पढ़ाई करने भारत आये जर्मन छात्र को CAA का विरोध करना पड़ा भारी, चुकानी पड़ी कीमत

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जब किसी को पढ़ाई के लिए किसी देश का वीजा मिलता है तो उसके कई नियम और क़ानून होते हैं जिसे मानना पड़ता है. अगर उन कानूनों का उल्लंघन किया जाए तो वीजा कैंसल कर के उसे देश से निकला भी जा सकता है. ये नियम हर देश में हैं. क्योंकि एक छात्र के तौर पर विदेश जाने का मुख्य मकसद सिर्फ पढ़ाई होनी चाहिए ना कि वहां की अंदरूनी राजनीति में हस्तक्षेप करना.

इसी तरह के एक कानून का उल्लंघन करना जर्मन छात्र हैकब को भरी पड़ गया. जैकब को उसके देश जर्मनी वापस भेज दिया गया. जैकब जर्मनी का रहने वाला था और वो आईआईटी मद्रास में रहकर पढाई कर रहा था. जैकब ने पिछले महीने नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. पिछले सप्‍ताह चेन्‍नै के वल्‍लूवरकोट्टम में प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एक प्‍लेकार्ड हाथ में लिया था। नागरिकता क़ानून की तुलना इसमें यहूदियों पर नाजियों के अत्‍याचार से की गई थी. जैकब भी उस प्रदर्शन में शामिल था और उसने हाथों में CAA विरोधी बैनर पकड़ रखा था.

आव्रजन विभाग के मुताबिक़ एक विदेशी नागरिक द्वारा राजनीतिक गतिविधि या विरोध प्रदर्शन में हिस्‍सा लेना, वीजा नियमों का उल्‍लंघन है. इस तरह के उल्‍लंघन पर विदेशी नागरिक को उसके देश वापस भेज दिया जाता है. जांच में ये सामने आया कि जैकब स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत भारत आया था और आईआईटी मद्रास में फिजिक्स से एमएससी कर रहा था. उसकी 6 महीने की पढाई बाकी है. उसे मई 2020 में वापस लौटना था लेकिन उसे तत्काल वापस भेज दिया गया.