पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित करने के बाद सियासी हंगामा खड़ा कर दिया. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने राष्ट्रपति के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं और आरोप लगाया है कि रंजन गोगोई को सरकार के पक्ष में फैसले सुनाने का इनाम मिला है. आपको बता दें कि पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने लगातार 40 दिनों तक अयोध्या मामले की सुनवाई कर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. साथ ही उन्होंने राफेल मुद्दे पर भी फैसला सुनाया था.

कांग्रेस ने रंजन गोगोई के राज्यसभा के लिए नामित होने पर सवाल तो उठा दिए लेकिन वो अपना इतिहास भूल गई. चीफ जस्टिस को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा भेजने की परंपरा की शुरुआत कांग्रेस ने ही की थी. पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा को कांग्रस ने राज्यसभा भेजा था. रंगनाथ मिश्रा उस रंगनाथ मिश्रा कमिटी के अध्यक्ष थे जिसे 1984 के सिख दं’गों की जांच के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने गठित किया था. उस वक़्त रंगनाथ मिश्रा सुप्रीम कोर्ट में जज थे. 1987 में उन्होंने अपनी रिपोर्ट सौंपी. सब जानते थे कि किस तरह कांग्रेसी नेताओं ने सिखों के खिलाफ दं’गे भड़काए लेकिन आश्चर्यजनक रूप से रंगनाथ मिश्रा ने इसमें कांग्रेसी नेताओं को क्लीनचिट दे दी और साथ ही कई और कमिटियों का गठन कर दिया जिस कारण न्यायायिक प्रक्रिया में देरी हुई.

रंगनाथ मिश्रा कमिटी

रंगनाथ मिश्रा की रिपोर्ट पर ढेरों सवाल उठे. इंडियन आर्मी के चीफ कमांडिंग ऑफिसर और सिटिजन जस्टिस कमिटी के सदस्य रहे जगजीत सिंह अरोड़ा ने कहा था कि कमीशन पी’ड़ितों से ठीक बर्ताव नहीं करता था. जांच के दौरान पीड़ितों पर प्रेशर डाला जाता कि उनके साथ हुई नाइंसाफी के सबूत दिखाएं. इस दंगों में करीब 3000 सिखों का क’त्ले’आम किया गया. उस वक़्त एक मानवाधिकार संस्था हुआ करती थी पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (PUCL) नाम से. इसका गठन 1976 में जयप्रकाश नारायण ने किया था. इस संस्था ने 17 कांग्रेसी नेताओं पर दंगों में शामिल होने के आरोप लगाये लेकिन रंगनाथ मिश्रा कमिटी ने सभी को क्लीनचिट दे दिया.

बाद में बने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया

जिस वक़्त रंगनाथ मिश्रा कमिटी का गठन हुआ उस वक़्त रंगनाथ मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के जज थे. जस्टिस मिश्रा 1983 में सुप्रीम कोर्ट जज बने. फिर 1990 में वो देश के 21वें चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया बने. जब वो चीफ जस्टिस के पद से रिटायर हुए तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पहले चेयरमैन भी बने. साल 1998 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा. जस्टिस मिश्रा 1998 से 2004 तक राज्यसभा सांसद रहे.

रंजन गोगोई को तो राष्ट्रपति ने नामित किया है लेकिन पूर्व चीफ जस्टिस रंगनाथ मिश्रा को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा था. लेकिन कांग्रेस अपना अतीत बहुत जल्दी भूल जाती है.