अभिनन्दन और आतंकी को एक ही तराजू में तौल दिए ये महान पत्रकार, खून ना खौल जाए तो कहना!

392

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए बवाल को तो आप जानते ही हैं.. भारत की कूटनीतिक जीत से पाकिस्तान आज शर्मिंदा है, परेशान है, हैरान है. मजबूर होकर पाकिस्तान ने भारतीय पायलट अभिनन्दन को वापस कर दिया लेकिन वापस करते वक्त भी पाकिस्तान ने अपनी नीचता का परिचय भी दे दिया है..अब अभिनन्दन की वापसी के बाद इस समाज का एक तबका तो ऐसा भी है जो भारत सरकार की जीत बता रहा है, भारत के कूटनीति का पाकिस्तान पर दबाव बता रहा है वही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पाकिस्तान की तारीफ करते नही थक रहे हैं. वे अभिनन्दन की रिहाई को पाकिस्तान की दरियादिली बता रहे हैं.. हालाँकि वो उत्तर प्रदेश में प्रचलित दरियादिली वाली कवाहत तो आपने सुनी ही होगी.

    इन सब बातो को छोड़ हम आगे बढ़ते हैं. पाकिस्तान ने अभिनन्दन को रिहा कर दिया वो भी मात्र 60 घंटों के भीतर… ये जिनेवा संधि का दबाव था या फिर भारत सरकार की कूटनीति.. इस पर ना पाकिस्तान जवाब देगा और ना ही इस बात को कभी स्वीकारेगा.. लेकिन भारत के कुछ लोग पाकिस्तान ने अभिनन्दन को क्यों रिहा किया इस पर अपनी राय जरुर रख रहे हैं..

जिनेवा संधि के तहत पाकिस्तान को अभिनन्दन को रिहा तो तो करना ही पड़ता.. आज तो नही तो दस दिन, महीना, छः महीना बाद! लेकिन एक क्रांतिकारी पत्रकारिता की वेबसाइट द वायर से एक लेख सामने आया है जिसमें भारतीय वायू सेना के पायलट और आतंकियों को एक तराजू में तौल दिया गया. ये बेहद शर्म की बात है कि हमारे देश से जेनेवा संधि के तहत आतंकियों के छोड़ने की बात हो रही है ऐसे माहौल में जब पाकिस्तान में पल रहे आतंकी देश की सेना पर हमला कर रहे है..सैकड़ों जवानों की शहादत ले चुके हैं. द वायर के जिस आर्टिकल की हम बात कर रहे हैं उसकी हैडलाइन में लिखा गया है Our New Love for the Geneva Conventions Should Extend to All Situations.

इस लेख के रचियता जावेद नक़वी हैं उनका लेख लिखने का मकसद कुछ हदतक तो हैडलाइन पढने से ही पता चल जाता है. हमारा प्यार जेनेवा कन्वेंशन के लिए हर स्थिति में लागू चाहिए! इस पोस्ट में जावेद जी ने अपना काम बखूबी किया है. इनफार्मेशन के साथ साथ अपना प्रोपगेंडा घुसेड दिया है वो भी अपनी चतुराई से.. भैया आज के लोग इतने तो समझदार हो ही गये हैं कि जो आपकी बहकी बहकी बातों की समझ सकें…. कश्मीर में पकड़े गए आतंकी और दुश्मन देश में पकड़े गए पायलट को एक ही तराज़ू में तौला जा सकता है। इसको कहते हैं धूर्तता कि जब आपके पास शब्द हों तो आप कुछ भी साबित करने पर उतर आते हैं।

लेख को पढने पर पता चलता है कि कैसे और क्यों जेलों में बंद आतंकी और कैदियों को वही सुविधाएँ मिलनी  चाहिए जो पायलट अबिनंदन को मिली है.. ये सारी बातें एक धड़े को हवा देती हैं जिसके लिए ‘कश्मीर पीपुल’ और ‘भारतीय लोग’ अलग हैं। जावेद नक़वी ने यह बात भी आर्टिकल में बेहद सूक्ष्म तरीके से कई बार कह दी है.

जावेद ने अपने हेडलाइन में एक शब्द का उपयोग किया है “नया प्यार” जावेद जी को समझना चाहिए ये नया प्यार नही है ये नया भारत है…नया भारत… इसी भारत में एक सरकार के कार्यकाल के दौरान सौरभ कालिया की आंखे निकाल ली गयी थी, बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गयी थी….वहीँ इस समय ऐसी सरकार हैं जिसके कार्यकाल में पाकिस्तान गए पायलट को 60 घंटें के भीतर भीतर वापस करना पड़ा… बस सरकार- सरकार का फर्क है. ये ‘नया प्यार’ नहीं है, ये नया भारत है जिसके लिए आतंकवादियों को निपटाना और देशवासियों की फ़िक्र करना नए कलेवर में उभर कर सामने आ रहा है। 

जावेद ने अपनी पोस्ट के दौरान कई बार भारतीय लोग और कश्मीरी लोग, अल्ट्रा नेशनलिस्ट का उपयोग किये हैं. अब हम यहाँ लेखक साहब से सवाल कर रहे हैं कि भारतीय लोग और कश्मीरी लोग क्या होता है? भारतीय लोग और कश्मीरी लोग से क्या मतलब है? कश्मीरी लोग भी भारतीय लोग ही है.. इस बात को जावेद जी को नोट करके रख लेना चाहिए.. और रही बात अल्ट्रा नेशनलिस्ट की , तोअगर देश के लिए मर मिटने को तैयार रहना, देश की सेना के सम्मान में खड़े रहना, देश का गुणगान करना अगर अल्ट्रा नेशनलिस्ट कहलाते हैं तो हाँ हम है और आपको कहना चाहता हूँ आप भी आइये… और एक बार अल्ट्रा नेशनलिस्ट बनकर तो देखिये… पाकिस्तान प्रेम खत्म हो जायेगा.. अल्ट्रा ना बन पाए तो मात्र नेशनलिस्ट ही बनकर देखिये..

इसके आगे इसमें लिखा गया है कि भारत के ‘अल्ट्रा नेशनलिस्ट’ टीवी चैनलों और उन पर आने वाले ग़ुस्सैल मिलिट्री विश्लेषकों में ‘अनयुजुअली ऑड डिमांड’ उठती दिखी कि पाकिस्तान को जेनेवा संधि का सम्मान करना चाहिए… अरे भैया हाँ आवाज उठेगी उठेगी और कहा जाएगा..हमारा पायलट पाकिस्तान में था… हमारे पास अधिकार था वापस मांगने का..हमने उसका फायदा उठाया  और जब हमें पता है कि हमारा पायलट हैं वहां तब हम वापस मांगेंगे और हमने तभी माँगा…..इसमें अनयुजुअली कुछ नही है..

आर्टिकल में घुमावट तो देखिए कि आर्टिकल में धीरे-धीरे युद्धबंदी और पायलट से किस तरीके से जावेद नक़वी ने विंग कमांडर अभिनंदन को ‘इंडियन कैप्टिव’ तक ला दिया… मतलब थोडा से ज्ञान बघार दो… थोड़ी सी जानकारी दे दो.. तारीफ कर दो लेकिन बीच में अपना प्रोपगेंडा घुसेड दो.. कम हो गया..

जावेद जैसे लोगों को समझ  लेना चाहिए कि देश के लोग अब समझदार हो चुके हैं. कुछ जानकारी वे खुद भी रखते हैं. डिजिटल के ज़माने में अगर आप किसी को गुमराह करने की कोशिश और प्रोपगेंडा करने की कोशिश करोगे तो ये आपके लिए ही खतरनाक साबित हो सकता है.