EVM HACKING पर पड़ताल

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साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 336 सीट्स लेकर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी.. लेकिन यह जीत विपक्षियों के गले नहीं उतरी और उन्होंने नया गीत गाना शुरू कर दिया कि बीजेपी की इतनी शानदार जीत हुई है सिर्फ EVM हैक करने के कारण.. EVM यानि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन.. वैसे तो यह मुद्दा पिछले 5 साल में कई बार उठा है

लेकिन इस बार यह मुद्दा देश में नहीं बल्कि विदेश में यानी लन्दन में उठा है.. जहाँ पर एक शख्स हैं.. सय्यद शुजा जो लन्दन EVM HACKTHON में साइबर हैकर हैं, इन्होने एक प्रेस कांफ्रेंस की वो भी स्काइप के ज़रिये, जिसमे बताया कि ये महाशय इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ़ india के पुराने कर्मचारी रह चुके हैं और जो EVM मशीन india में इस्तेमाल होती हैं.. वो इन्होने ही बनवाई थी.. इनके मुताबिक़ 2014 में जो चुनाव हुए हैं उनमे EVM मशीन हैक की गई थी..और उसी के बाद बीजेपी की शानदार जीत हुई थी. और इसके बारे में बीजेपी के मंत्री स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे जानते थे और इसीलिए बीजेपी नेताओं ने उनकी हत्या कर दी, इतना ही नहीं इन्होने 2014 लोकसभा चुनाव के साथ साथ दिल्ली में 2015 के विधानसभा चुनाव को भी घेरे में ले लिया है.. जिसमें आम आदमी पार्टी की शानदार जीत हुई थी.. और यह भी कहा कि भारत में ज्यादातर राजनीतिक दल EVM हैक करना जानते हैं और करते हैं.. तो इन महान शख्श ने भारत का नाम विदेश तक में बदनाम कर दिया है बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करवाकर.. हालाँकि जब प्रेस ने इनसे वो दस्तावेज और सुबूत मांगे जिसके दम पर वो इतनी बड़ी बात कह रहे हैं.. उसपर उन्होंने कहा कि वो जल्द ही सुबूत भी पेश करेंगे खैर हमें भी इन सुबूतों का इंतज़ार है.. लेकिन सोचने वाली बात यह है कि 2014 और 2015 से जाकर इन्हें अब 2019 में समय मिला है EVM हैकिंग के बारे में बताने का जब अगला लोक सभा चुनाव आने वाला है और इससे भी ज्यदा हैरानी तब होती है जब उस देश के जिसकी बेईज्ज़ती हो रही है उसी देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता उसमें दिखाई देते हैं.. यह राजनीतिक दल है कांग्रेस और उनके नेता कपिल सिब्बल.. वो वहां क्या कररहे थे.. शायद उसी सवाल का जवाब पाने गए होंगे जो उनकी पार्टी  भी पूछती  आई है “बीजेपी की जीत यानि evm से छेड़खानी की गई” और यही बोलकर na केवल कांग्रेस बल्कि पूरा विपक्ष समय समय पर जर्मनी जापान, US जैसे देशों की तर्ज़ पर बैले पेपर से चुनाव की मांग करती आई है..

बैले पेपर यानि कागज़ की पर्ची द्वारा चुनाव.. आपको बता देते हैं कि 1982 तक हिंदुस्तान में बैलट पेपर के जरिये ही मतदान होता था लेकिन फिर इसमें बहुत सारी समस्याएं आने लगी जैसे

यह ईको फ्रेंडली नहीं है.. पेपर्स के लिए पेड़ काटे जाते हैं.. और जितनी बार वोटिंग मतलब उतने पेड़ काटे जायेंगे, इसके अपोजिट एक बार बन चुकी EVM बार बार इस्तेमाल की जा सकती है.. दूसरा फर्जी वोट्स की समस्या.. अगर स्टाम्प ठीक से नहीं लगा मार्जिन को छु गया तो वो वोट अवैध माना जाता है.. जिससे वोट काउंटिंग के टाइम लड़ाईयां होने लगती थी.. मतगणना यानि वोट काउंटिंग में बहुत टाइम लगता था, बूथ कैप्चरिंग  यानि किसी पुल्लिंग बूथ में हंगामा मचाकर वोट्स जला देना या नष्ट कर देना.. जाली वोटिंग जेसी बहुत सारी दिक्क़तें थी जिस वजह से चुनाव करवाना ही बहुत बड़ा चैलेंज बन जाता था..महीनों लग जाते थे चुनाव करवाने में और फिर वोट्स गिनने में.

वो देश जो सिर्फ बैलट पेपर के जरिये वोटिंग करते हैं.. उनकी आबादी भारत की तुलना में बहुत कम है.. और हमारे यहाँ इतनी आबादी के बीच शांति से चुनाव करवाना बहुत बड़ी चुनौती है.

उन्ही चुनौतियों को देखते हुए लाइ गई EVM मशीन..

लेकिन 1982 से EVM पर कभी शक नहीं हुआ.. मगर जैसे ही 2014 में बीजेपी

आ गई.. EVM पर भी सवाल खड़े होने शुरू हो गए.. तो अब हम आपको evm और इलेक्शन के बारे में पूरी जानकारी देते हैं..  सबसे पहले तो आप ये जानिये कि हैकिंग क्या होती है.. हैकिंग यानि किसी भी दुसरे सिस्टम या मशीन को एक वायरलेस नेटवर्क के जरिये तोडना और उसमे बदलाव करना, उसकी सारी जानकारी निकाल लेना हैकिंग कहलाता है.

  • अब जानते हैं कि EVM क्या है और उसे हैक क्यूँ नहीं किया जा सकता..

EVM यानि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जिसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बैंगलोर और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद करती हैं.. हाई लेवल सिक्यूरिटी प्रोटोकॉल के तहत.

इलेक्शन कमिटी के मुताबिक़ EVM कंप्यूटर नियंत्रित मशीन नहीं है, वो अपने आप में स्वतंत्र मशीन हैं. वो इन्टरनेट या किसी भी नेटवर्क से कनेक्ट नहीं होता.. इसीलिए किसी भी रिमोट डिवाइस के जरिये उन्हें हैक करने की कोई गुंजाईश नहीं है. चुनाव आयोग के अनुसार EVM में वायरलेस या किसी बाहरी हार्डवेयर पोर्ट के लिए कोई फ्रीक्वेंसी रिसीवर है ही नहीं.. इसलिए हार्डवेयर पोर्ट, वायरलेस , WIFI या ब्लूटूथ डिवाइस के जरिये किसी प्रकार की छेड़छाड़ संभव नहीं है..

  • अब आते हैं evm के साथ मैन्युअल छेड़खानी पर

Evm मशीन में दो यूनिट होती हैं कण्ट्रोल यूनिट और बैले यूनिट जिससे केवल एन्क्रिप्टेड और DYNAMICALLY कोडेड डाटा ही स्वीकार किया जा सकता है.. कण्ट्रोल यूनिट किसी और डाटा को एक्सेप्ट ही नहीं करती. इसके सॉफ्टवेर कोड्स मैन्युफैक्चरिंग कम्पनीज इनटरली तैयार करती हैं.. इन्हें आउटसोर्स नहीं किया जाता है. इनमें लगी हुई चिप में एक आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है, जिन पर MANUFACTURERS के डिजिटल सिग्नेचर होते हैं.. अगर कोई इसे हटाने की कोशिश करता है या, या इसको कहीं लेकर जाता है वो सब कुछ आप ट्रैक कर सकते हैं.. जिससे मशीन को निष्क्रिय कर दिया जाता है.

जो लोग मशीन बनाते हैं.. वो भी इसके साथ कुछ नहीं कर सकते क्यूंकि मशीन तो सालों पहले ही बन जाती है, तो कोनसा कैंडिडेट किस एरिया से लडेगा और बैले पेपर पर कैंडिडेट्स का सीक्वेंस क्या होगा यह सब उनको कैसे पता होगा वो भी सालों पहले..

अब बात करते हैं इलेक्शन की….

EVM को डिस्ट्रिक्ट HEADQUARTER में लाने से लेकर वोटिंग होने तक और वोट काउंट होने तक सभी पोलिटिकल पार्टीज को मौजूद रखा जाता है.. डिस्ट्रिक्ट क्वार्टर के जिस रूम में मशीन को रखा जाता है वहां 24*7 सर्विलांस रहती है.. पोलिंग बूथ में भेजने से पहले मशीन को वेरीफाइ किया जाता है कि एक कैंडिडेट को एक ही वोट जा रहा है या नहीं… और यह सारी प्रक्रिया सभी पोलिटिकल पार्टीज की मौजूदगी में होती है.. इतना ही नहीं पोलिटिकल पार्टी अपनी मर्ज़ी से कोई भी मशीन उठाकर 1000 वोट डालकर यह देख सकती है कि मशीन में गड़बड़ी तो नहीं.. इन्फक्ट वोटिंग वाले दिन भी वोटिंग शुरू होने से पहले सभी पार्टीज पोलिंग एजेंट्स के ज़रिये 50 वोट कास्ट करवाकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि मशीन सही है या नहीं.. उसके बाद वोटिंग शुरू होती है.. वोटिंग ख़त्म होने के बाद पोलिंग एजेंट्स के सामने ही evm को सील कर दिया जाता है… और सभी पार्टीज को टोटल वोट कितने पड़े हैं बता दिया जाता है.. evm को फिर से 24*7 सर्विलांस में रखा जाता है काउंटिंग डे तक.. इन्फक्ट पोलिटिकल पार्टीज भी वहां 24ओं घंटे रुक सकती हैं.

जिस दिन काउंटिंग शुरू होनी होती है तब स्टोर रूम का दरवाजा भी तब ही खुलता है जब सभी पोलिटिकल पार्टीज वहां पहुँच जाती हैं.. और evm में उसके टैग्स, सील्स और न. ऑफ़ वोट्स सुनिश्चित किये जाते हैं.. इन्फक्ट हर मशीन का रिजल्ट भी तब घोषित होता है जब सारी पार्टीज प्रमाणित कर देती हैं कि रिजल्ट सही है. इतनी ट्रांसपेरेंसी और सिक्यूरिटी बरकरार रखी जाती है तब चुनाव होते हैं.. ऐसे में evm हैकिंग की बात करना और बार बार करना बेवकूफी लगती है.

और यहाँ पर लन्दन में काम कर रहे सय्यद शुजा के लगाए हुए EVM हैकिंग के सारे दावे खारिज हो जाते हैं.. भारत के लोकतंत्र और चुनाव व्यवस्था पर उन्होंने जो उँगलियाँ उठाई हैं उसके खिलाफ भारतीय चुनाव आयोग की तरफ से उनपर लीगल एक्शन लिए जा चुके हैं.