सत्ता पाने के लिए वो गठबंधन जिसने लोगों को हैरान कर दिया

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 महाराष्ट्र में सत्ता के लिए जिस तरह सरकार बनाने की कोशिश की गयी उसने बहुत लोगों को हैरान कर दिया.. क्यों बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन तो ठीक है क्योंकि दोनों में कई समानताएं भी है लेकिन शिवसेना का गठबंधन कांग्रेस और एनसीपी के साथ? ये बात उन लोगों को हजम नही हो रही है, जिन्हें ये नही पता है जो हम आगे बतायेंगे..
  अगर बात शिवसेना और कांग्रेस की जाये तो इससे सबको हिचक तो थोड़ी हुई.. क्योंकि शिवसेना कट्टर हिंदुत्ववादी छवि वाली पार्टी है और कांग्रेस खुद को सेक्युलर मानती है.. फिर भी चर्चा तो यही हुई कि कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना का बेमेल मेल सरकार बना सकती है..

इससे पहले भी इस तरह की गठजोड़ वाली सरकार बन चुकी है जो लोगों को हैरान होने पर मजबूर कर चुकी है.  लेकिन ऐसे कई उदाहरण हमने देखे.. आइये एक बार उसपर नजर घुमाते है.

कांग्रेस-बीजेपी का गठबंधन

आपको जानकर हैरानी होगी कि कांग्रेस और बीजेपी भी गठबन्धन कर चुके है. दरअसल मिजोरम के चकमा स्वायत्त जिला परिषद के 20 सदस्यों के लिए 2018 में चुनाव हुए थे. मिजोरम नेशनल फ्रंट के 8 सदस्य चुने गए, कांग्रेस के 7 और बीजेपी के 5 उम्मीदवार विजयी रहे.. यहाँ पर जिला परिषद पर कब्जा करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने गठबंधन कर लिया था. हालाँकि इसमें केन्द्रीय नेताओं की दखलंदाजी नही थी इसमें स्थानीय नेताओं की रजामंदी से हुआ था. अगस्त 2019 में कांग्रेस के 3 सदस्य बीजेपी में शामिल हो गए. हालांकि बाद में एक सदस्य ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और इस तरह बीजेपी के सदस्यों की संख्या 7 हो गई..

जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी का गठबंधन

 जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनायी थी. मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती बनी थी. इसके लिए बीजेपी की खूब किरकिरी हुई थी. बीजेपी का कहना था कि पीडीपी अलगाववादियों का समर्थन करने वाली पार्टी है. इसके साथ ही बीजेपी के घोषणापत्र में शामिल था कि कश्मीर से 370 हटाना है. वहीँ पीडीपी बिलकुल इसके खिलाफ थी.. ऐसे और भी कई मुद्दों पर मतभेद था लेकिन दोनों में गठबंधन हुआ और दोनों ने सरकार बनायीं. इससे लोगों को हैरानी हुई लेकिन बीजेपी की ही केद्र सरकार ने 370 को हटाया भी!

जिसको खत्म करने के लिए पार्टी बनाई, उसी के साथ गठबंधन

  दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जी की पार्टी आम आदमी पार्टी आई तो थी कांग्रेस कि उखाड़ कर फेंकने के लिए….लेकिन पहली बार चुनाव जीतने के बाद जब दिल्ली में किसी पार्टी को बहुमत नही मिला तो जिसे को कोसकर आम आदमी पार्टी दूसरी बड़ी पार्टी बनाकर उभरी थी, उसी से गठबंधन कर लिया.. और सरकार बनायीं

कांग्रेस और जेडीएस एक दुसरे के कट्टर विरोधी थे!

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस चुनाव से पहले एक दुसरे के कट्टर विरोधी थे… लेकिन चुनाव के नतीजों के बाद दोनों ने मिलकर सरकार बनाई. इस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कई बार रोते हुए भी देखे गये..

बीजेपी के सहयोग से मायावती दो बार बनी मुख्यमंत्री

भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से ही मायावती दो बार मुख्यमंत्री बन चुकी है. 1995 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में बीएसपी की सरकार बनवाई थी. गेस्ट हाउस काण्ड के बाद मायावती ने मुलायम सिंह यादव की सरकार से समर्थन वापस ले ली थी.. इसके बाद बीजेपी की सहयोग से मायवाती सत्ता हासिल करने में कामयाब हो गयी थी..

 तो भैया राजनीति है ये.. इसमें कोई भी, किसी के भी साथ सत्ता पाने के लिए…… नही, जनता की सेवा करने के लिए गठबंधन कर सकता है.