घाटी में बिगड़ सकते हैं हालात, इकट्ठा कर लें 4 महीने का राशन, एक पत्र से फैलायी जा रही आफवाह

1882

जम्मू कश्मीर को लेकर इन दिनों काफ़ी गरमा गरमी है। सोशल मीडिया पे ऐसी चर्चाएँ है कि धारा ३५A को लेकर केंद्र सरकार कुछ बड़ा करने वाली है। इन्ही चर्चाओं के बीच के बीच रेलवे सुरक्षा बल के एक बड़े अधिकारी का एक पत्र लीक हुआ है। जो इन बातों को और बल देता हुआ मालूम पड़ रहा है।दरअसल, जम्मू-कश्मीर के बडगाम में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अधिकारी ने इस चिट्ठी में आने वाले दिनों में कश्मीर में तनाव और हिंसा की आशंका जाहिर करते हुए कर्मचारियों को आगाह किया है. आरपीएफ बडगाम के सहायक सुरक्षा आयुक्त सुदेश नुग्याल ने चिट्ठी लिखकर कर्मचारियों से ‘लंबे समय तक’ कश्मीर घाटी में ‘कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका’ के कारण राशन जमा करने को कहा. इस चिट्ठी के बाद विभाग में खलबली मच गई. जिसके बाद रेलवे को सफाई देना पड़ा. रेलवे ने शनिवार को स्पष्ट किया कि इस चिट्ठी का कोई आधार नहीं. साथ ही इसे जारी करने का संबंधित अधिकारी के पास कोई अधिकार नहीं है

.


आरपीएफ अधिकारी सुदेश नुग्याल ने शनिवार को ये चिट्ठी सोशल मीडिया पर शेयर की है. इसमें लिखा है, ‘कश्मीर घाटी में लंबे समय तक स्थिति के बिगड़ने की आशंका और कानून व्यवस्था के संबंध में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और एसएसपी/जीआरपी/ एसआईएनए से मिली जानकारी के अनुरूप 27 जुलाई को एहतियात सुरक्षा बैठक हुई.’ आरपीएफ बडगाम के सहायक सुरक्षा आयुक्त सुदेश नुग्याल ने लिखा, ‘कश्मीर में हालात बिगड़ने वाले हैं. ऐसे में कर्मचारी कम से कम चार महीने के लिए राशन इकट्ठा कर लें. अपने परिवार को घाटी के बाहर भेज दें. इस बात के फैलते ही सबसे पहले इस मामले को लपका कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने, उमर ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि घाटी के लोगों पर यह तोहमत लगाना आसान है कि वह डर फैला रहे हैं लेकिन ऐसे आधिकारिक आदेश का क्या करें जिसमें कश्मीर घाटी में कानून व्यवस्था बिगड़ने की बिना पर तैयारियों की बात की जा रही है और इस तरीके की भविष्यवाणी की जा रही है. इस चिट्ठी के वायरल होने के बाद रेलवे बोर्ड के प्रवक्ता ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि ये चिट्ठी वरिष्ठ संभागीय सुरक्षा आयुक्त से बस एक पद नीचे के अधिकारी द्वारा बिना किसी अधिकार के लिखा गया. जबकि, वह 26 जुलाई से एक साल के स्टडी लीव पर गए हैं.

प्रवक्ता ने कहा कि इस अधिकारी ने अपनी धारणा के आधार पर यह चिट्ठी लिखी और उसे जारी किया. इसका कोई आधार नहीं है और वह ऐसी चिट्ठी जारी करने के लिए अधिकृत भी नहीं है. रेलवे प्रवक्ता ने कहा, ‘यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इस चिट्ठी को अधिकृत करने वाले प्राधिकार से कोई मंजूरी नहीं मिली थी. आरपीएफ के महानिरीक्षक (एनआर) को स्थिति के आकलन और सुधार के कदम उठाने के लिए भेजा जा रहा है.’बता दें कि यह विवाद ऐसे समय में खड़ा हुआ है, जब राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 100 और कंपनियां राज्य में भेजे जाने को लेकर कश्मीरी नेताओं का एक वर्ग केंद्र की आलोचना कर रहा है. ख़ैर घाटी की हालत में क्या बदलाव आ सकता है ये तो आने वाला वक़्त बताएगा। फ़िलहाल इस चिट्ठी की कोई पुष्टि नही हुई।