राहुल गाँधी के इन तीन करीबी नेताओं की वजह से गुजरात में उड़ी है कांग्रेस की नींद, राज्यसभा चुनाव से पहले पार्टी में कोहराम

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राज्यसभा चुनाव से पहले गुजरात कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है. वैसे गुजरात में जब भी राज्यसभा चुनाव होते हैं तो कांग्रेस के जान की आफत आ जाती है. याद कीजिये 2017 का राज्यसभा चुनाव जब सोनिया गाँधी के राजनितिक सलाहकार और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल की साँसे अटक गई थी. उस वक़्त भी कांग्रेस में जोरदार भगदड़ मची थी और अहमद पटेल की सीट अटक गई थी. उस वक़्त भी कांग्रेस को अपने विधायकों को रिसॉर्ट में छुपाना पड़ा था. इस बात भी वही सब हो रहा है. गुजरात पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का होम स्टेट है और इस राज्य में हर बार की तरह इस बार भी कांग्रेस आपसी कलह से जूझ रही है.

इस बार कांग्रेस में कलह राहुल गाँधी के तीन करीबी नेताओं की वजह से मची है. राहुल गाँधी के ये तीन वफादार नेता है प्रदेश कांग्रेस समिति चीफ अमित चावड़ा, कांग्रेस विधानसभा दल (सीएलपी) नेता परेश धनानी और ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के गुजरात इन्चार्ज राजीव साटव हैं. राहुल गाँधी ने अपने इन तीनों ही वफादार नेताओं को राज्य में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप दी. लेकिन इसके लिए उन्होंने सिद्धार्थ पटेल, नरेश रावल, कुंवरजी बावलिया और अर्जुन मोढवाडिया जैसे सीनियर नेताओं की भी उपेक्षा की गई. राहुल गाँधी ने अपने करेबियों को आगे लाने के लिए सोनिया गाँधी के करीबी अहमद पटेल को भी साइडलाइन कर दिया.

राहुल के इस एकतरफा फैसले से पार्टी में असंतोष फ़ैल गया. धीरे धीरे कांग्रेस के पुराने नेताओं ने राहुल गाँधी के समक्ष उनके भरोसेमंदों के एकतरफा फैसले की शिकायत करनी शुरू की लेकिन राहुल गाँधी ने आँख और कान दोनों बंद कर लिए. पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल ने अपने इन्ही तीनों भरोसेमंद नेताओं की पसंद को तरजीह दी. लोकसभा चुनाव के दौरान ही कांग्रेस का आपसी घमासान सामने आ गया था. भाजपा के खिलाफ लड़ने की बजाये कांग्रेसी नेता आपस में ही एक दूसरे के खिलाफ लड़ने लगे. कांग्रेस को इसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ा और अब राज्यसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ेगा. क्योंकि राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में भगदड़ मच चुकी है.