किसानों की आत्महत्या क्यों नही रोक पा रही है सरकार?

भारत में किसानों के लिए काम करने का वादा सभी पार्टियाँ करती हैं. सभी सरकारें ये भी दावा करती हैं कि उन्होंने किसानों के लिए कई योजनाओं की शुरुवात की है लेकिन सवाल ये हैं कि ये योजनायें आखिर जमीनी स्तर पर क्यों नही दिखाई देती?
किसानों का कर्ज आखिरकार खत्म क्यों नही होता? सरकारें किसानों को आत्महत्या से क्यों नही रोक पा रही हैं.
सभी पार्टियाँ चुनाओं के समय में किसानों के लिए काम करने का दावा जरूर करती हैं लेकिन वोट पाने के बाद और सत्ता में पहुँचते ही उनको किसानों की चिंताएं बिलकुल नही सताती है?


अब आप सोच रहे हैं कि आखिर आज हम ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं? दरअसल राजस्थान में एक किसान सोहनलाल मेघवाल ने कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या कर ली है. श्री गंगानगर के इस किसान ने सुसाइड नोट में अपनी मौत के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराया है. इसके बाद सवाल खड़ा होता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कर्जमाफी का दावा किया था लेकिन किसान सोहनलाल की हत्या के बाद इस योजना को लेकर सवाल खड़ा होने लगा है. किसान सोहन लाल ने आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. वीडियो में सोहन लाल आत्महत्या के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराया है जो इस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री है. वीडियो में सोहनलाल सभी से माफ़ी मांग रहे थे जो कि लाइव था. जब उनकी बातों से लगा कि वे आत्महत्या कर सकते हैं तो कुछ लोग उन्हें बचाने के लिए उनके घर की ओर भागे। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सोहन लाल ने पहले से ही जहर खा लिया था, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। दरअसल, राजस्थान खेती-किसानी के लिए सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाले राज्यों में शामिल है. संसद में पेश की गई केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के हर किसान परिवार पर औसतन 70,500 रुपये का कर्ज है. साहूकारों से कर्ज लेने के मामले में भी राजस्थान तीसरे नंबर पर है.


किसान की मौत के मुद्दे पर राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि अभी वह इसकी जांच करवा रहे हैं. उन्होंने कहा कि शायद वह किसान कर्ज में डूबा हुआ नहीं था, लेकिन जो भी हुआ वह दुखद है. हमारी सरकार किसानों के उज्जवल भविष्य के कटिबद्ध है. इसके साथ जी उन्होंने कहा कि हमने अपने घोषणा पात्र में भी किसानों के लिए एलान किया था.. लेकिन सवाल तो यही है कि जब सरकारें किसानों के लिए काम करती है और किसानों के लिए योजनायें चलाती है तो किसानों को आखिर आत्महत्या के लिए मजबूर क्यों होना पड़ता है? सरकार की योजनायें आखिर किसानों तक क्यों नही पहुँच रही हैं? यहाँ सिर्फ सोहन लाल की बात नही हो रही हैं भारत में किसानों एक आत्महत्या करने का आकडा बहुत लंबा है, राजस्थान मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसानों के लिए काम करने की जरूरत बहुत ज्यादा है.

हालाँकि सोहन लाल की आम्त्म्हत्या को लेकर जांच चल रही है और जांच के बाद पता चलेगा कि आखिर सोहनलाल ने आत्महत्या क्यों किये? आखिर 45 साल की उम्र में इस किसान ने हार क्यों मान ली? क्या सच में किसानों तक सरकार की योजनायें नही पहुँच रही हैं. सवाल कई खड़े होते हैं लेकिन जवाब शायद किसी के पास नही होता.. खैर हम यही उम्मीद करते हैं कि कम से कम सरकारें किसानों को लेकर गम्भीर हो, और उनकी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाए क्योंकि अभी तक जो सरकार काम करती आई है उसका कुछ फायदा तो हुआ है लेकिन सभी किसानों का उत्थान हो सके, इतना काम अभी भी नही हुआ है.

Related Articles