हिन्दू महिला और मुस्लिम पुरुष शादी अवैध – सुप्रीम कोर्ट

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यह कहानी है केरल में रहने वाली एक हिन्दू लड़की वलिअम्मा की… और एक मुस्लिम लड़के मोहम्मद इलियास की.. जो एक दुसरे से मोहब्बत करते थे.. इतनी मोहब्बत कि दोनों परिवार और समाज के खिलाफ जाकर शादी कर लेते है.. दरअसल निकाह कर लेते हैं.. वो अपनी एक अलग दुनिया बसा लेते हैं.. कुछ दिनों बाद उनका बच्चा होता है.. परिवार से अलग यह लोग ख़ुशी ख़ुशी रहते हैं.. समय बीतने लगता है.. बच्चा बड़ा हो जाता है और बाप बूढा.. और फिर एक दिन बाप की मौत हो जाती है.. मगर बाप का ज़ालिम परिवार उसकी विधवा और बच्चे को घर से निकाल देता है.. सालों पुराने उनके रिश्ते को झुठला देता है.. दर दर भटकते मां बेटा क़ानून की मदद लेते हैं.. और फिर शुरू होता है तारीख पे तारीख का सिलसिला.. लेकिन अंततः इंतज़ार ख़त्म होता है और क़ानून एक फैसला सुनाता है…

 

एक ऐसा अहम फैसला जो हर हिन्दू लड़की को जान लेना चाहिए…

 

‘’हिंदू महिला की मुस्लिम पुरुष के साथ शादी ‘नियमित या वैध’ नहीं है, लेकिन ऐसे विवाह से जन्मी संतान वैध है। यह संतान पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार मानी जाएगी’’

 

जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस एमएम शांतनगौडर की बेंच ने केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को कायम रखा, जिसमें उसने मोहम्मद इल्यिास व वल्लिअम्मा जो कि शादी के वक्त हिंदू थी, के बेटे को वैध मानते हुए पिता की संपत्ति में हिस्सेदार माना था। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में में कहा, एक मुस्लिम पुरुष की किसी मूर्तिपूजक या अग्नि की उपासक महिला से शादी न तो वैध है और न ही शून्य,बल्कि वह सिर्फ अनियमित विवाह है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू मूर्ति पूजा करते हैं, जिसमें प्रतिमा या तस्वीर शामिल है, उन पर पुष्प चढ़ाते हैं, उन्हें सजाते हैं। ऐसे में किसी हिंदू महिला का मुस्लिम से निकाह अनियमित माना जाएगा। 

ऐसी अनियमित शादी का कानूनी प्रभाव यह होगा कि रिश्ता टूटने की स्थिति में पत्नी मेहर की राशि पाने की तो हकदार होगी लेकिन वह पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकेगी। 
यहाँ आप यह भी जान लीजिये कि मेहर क्या होता है.. दरअसल इस्लाम में निकाह से पहले एक कॉन्ट्रैक्ट sign होता है जिसके मुताबिक़ अगर लड़का लड़की के बीच तलाक होता है तो लड़की  अपने भरण पोषण के लिए एक तय रकम लेगी, ये कॉन्ट्रैक्ट निकाह के वक़्त ही sign होता है और इसके बाद ही इनकी शादी को वैध माना जाता है, तो तलाक की स्थिति में हिन्दू लड़की को मेहर की राशि मिलेगी लेकिन प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं लेकिन इस दंपति से जन्मा बच्चा अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सा ले सकता है।

 

मोहब्बत के चलते हिन्दू औरतों का मुस्लिम पुरुषों से शादी करना यकीनन उनका ज्यादती मामला है.. लेकिन समाज के बनाये नियमों के साथ साथ अब सुप्रीम कोर्ट भी इन शादियों को कानूनन खारिज कर चुका है, पहले जब आप अपने प्यार के लिए समाज के खिलाफ जाते थे तो देश का क़ानून आपको संरक्षण देता था.. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब आपको समाज और क़ानून दोनों के खिलाफ जाना होगा.. अब आपके देश का क़ानून भी आपको संरक्षण नहीं देगा.. इसलिए अब इस तरह की शादी की पूरी पूरी ज़िम्मेदारी आपके ऊपर होगी.. अब आपकी अपनी ज़िम्मेदारी सिर्फ आपके ऊपर होगी.. इससे भी ज्यादा गौर करने वाली बात ये है कि आम शादियों की तरह आप अपने पति की संपत्ति में हिस्सा भी नहीं मांग सकती.. तलाक के बाद भी.
हिंदुस्तान में हिन्दू स्त्री और मुस्लिम पुरुष शादियों का इतिहास बहुत पुराना है.. बेशक जोधाबाई और अकबर की शादी हुई हो, शाहरुख़ खान- गौरी, करीना कपूर और सैफ अली खान ऐसे कई सारे उदाहरण हैं.. जिन्होंने जाति और धर्म को परे रख शादी की.. लेकिन अब हमारे देश के सर्वोच्च न्यायालय यानि सुप्रीम कोर्ट ने इन शादियों को अवैध करार दे दिया है. हालाँकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि अगर आप में से कई लोगों ने ऐसी शादी की है तो वो यकायक गैर कानूनी हो गई.. लेकिन अगर आप हिन्दू महिला हैं और किसी मुस्लिम पुरुष से शादी करने का मन बना रही हैं.. तो इस बात को ध्यान में ज़रूर रखियेगा कि अब आपके देश का क़ानून भी आपकी इस शादी या निकाह के साथ नहीं होगा..