फिल्म फेयर अवार्ड ना मिलने से नाराज इस गीतकार ने खाई ऐसी कसम

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इस साल के फिल्मफेयर अवार्ड्स की घोषणा शनिवार शाम को हो चुकी हैं. जिसमें बॉलीवुड जगत के कई बड़े सितारों ने शिरकत की. फिल्मफेयर अवार्ड साल में केवल एक ही बार आयोजित होता है और इस बार यह अवार्ड शो असम के गुवाहाटी में आयोजित हुआ. बता दें इस अवार्ड शो में बड़ी बड़ी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति से शो में चार चांद लगाये. वहीं इस शो के होस्ट शाहरुक खान और विकी कौशल थे.

फिल्मफेयर अवार्ड शो में URI, गली बॉय, मिशन मंगल जैसी बड़ी फिल्मों में काटें की टक्कर थी. वहीं इस साल का फिल्मफेयर अवार्ड फिल्म ‘गली बॉय’ ने अपने नाम किया. इसी के साथ बेस्ट एक्टर और एक्ट्रेस का अवार्ड भी रणवीर सिंह और आलिया भट्ट के नाम हुआ. वही फिल्म गली बॉय ने 10 अवार्ड अपने नाम किये.

इस अवार्ड की रेस में फिल्म गली बॉय का गाना ‘अपना टाइम आएगा’ और केसरी फिल्म का गीत’ तेरी मिट्टी’ शामिल था. जिसमे बेस्ट लिरिक्स के लिए ‘अपना टाइम आएगा’ गीत को चुना गया. जिस वजह से ‘तेरी मिट्टी’ गाने के गीतकार इसी इस बात से नाराज हो गए और उन्होंने औपचारिक तौर पर घोषणा कर दी कि वो अब किसी भी अवार्ड शो में नही आएंगे. इसी के साथ गीतकार मनोज मुंतशिर की इस घोषणा ने विवाद का रूप ले लिया.

अवार्ड न मिलने की बात से नाराज गीतकार मनोज मुंतशिर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि प्रिय अवॉर्ड्स…अगर मैं अपनी पूरी जिंदगी भी कोशिश करूं तो ‘तू कहती थी तेरा चांद हूं मैं और चांद हमेशा रहता है’ से अच्छी लाइन नहीं लिख पाऊंगा. आप उन शब्दों का सम्मान करने से चूक गए जिसने लाखों भारतीयों की आंखों में देश के लिए आंसू ला दिए थे. यह मेरी कला का अनादर होगा अगर मैं अब भी तुम्हारे बारे में सोचता रहूं. यह मेरी तरफ से फाइनल गुड बाय. मैं आधिकारिक रूप से घोषणा करता हूं कि अपनी आखिरी सांस तक किसी अवॉर्ड कार्यक्रम में नहीं जाऊंगा. बता दें तेरी मिट्टी गीत फिल्म केसरी में फिल्माया गया हैं जिसमें मुख्य भूमिका अक्षय कुमार ने निभाया हैं.

इससे पहले भी फिल्मफेयर अवार्ड्स पर सवाल उठते रहे हैं कि जो भी अवार्ड दिए जाते हैं उन्हें फिल्मफेयर निष्पक्षता के साथ नहीं देता हैं. जो शर किड्स होते हैं उनको ही ज्यादाटार ये अवार्ड्स दे दिए जाते है. फिल्म केसरी में फिल्माया गीत ‘तेरी मिट्टी’ ने लाखों दिलों को छुआ था. वहीं यह एक ऐसा गीत था जो हमारे देश के लिए कु’र्बान हो जाने वाले वीरों की गाथाओं को बयां करता है उनके दर्द को दिखाता हैं. लेकिन इस तरह के गीतों को फिल्म फेयर जैसे बड़े अवार्ड्स में अहमियत भी नहीं मिलती. इससे पहले भी फिल्म मसान की जगह सूरज पंचोली को अवार्ड दिया गया था. जिसके बाद भी विवाद हुआ था.