गरीब किसान पिता बेटी की फीस नहीं भर पाया, उठाया ये कदम

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महाराष्ट्र के सोलापुर के एक छोटे से गांव में रहने वाला एक गरीब किसान पिता चाह कर भी बेटी की कॉलेज की फीस के लिए पैसे नहीं जुटा पा रहा था. पिता को तय समय से पहले एक लाख रुपये जमा करने थे, बहुत कोशिशों के बाद भी जब पिता पैसे इकठ्ठा नहीं कर पाया तो बेटी ने निराश हो कर ज़हर पी लिया. डॉक्टरों की तमान कोशिशों के बाद भी वो बेटी को नहीं बचा पाए.

पुलिस ने बताया कि रूपाली रामकृष्ण पंजाब जालंधर के एक कॉलेज में बीटेक फर्स्ट ईयर में दाखिले के लिए पिता द्वारा एक लाख रुपये नहीं जुटा पाने को लेकर निराश थी.

महाराष्ट्रा पुलिस के मुताबिक रामकृष्ण पवार की रोजी रोटी का एक मात्र स्रोत किसानी ही था. बेटी को आगे पढ़ने के लिए इतने इच्छुक था कि वो अपने खेत बेचने के लिए भी तैयार था, लेकिन ज़मीन का सही मूल्य नहीं मिल पाने के चलते समय बीतता जा रहा था.

अधिकारी ने अनुसार 20 जुलाई को फीस जमा करने की आखिरी तारिक थी. तय समय तक पैसों का इंतजाम नहीं हो पाने से रूपाली पूरी तरह से हताश हो गयी. उसने गुस्से में अपने परिवार के एक सदस्य से बहस की, और बाद में दुनिया से चले जाने का निर्णय ले लिया.

पुलिस के आगे बताया कि लड़की ने आवेश में आकर टनाशक पी लिया. चिल्लाने की आवाज सुन कर मोहोलवाले आए और तत्काल उसे अस्पताल में लेकर पहुंचे. जहां से उसे शोलापुर के अस्पताल रेफर कर दिया गया. जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.

परीजनों ने बताया कि रुपाली अभी सिर्फ 17 साल की थी, वो पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और उसने कॉमन एंट्रेस टेस्ट में 89 प्रतिशत अंक पाए थे. पिछले कुछ सालों से ऐसी घटनाएं बढ़ गयी हैं. तैश में आकर अपनी ज़िंदगी को अलविदा कहने किसी दुविधा का समाधान नहीं हो सकता. ऐसा कर बच्चे अपनी ज़िंदगी तो खत्म कर ही लेते हैं, साथ ही माता पिता को ज़िंदगी भर के लिए दुख और ग्लानि में छोड़ जाते हैं.