पत्रकार की हत्या पर कोर्ट का फैसला आते ही परिवार के आँख से छलके आंसू

आखिर क्यों मिली एक पत्रकार को सच के लिए आवाज़ उठाने की सजा , क्यों उन्हें सरेआम गोली से मार दिया गया ,कसूर बस इतना था ,कि उन्होंने सच्चाई के लिए आवाज उठाई थी ,एक ऐसे ढोंगी के खिलाफ, जिसे लोग भगवान मानते थे, और उसकी पूजा करते थे ,जिसके पास एक गुफा भी थी , और उसके अन्दर सिर्फ साध्विया ही जाया करती थी ,वो अपने आप को बहुत बड़ा स्टार मानता था. आप में से बहुत से लोग समझ गये होंगे की हम किसकी बात कर रहे है ,जी हा यहाँ बात हो रही है राम रहीम की, जिन पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की ह्त्या का आरोप साबित हो चूका है

रामचंद्र छत्रपति ने वक़ालत छोड़कर “पूरा सच” के नाम से अख़बार शुरू किया था.जिसके वो सम्पादक भी थे एक दिन उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी हाथ लगी जिसमें डेरे में साध्वियों के यौन शोषण की बात लिखी थी, जब उन्होंने वह चिट्ठी पढ़ी तो उन्हें डेरे के ढोंगी बाबा राम रहीम के काले कारनामो का पता चला ,उसके बाद उन्होंने उस चिट्ठी को छापने की सोची ,और एक दिन आया जब उन्होंने अख़बार के फ्रंट पेज पर उसको छाप दिया .जब ये खबर राम रहीम तक पहुची ,और चारो तरफ फ़ैल गयी तो उसने रामचंद्र को जान से मारने की धमकियां दी देना शुरु कर दिया ,फिर एक दिन 19 अक्टूबर की रात छत्रपति को उन्ही के घर के सामने गोली मार दी गई. उस दौरान वह होश में आए थोड़े देर के लिए , लेकिन राजनीतिक दबाव कारण छत्रपति का बयान तक दर्ज नहीं किया गया इसके बाद 21 अक्टूबर को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

जिसके बाद उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की. वह बताते हैं कि छत्रपति अपने अख़बार में डेरा सच्चा सौदा से जुडी ख़बरों को छापते थे जिसके कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलती रहती थीं. पर आज वो दिन आ ही गया जब गुरमीत राम रहीम को विशेष सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिया गया .फैसला आने के बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति का परिवार भावुक हो गया। रामचंद्र छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति की आंखें भर आईं।उन्‍होंने कहा कि 16 साल बाद हमको आज न्‍याय मिला है और एक ताकतवर दुश्‍मन के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ने के बाद इंसाफ मिलना बेहद खास है। हम अदालत के ऋणी हैं, गवाहों के भी ऋणी हैं, जिन्‍होंने काफी दबावों के बावजूद अदालत में गवाही दी.

पूरे मामले के दौरान हमें और गवाहों को काफी दबाव झेलना पड़ा, ले‍किन हिम्‍मत नहीं हारी जिसका नतीजा पूरे समाज के सामने है, ये सजा उन लोगों को आइना दिखाने के लिए काफी है जो ऐसे ढोंगियों के चक्कर में अपना सब कुछ लुटा देते है ,और ऐसे ढोंगियों को अपना भगवान मानने लगते है.आज हमें ऐसे लोगों से बचने की जरुरत है, जो भक्ति के नाम पर समाज में पाप फैला रहे हैं

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