किसानों के आगे नही झुकेगी सरकार, कृषि मंत्री की दो टूक ‘कानून वापसी के अलावा…’

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कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच अब तक सात दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन गतिरोध दूर नही हो सका. किसान तीनों कानूनों को वापस लेने पर अड़े हुए हैं. वो किसी भी तरह के संशोधन को तैयार नही. शुक्रवार को सरकार और किसानों के बीच आठवें दौर की बातचीत होनी है. किसानों के अड़ियल रुख को देखते हुए उम्मीद कम ही है कि इस गतिरोध का कोई समाधान निकलेगा. इसलिए किसानों की जिद के जवाब में सरकार ने भी सख्त रुख अपना लिया है.

आठवें दौर की बातचीत से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि अब सरकार तीनों कानूनों को वापस लिए जाने के अलावा किसी भी प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है. दरअसल पिछली बातचीत के दौरान सरकार ने किसानों की दो मांगे मान ली थी लेकिन इसके बावजूद किसान लचीलापन दिखाने को तैयार नही हुए. सरकार चाहती है कि गतिरोध खत्म करने के लिए अगर दो कदम वो बढ़ाती है तो किसानों को भी जिद छोड़ते हुए दो कदम आगे बढ़ाना चाहिए.

सिर्फ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी के किसान ही कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. जबकि इन कानूनों के समर्थन में कई अन्य किसान संगठन सरकार को ज्ञापन सौंप चुके हैं. सरकार ने सातवें दौर की बातचीत के दौरान कहा कि हमे पूरे देश के किसानों के हित की चिंता करनी है इसलिए पूरे देश के किसानों से बातचीत के बाद ही कानून वापसी पर कोई फैसला होगा. लेकिन अब कृषि मंत्री के बयान से लगता है कि सरकार कृषि कानून पर नही झुकेगी.