शत्रुघ्न सिन्हा के विवादित बयान से गरमाई राजनीति

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भाईं चुनावी मौसम है,सभी लोगों के सिर राजनीति चढ़ी हुई है, ऐसी वैसी नही बल्कि तगड़ी वाली। नेताओ के बड़बोले बयान भी नही थम रहें और लोग भी सियासत के चक्कर में पड़कर अपने पराए का अंतर भूलते जा रहें हैं। मतलब सियासी मौसम की तपिश में सब झुलसे हुए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही मुज़फ्फरनगर के बझेडी गांव में एक बेटे ने अपने माँ-बाप को सिर्फ इसलिए जान से मार देने की धमकी दी क्योकि उन्होंने बीजेपी के पक्ष में वोट दे दिया था।


इसके अलावा  बुलंदशहर के शिकारपुर लोकसभा क्षेत्र के अब्दुल्लापुर गांव का मामला भी आप भूल नही होंगे जब गलती से बीजेपी के पक्ष में वोट चले जाने पर एक युवक ने अपनी उंगली ही काटकट ही प्राश्चित किया था। 
खैर,ये तो बात हुई आम जनता की कुछ सियासी हरकतों की लेकिन अब बात करते हैं कुछ नेताओ की,पहले समाजवादी पार्टी आजम खान ने रामपुर से  बीजेपी उम्मीदवार जया प्रदा के अंडरवियर के रंग को लेकर विवादित बयान दे दिया, फिर मध्य प्रदेश की सीधी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अजय सिंह ने अपने सामने खड़ी बीजेपी उम्मीदवार रीति पाठक को माल बता दिया, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी भी इस रेस में पीछे नही रहें और पॉलिटिकल नंबर बढाने के चक्कर में उन्होंने भी पीएम मोदी और अमित शाह की तुलना दुर्योधन और दुःशासन से कर दी। विवादों का सिलसिला थमा नही, चुनाव आयोग की वॉर्निंग के बावजूद नेताओ ने अपने बड़बोले बयानो पर रोक लगाना सही नही समझा,वोट पाने और जनता को रिझाने के लिए जिसके जो दिमाग में आया बस बिना कुछ सोचे समझे बोल दिया। 

बीजेपी का दामन छोडकर कांग्रेस की शरण में गए  शत्रुघ्न सिन्हा इन सबमें सबसे एक कदम आगे रहें और उन्होने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को कांग्रेस परिवार का सदस्य बताते हुए तगड़ी तारीफ कर दी। 
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ के लिए प्रचार में पहुंचे शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस परिवार महात्मा गांधी से लेकर सरदार वल्लभ भाई पटेल तक, मोहम्मद अली जिन्ना से लेकर जवाहर लाल नेहरू तक, इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी और राहुल गांधी तक की पार्टी है.


उन्होंने कहा कि भारत की आजादी और विकास में इन सभी का योगदान है. इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी में आया हूं और एक बार आ गया हूं तो अब मुड़कर कहीं वापस नहीं जाऊंगा.हालांकि बाद में जब उनको लगा कि इससे कांग्रेस को फ़जीहत हो रही है तो उन्होंने मीडिया के सामने आकर अपने बयान को लेकर सफाई भी दी। 
उन्होंने कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी, वो मौलाना आज़ाद कहना चाहता था, लेकिन गलती से मोहम्मद अली जिन्ना कह दिया. 

बयान सिर्फ यही नही है बल्कि इसके अलावा भी सियासत की बदबू वाले काफी बयान देखने और सुनने को मिल रहें हैं। कुछ बयान को छोड़ दे तो ज्यादातर ग़लत बयानों के पीछे का मकसद अपने वोटबैंक को साधना ही होता है,नेता तो चुप हो जाते हैं लेकिन बाद में जनता पर इन सबका काफी गहरा असर पड़ता है,मुज़फ्फरनगर और बुलदंशहर की घटनाएं इसका परफेक्ट एग्जाम्पल भी है। हम तो यही कहेंगे कि ऐसे बयानों के जरिए वोटबैंक का साथ मिलता हो या ना पर खुद नेता और उसकी पार्टी की अच्छी ख़ासी फ़जीहत हो जाती है। इससे बढ़िया यही है कि क्यों ना भाषण के दौरान संयमित भाषा के इस्तेमाल से जनता के मुद्दे को उठाते हुए बात की जाए। यकीनन, इससे लोगों के दिल में नेता की तो अच्छी इमेज तो बनेगी ही साथ ही पार्टी को भी अच्छा खासा फायदा पहुँचेगा।