम’ण किया था. अशोक के एक शिलालेख के मुताबिक इस यु’द्ध में एक लाख लोग मा’रे गए और डेढ़ लाख को बं’दी बना लिया गया था. इस युद्ध में अशोक की विजय हुई. लेकिन खू’न और श’वों से पटी यु’द्ध भूमि को देख कर उसका मन विचलित हो गया और उसने बौद्ध धर्म अपना लिया और अपने जीवन में फिर कभी यु’ध्द नहीं लड़ने का संकल्प लिया. अपना बाकी जीवन बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में समर्पित कर दिया और शांति के पथ पर चलने लगे. ये वो बातें हैं जिन्हें हमने इतिहास की किताबो में बचपन से लेकर आज तक पढ़ा और जाना है. लेकिन इस इतिहास में हमें एक झूठ भी बताया गया और वो ये कि अशोक ने कलिंग यु’द्ध के रक्तपात से विचलित हो कर बौद्ध धर्म अपना लिया. अब आप सोचेंगे कि अगर ये झूठ है तो फिर सच क्या है? सच हम आपको बताते हैं.

आज़ादी के बाद से ही देश के इतिहास पर वामपंथी विचारधारा वाले इतिहासकारों का कब्ज़ा रहा. उन्होंने हमें जो बताया हमने वही जाना. उन्होंने झूठ को सच कहा और हमने झूठ को सच माना. लेकिन सोशल मीडिया के उभार के साथ ही इतिहास पर बहस शुरू हुई. जब भी हमने मुगलों और अन्य मुस्लिम शासकों को आक्र’मणका’री, वि’ध्वंसका’री, हिन्दुओं पर अ’त्याचा’र और हिन्दुओं का क’त्ले’आम करने वाला बताया तो उनके बचाव में अशोक को खड़ा कर कहा गया कि अशोक हिन्दू था और उसने कलिंग के यु’द्ध में लाखों हिन्दुओं को मौ’त के घा’ट उतार दिया था. हिन्दू धर्म छोड़ने के बाद ही उसे शांति मिली. लेकिन सच ये नहीं था.

वामपंथी इतिहासकारों द्वारा तैयार किये गए इस झूठ की पोल खोली True Indology नाम के एक ट्विटर यूजर ने. True Indology को वामपंथी इतिहासकारों द्वारा खड़े किये गए झूठ की धज्जियाँ दस्तावेजों और फैक्ट्स द्वारा उड़ाने के लिए जाना जाता है. True Indology ने tweet किया कि अशोक ने अपने शासन के चौथे साल में बौद्ध धर्म को अपना लिया था. अपने शासन के आठवें साल में उसने कलिंग पर आक्र’मण किया. जब उसने कलिंग पर आक्र’मण किया उस वक़्त वो एक हिन्दू शासक नहीं बल्कि एक बौद्ध शासक था. कलिंग युद्ध में र’क्तपा’त के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म नहीं अपनाया था बल्कि पहले ही बौध धर्म अपना चुके अशोक ने कलिंग यु’द्ध में हुए र’क्तपा’त से खिन्न हो कर बौद्ध धर्म का प्रचार और प्रसार शुरू कर दिया था. कई बौद्ध साहित्य इसकी पुष्टि करते हैं कि अशोक ने कलिंग यु’द्ध से पहले ही बौद्ध धर्म अपना लिया था. इस बात का जिक्र कई बौद्ध साहित्यों में मिलता है.

लेकिन कलिंग युद्ध के बाद भी अशोक एकदम से शांति का मसीहा नहीं बन बैठा. बौद्ध साहित्य महावामसा और दीपवामसा और अशोकवदना में इस बात का जिक्र है कि अशोक ने बंगाल में आजीविका और जैन धर्म के 18 हज़ार लोगों की ह’त्या कर दी थी क्योंकि एक जैन ने एक तस्वीर बनाई थी. जिसमें उसने बुद्ध को एक जैन गुरु के सामने झुकते दिखाया था. कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने देश भर में अपने संदेशों वाले शिलालेख और स्तम्भ लगवाए लेकिन उन शिलालेकों पर भी शांति की भाषा धमकी भरी ही थी. संजीव सान्याल की एक किताब है The Ocean Of Churns. में बौद्ध साहित्यों के हवाले से इस बात का जिक्र है. संजीव सान्याल कहते हैं अशोक वो था ही नहीं जो हमें बताया या पढ़ाया गया.

तो फिर ये कॉन्सेप्ट आया कहाँ से कि कलिंग युद्ध में र’क्तपा’त देख कर हिन्दू शासक अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और शांति के मार्ग पर चलने लगा? इस बात को क्यों छुपाया गया कि एक जैन द्वारा पेटिंग बनाने से नाराज हो कर उसी शांतिप्रिय अशोक ने 18 हज़ार आजीविकाओं और जैन लोगों को क्यों म’रवा दिया? इसके पीछे भी वही प्रोपगैंडा है जिस प्रोपगैंडा के तहत हमें वामपंथी इतिहासकारों ये बताया गया कि मुगलों ने भारत को अमीर बनाया और मुग़ल हिन्दू-मुस्लिम एकता में पक्षधर थे. वामपंथी इतिहासकारों ने हमेशा से हिन्दू धर्म और हिन्दू शासकों को ख’लनाय’क बनाने की कोशिश की है और काफी हद तक कामयाब भी रहे. लेकिन अब वक़्त बदल चुका है. इतिहास के जिन पन्नों पर वामपंथ की धुल थी, उन पन्नों से उस धुल को हटा कर सच सामने लाया जाने लगा है.