EVM-VVPAT परीक्षा में हुआ पास

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चुनाव में जीत के बाद जश्न मनाते है लोग वहीँ चुनाव के हार जाए तो evm को दोषी बनाते है… और पिछले कई सालों से ये सिलसिला चले जा रहा है… जब भी विपक्ष कोई भही चुनाव हारती है … दोष evm पर लगाती है… कभी यह कि evm हैक्ड है तो कही कुछ और… इस बार भी evm का मुद्दा काफी सुर्ख़ियों में था… यहाँ तक की 21 राजनीतिक दलों ने evm को vvpat से मिलाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी…

वैसे 2019 लोकसभा चुनाव के evm और vvpat के आकड़े मिलाए गए है और इसपरीक्षा में evm को निर्दोषी पाया गया है…इससे पहले जब 21 विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी तब उनकी मांग थी कि कम से कम 50 फीसदी वीवीपैट का ईवीएम से मिलान होना चाहिए….. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था…. विपक्ष ने तो मतगणना से पहले ये तक कह दिया कि 100 फीसदी वीवीपैट की पर्चियों की गितनी होनी चाहिए….. और फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को बकवास बताते हुए खारिज कर दिया है….. वैसे भी, अगर पर्चियों से मिलान करना है चुनावी नतीजों का तो फिर क्या फायदा है evm से चुनाव करने का….. इससे तो अच्छा है कि बैलेट पेपर से ही चुनाव करवा लो और बैठकर पर्चियां गिनते रहो…..

हालांकि EVM की विश्वसनीयता और VVPAT ऑडिटिंग का मुद्दा कई राजनीतिक दलों द्वारा बार-बार उठाया गया है……. 27 अगस्त, 2018 की बैठक में कि सभी राजनीतिक दलों के साथ चुनाव आयोग की बैठक थी, लगभग पूरे विपक्ष ने कांग्रेस के साथ मिलकर EVM के बजाय बैलट पेपर आधारित मतदान पर वापसी की मांग की थी…..

कई राजनीतिक दलों ने सुझाव दिया कि कम से कम VVPAT की गिनती की जानी चाहिए- एक मतदान केंद्र से प्रति निर्वाचन क्षेत्र में 10% -30% VVPATs से एक निर्वाचन क्षेत्र में- आराम करने के लिए संदेह करने के लिए….वैसे संक्षिप्त में आपको बता दें कि vvpat है क्या .. वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल मतलब कि VVPAT… एक स्वतंत्र प्रिंटर है… जोकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन मतलब की evm के साथ जुड़ा हुआ सिस्टम है…. जो की मतदाताओं को के लिस्ट ज़ारी स्लिप जरी करता है जिसके वहज से पता लगता है की वोट सही जगह पर गया है…

जब कोई वोट डाला जाता है…. तो VVPAT प्रिंटर पर एक पर्ची प्रिंट की जाती है……… जिसमें उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और प्रतीक होता है…….. और यह स्लिप मतदातों को मिलता है और एक स्लिप योग के पास रहता… इस बार चुनाव आयोग ने कुल 22.3 लाख बैलेट यूनिट, 16.3 लाख कंट्रोल यूनिट और 17.3 लाख वीवीपैट इस्तेमाल की थीं..हालांकि पिछली बार 4125 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान किया गया था…. इस बार कुल 20,625 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान 8:30 बजे तक हुआ…. हालांकि इसके बाद VPAT पर्ची और EVM गणना के बीच EC डेटा के अनुसार बेमेल पाए जाने का एक भी मामला नहीं था…..

पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. एस वाय कुरैशी के अनुसार एक गलती आंध्र प्रदेश में पाई गई, उसकी वजह मशीन का खराब हो जाना और फिर उसे बदलना है….. चुनाव आयोग इस परेशानी को दूर करने का प्रयास कर रहा है.. यानी ये कहना गलत नहीं होगा की 100 फीसदी वोटिंग बिल्कुल सही रही है….अब देखते है कि इन नतीजों को देख कर विपक्ष evm को दोषी ठहराना बंद करती है या नहीं… क्योंकि अब ऐसा लग रहा है की हार को छुपाने के लिए विपक्ष evm जांच के मुद्दें को उछाल रहा…