यह है bollywood की पहली Stunt woman

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मुंबई is equals to bollywood… ऐसी ही सोच होती है लोगों की … और हो भी क्यों न? … जब इसको ही फिल्मों का गढ़ माना गया है… न जाने कितने लोग रोजाना bollywood में अपनी किस्मत आजमाने आते है… कईयों के सपने पुरे हो पते तो कुछ के अधूरे रह जाते है…

ऐसा नहीं है कि bollywood में लोग सिर्फ फिल्म स्टार बनने आते… कुछ डायरेक्शन फ़ील्ड में जाते है … कुछ प्रोडक्शन में तो कुछ music का फ़ील्ड भी चुनते …
लेकिन इन सब के बाद भी कुछ ऐसे लोग होते है जो जूनियर आर्टिस्ट या फिर स्टंट पर्सन कर रह जाते है.. वैसे आपलोगों में से बहुत से ऐसे लोग होंगे जिन्होंने स्टंट पर्सन पहली बार सुना होगा…. वो इसलिए क्योंकि जब भी फिल्मों में स्टंट का ज़िक्र होता है तो सबसे पहले नाम लिया जाता स्टंट मैन का … लेकिन हमारे bollywood में सिर्फ स्टंट मैन ही नहीं बल्कि स्टंट woman भी होती है…. हम आपको बता दें कि हमारे फिल्म industry में कई स्टंट वीमेन भी हुई है… जिनका ज़िक्र बहुत कम जगहों पर हुआ है….या फिर कह लीजिये नहीं भी,….

लेकिन आज हम जिक्र करने जा रहे हैं bollywood की पहली स्टंट woman के बारे में… “शोले ” फिल्म तो आप भूले नहीं होंगे … वैसे भी कौन भूल सकता… एक क्लासिक फिल्म को … जय वीरू के दोस्ती के साथ बसंती भी काफी फेमस हैं आज तक … वो बक बक करना , वो टांगा चलाना और डाकुओं से भिड़ जाना … और फिर जान खत्म होने से पहले तक नाचना … सच में कभी न भूलाया जाने वाला किरदार निभाया है हेमा मलिन ने…
लेकिन क्या उसके पीछे सिर्फ हेमा मलिन का हाथ है… ऐसा नहीं है.. आज बसंती के किरदार से एक पर्दा उठाते है… बात दरअसल कुछ ऐसी है कि फिल्म शोले में जब बसंती डाकुओं से मुकाबला करती है और टाँगे की रफ़्तार कम नहीं होने देती, तो असल में वह हेमा मलिन नहीं बल्कि उनका रूप में एक दूसरी लड़की रहती है … जो की भारतीय सिनेमा जगत की पहली स्टंट वुमन है… नाम है उनका रेशमा पठान … शायद कुछ गीने चुने लोगो ने इनका नाम सूना होगा …

वो तो भला हो zee5 का जिन्होंने “The sholay girl” नाम की फिल्म बनाई… और दुनिया के सामने इस स्टंट वुमन को लेकर आई …
हालांकि इस पहली महिला स्टंट कलाकार ने हेमा मालिनी की तमाम दूसरी सुपर हिट फिल्मों में भी उनके बॉडी डबल का काम किया…. मतलब की उनके जगह स्टंट किया….
वैसे इनका संघर्ष काफी मुश्किलों भरा रहा है.. हर मोड़ पर अपने वजूद के लिए लड़ना पड़ा..

हिंदी सिनेमा में पहले स्टंट woman का कांसेप्ट नहीं था… लड़के ही लड़कियों के कपड़ों को पहन कर स्टंट किया करते थे… लेकिन जब रेशमा पठान ने यह करने की कोशिश की तो उनके सहयोगी ही उनके खिलाफ हो गए … लेकिन उनकी लड़ाई और फिल्म डायरेक्टर्स का विश्वास उनको आगे बढ़ता गया… वैसे तो उन्होनें बहुत सारी फिल्मों में स्टंट किया है लेकिन उनकी सबसे पहली फिल्म थी 1 खिलाड़ी 52 पत्ते… जिसमें लक्ष्मी छाया के लिए इन्होनें काम किया था… फिल्में बहुत की इन्होने…
लेकिन हाँ उन्हें एक पहचान कभी नहीं मिल पाई … जैसे फिल्मों में उनका स्टंट होता था और पर्दों पर हेरोईनों का वैसे ही असल ज़िन्दगी में भी उनके existance को कही न कही replace किया जाता रहा है….

भले ही आज उनके जीवन पर फिल्म बन चुकी है… लेकिन क्या सिर्फ फिल्म बना देना ही काफी है…फिल्म industry में उनके contribution को क्या यह फिल जस्टिफाई कर सकती है? मैं इसलिए ये सवाल पूछ रही क्योंकि जब उन्होनें फिल्मों के लिए काम किया तो उन्हें सिर्फ उसके बदले पैसे मिलते थे …. नाम हमेशा पर्दे पर दिखने वाली हेरोईनों का होता था… और इसी के साथ रेशमा पठान का वजूद धुंधला पड़ते गया….