इस शख्स ने पीएम बनते ही लिया ऐसा फैसला कि जनता के चेहरे पर छा गई ख़ुशी

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छुट्टी किस को पसंद नहीं होती, सभी लोग अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाना चाहते हैं.फिर चाहे ऑफिस जाने वाले लोग हो या बच्चे जो स्कूल या कॉलेज जाते हैं. अपने देश में सरकारी हो या प्राइवेट जॉब करने वाले लोग उन सबको हफ्ते में 1 दिन की छुट्ठी मिलती है, और ये बात लगभग हर देश में लागू होती है भारत के अलावा. लेकिन अभी कुछ दिनों पहले ऐसा सुनने को मिला कि एक ऐसा देश है जहाँ ऑफिस के वर्किंग आवर्स यानि ऑफिस में काम करने के घंटे कम कर दिए गएँ है. उसके साथ-साथ वहां पर ऑफिस वाले जो लोग हैं उनको ऑफिस में हफ्ते के 6 दिन काम नही करना होगा उसमे भी कटौती की गई है.

तो आज हम बात करते है एक ऐसे देश की जहाँ पर लोगो के लिए उनकी सरकार ने अपने देश के लोगो के लिए ये बड़ा फैसला लिया है,वो देश है “फ़िनलैंड”

फ़िनलैंड में बीते कुछ दिन पहले 34 साल की सना मारिन को देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है. अभी कुछ दिन पहले नया साल बीता है और लोग नए साल की छुट्टियाँ मना कर के वापस आधे मन से न चाहते हुए भी अपने काम पर लौटना पड़ा. ये देखते हुए फ़िनलैंड के लोगों के लिए वहां की पीएम् सना मारिन ने एक अच्छी खबर देने की तैयारी कर ली है. सना चाहती हैं कि उनके देश के लोग हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम करें और उनके काम के घंटे भी लचीले होने चाहिए. आपको बता दें कि सना, दुनिया की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री हैं.

फ़िनलैंड की पीएम सना ने वर्किंग लाइफ को बेहतर बनाने के लिए इस प्रस्ताव को तैयार किया हैं. इस प्रस्‍ताव के तहत लोगों को चार दिन तक काम करना होगा जो कि पहले 6 दिन काम करते थे. उसको कम कर दिया गया है. उनके वर्किंग ऑवर्स में भी कटौती की गई है. जो पहले 8 घंटे थे. वो अब बस छह घंटे तक ही होंगे. ”मारिन ने कहा, ‘मेरा मानना है कि लोगों को अपने परिवार, अपने चाहने वालों और जिंदगी के दूसरे पहलुओं जैसे संस्‍कृति के साथ ज्‍यादा समय बिताने का अधिकार मिलना चाहिए। यह हमारी वर्किंग लाइफ का अगला कदम हो सकता है।’ हालांकि अभी तक मारिन के इस प्रस्‍ताव की खास बातों के बारे में कोई और ज्‍यादा जानकारी नहीं दी गई है.”

फ़िनलैंड की बात करें तो साल 1996 में एक कानून लाने की तैयारी हो रही थी, और कई दशकों से कम वर्किंग ऑवर्स की बात की जा रही है.

“साल 1996 में सरकार एक ऐसा कानून लेकर आई थी जिसके तहत कर्मियों को यह अधिकार दिया गया था कि वे अपनी ऑफिस टाइमिंग्‍स के मुताबिक वर्किंग ऑवर्स को तीन घंटे पहले या फिर बाद में अपनी सुविधा के हिसाब से शिफ्ट कर सकते हैं. मारिन ने दिसंबर में अपना पीएम पद संभाला था और तब से ही उन्‍होंने कई ऐसे सुझाव पेश किए हैं जो व्‍यवस्‍था में सुधार से जुड़े हैं, और सबसे बड़ी बात ये है कि सना के इस नए प्रस्‍ताव का समर्थन वामपंथी गठबंधन ने भी किया है

फिनलैंड पहला ऐसा देश नही है. जहां पर वर्किंग ऑवर्स को लेकर बातें हो रही हैं. फिनलैंड के पड़ोसी देश, स्वीडन में साल 2015 में ऐसा कानून आ चुका है। स्‍वीडन में तब छह घंटे तक काम करने की नीति का ऐलान किया था. स्‍वीडन का मानना था कि ऐसा करने से लोगों के हैप्‍पीनेस के स्‍तर में सुधार होगा। यूरोप के एक और देश फ्रांस ने साल 2000 में हफ्ते में काम करने के घंटों को कम किया था। फ्रांस ने 39 घंटों वाले वर्किंग ऑवर्स को कम करके 35 घंटे का कर दिया था।