आतंकवाद के खिलाफ जर्मनी की पहल

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जर्मनी ने यूरोपियन यूनियन में ग्लोबल टेररिज्म के खिलाफ एक बड़ी पहल की है .जर्मनी  सयुक्त राष्ट्र संघ  में यह प्रस्ताव रखने वाला है कि मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया जाए.  अगर जर्मनी की यह बात मान ली जाती है तो यूरोपियन यूनियन के 28 देशों में उसकी संपत्ति जप्त कर ली जाएगी और उन देशों में उसके प्रवेश पर भी रोक लगा दिया जाएगा.

आपको बता दें कि  पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश के हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे. इस हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी सदस्यों अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए प्रस्ताव पेश किया था. लेकिन चीन ने मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने से पहले वीटो कर दिया था. मतलब की चीन ने अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर के मसूद अजहर का समर्थन किया और यह कहा की उसके खिलाफ पुरे सबूत नहीं है.

बहरहाल, राजनयिक सूत्रों ने यह  बताया  है कि जर्मनी ने अजहर को यूरोपीय यूनियन द्वारा प्रतिबंधित कराने के लिए प्रस्ताव रखा तो है लेकिन अब तक जर्मनी की पहल पर कोई रिजॉलूशन नहीं आया है. उन्होंने बताया कि यूरोपीय यूनियन  के सभी 28 देशों के समर्थन के बाद ही प्रस्ताव पास होगा. मसलन यूरोपीय यूनियन में इस तरह के मामलों पर आम सहमति के आधार पर फैसला होता है.

वैसे 15 मार्च को फ्रांस ने मसूद अजहर पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिया है और यह कहा है कि वह जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख को यूरोपियन यूनियन  की आतंकी गतिविधियों में इन्वोल्व लोगों और संगठनों की लिस्ट में डालने के लिए यूरोपीय यूनियन के अन्य देशों के साथ मिलकर काम करेगा. चीन के वीटो की वजह से प्रस्ताव गिर गया था लेकिन उसके बाद ही फ्रांस की ओर से यह बात कही गई थी.

आतंकवाद को पनाह देने के कारण पकिस्तान को हर तरफ से निंदा सहनी पड़ रही है. निन्दा और आलोचना हो भी क्यों ना? जहाँ एक तरफ पूरा विश्व इस समस्या से परेशान है वहीं दूसरी ओर पकिस्तान  पाकिस्तान इसकी  ना सिर्फ मदद कर रहा है बल्कि मदद ले भी रहा है. लेकिन अब चीन का ईयू में ऐसा रवैया चिंता का कारण बन रहा है . वहीं भारत को भी इससे झटका लगा है.

लेकिन क्या इसका असर सिर्फ भारत या मसूद अजहर के खिलाफ खड़े देशों को होगा? वैसे सोचने वाली बात है ये.

लेकिन उससे पहले हम आपको यह बता दें कि चीन ने मसूद अजहर के हित में वीटो का इस्तेमाल तो कर लिया लेकिन वह, यह भूल गया की ईयू में और भी 5 देश है. तभी तो इसके तुरंत बाद फ्रांस ने आर्थिक प्रतिबन्ध  लगाने का फैसला सुनाया. और अब जर्मनी की पहल भी यही दिखा रही की आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाना ज़रूरी है. वहीं अमेरिका का कहना है कि यदि चीन इसी तरह अड़ंगा लगाता रहा तो सदस्य देशों को दूसरे विकल्प पर ध्यान देना पड़ेगा. मसलन अब हर तरफ से चीन के रवैये के कारण इसे  ISOLATE किया जा रहा है. और यह अपनी जगह सही भी है क्योंकि जिस आतंकवाद से पूरा विश्व परेशान है उसको समर्थन देना कहाँ की बुद्धिमानी है