जैसे जैसे राज्यसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे कांग्रेस में अंदरूनी कलह भी गहराता जा रहा है. मध्य प्रदेश के बाद अब हरियाणा में पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा बगावत पर उतर आये हैं. खबरों के मुताबिक़ उन्होंने पार्टी आलाकमान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उनको या उनके बेरे दीपेन्द्र सिंह हुड्डा को राज्यसभा न भेजा गया विधायक किसी अन्य उम्मीदवार को वोट नहीं देंगे.

हरियाणा कांग्रेस में दो गुट हैं. एक गुट भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का और दूसरा गुट है हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष कुमारी शैलजा का. कांग्रेस कुमारी शैलजा और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला में से किसी एक को राज्यसभा भेजना चाहती है. कुमारी शैलजा सोनिया गांधी की करीबी हैं जबकि रणदीप सिंह सुरजेवाला राहुल गाँधी के करीबी हैं. जबकि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का कहना है कि कुमारी शैलजा पहले से ही प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष हैं इसलिए उनको राजसभा भेजने की कोई जरूरत नहीं है. जबकि रणदीप सिंह सुरजेवाला दो विधानसभा चुनाव हार चुके हैं इसलिए भूपेन्द्र सिंह हुड्डा उनके नाम के भी खिलाफ हैं.

हरियाणा में कांग्रेस के 30 विधायक है जबकि भाजपा गठबंधन के पक्ष में 57 विधायक हैं. इसमें जेजेपी और निर्दलीय भी शामिल हैं. राज्य में राज्यसभा की एक सीट के लिए 31 विधायकों की जरूरत है. ऐसे में कांग्रेस में मची अंदरूनी खींचतान में भाजपा को अपने लिए मौका दिख गया है. पार्टी को लगता है कि अगर कांग्रेस के दो-तीन वोट भी इधर उधर हुए तो भाजपा अपने दुसरे उम्मीदवार को भी जिता सकती है. कांग्रेस के उम्मीदवार को राज्यसभा में पहुँचने से रोकने के लिए भाजपा किसी निर्दलीय पर भी दांव खेलने को तैयार है. दूसरी तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बगावती तेवर ने कांग्रेस को बुरी तरह डरा दिया है.