सरकार और किसानों के बीच आज की बातचीत भी बेनतीजा, सरकार ने कहा ‘कानून पूरे देश के लिए है एक राज्य के लिए नही,अब सुप्रीम कोर्ट ही करे फैसला’

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कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध शुक्रवार को आठवें दौर की बातचीत के बाद भी दूर नही हो सका. आज की बातचीत में भी किसान कानून वापसी को लेकर अड़े रहे जबकि सरकार ने भी साफ कह दिया कि कानून तो वापस नही होगा. हाँ, अगर किसान प्रतिनिधियों के पास कानून रद्द करने के अलावा कोई और विकल्प हो तो उसे पेश करें. इसपर किसान प्रतिनिधियों की तरफ से कहा गया कि वो कानून वापसी के अलावा और किसी विकल्प पर बात नही करना चाहते.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं. हमारे लोकतंत्र में राज्य सभा और लोकसभा से कोई कानून पास होता तो उसका विश्लेषण करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट का है. सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर सुनवाई भी हो रही है. कृषि मंत्री ने ये भी कहा कि कानून पूरे देश के लिए है न कि किसी राज्य के लिए. देश के किसान इन कानूनों को खूब समर्थन दे रहे हैं. किसान नेता हनान मुला ने कहा कि हम सिर्फ तीनों कानूनों की वापसी चाहते है. उसके अलावा और कोई मांग नही है हमारी. हम कोर्ट नहीं जाएंगे. कानून वापस होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी. आज की बेनतीजा बैठक में तय किया गया कि अगली बैठक 15 जनवरी को होगी.

15 जनवरी की बैठक को लेकर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होते तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा. हम 15 जनवरी को बैठक के लिए फिर आएंगे. हम कहीं नहीं जा रहे. किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने कहा कि आज की बैठक बेनतीजा रही. बैठक में सरकार ने साफ कह दिया है कि वो तीनों कानून वापस नहीं लेगी और किसान नेता यह कह रहे थे कि तीनों कानून वापस लेने पड़ेंगे