अयोध्या में राम मंदिर भी नहीं बन सकता इस मंदिर से ऊँचा

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अयोध्या में इन दिनों राम मंदिर कैसा बनेगा, उसका स्वरूप कैसा होगा और कितना बड़ा होगा इसको लेकर चर्चाएँ हैं… राम मंदिर के लिए कई पीढ़ियों से हिन्दू इन्तेजार कर रहे थे.. वो राम मंदिर जिसका इतिहास बेहद पुराना है… लेकिन क्या आप जानते हैं कि अयोध्या में इस राम मंदिर से भी पुराना एक और मंदिर है.. पौराणिक कथाओं में जिसका जिक्र है… और कहा जाता है इससे ऊँचा अयोध्या में कुछ बन ही नहीं सकता..

ये मंदिर अयोध्या नगरी का रखवाला है, एक ऊंचे किले नुमा टीले पर बना ये मंदिर अयोध्या की शोभा बढाता है.. हनुमान गढ़ी के नाम से प्रसिद्द इस मंदिर परिसर में प्रभु श्री राम के परमभक्त, श्री हनुमान जी निवास करते हैं.. जिनके प्रताप को अयोध्या की ये नगरी कई बार महसूस कर चुकी है.. इस मंदिर से जुडी तमाम कथाएं हैं जो बेहद रोमांचक है और कहते हैं कि कई दफा इसे तोड़ने की कोशिश की गयी लेकिन फिर भी इसको कोई नुकसान नहीं पहुंचा…क्यूँ है ये मंदिर इतना खास और क्यूँ इससे ऊँचा अयोध्या में कुछ और नहीं बन सकता बतायेंगे हम आपको इस कहानी में

अयोध्या के बीचों बीच मौजूद हनुमान गढ़ी अपने आप में अद्भुत है, अगर आप अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन करना चाहते हैं तो आपको पहले यहाँ हनुमान जी के आगे हजिरी लगानी होगी.. ऐसी यहाँ मान्यता है.. जो सही भी लगती है क्यूंकि हनुमान चालीसा में इस बात का वर्णन कुछ पंक्तियों में किया गया है.. राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे.. यानि आपको अगर प्रभु श्री राम से मिलना है तो पहले भक्त हनुमान से आज्ञा लीजिये… हनुमान गढ़ी से जुडी एक कहानी है, जिसकी वजह से अयोध्या में इस मंदिर परिसर से ऊंचा कुछ बन ही नहीं सकता… मंदिर के पुजारी और भक्त इस बात में विश्वास रखते हैं, कि अगर अयोध्या में हनुमान गढ़ी से ऊंची कोई इमारत बन जाती है तो हनुमान जी जो अबतक नगर की रक्षा कर रहे हैं उसमें विघ्न पड़ जायेगा..

प्राचीन ग्रन्थ अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया गया है जिसमें इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है…. ऐसी मान्यता है कि यहाँ हनुमान जी सदैव वास करते हैं.. ये उनका घर है…. यह मंदिर राजद्वार के बिलकुल सामने एक ऊंचे टीले पर स्थित है.. जिसको पत्थरों से बनाया गया है… ये माना जाता है कि स्वयं हनुमान जी यहाँ एक गुफा में निवास करते थे और नगरी में रामजन्मभूमि और रामकोट की सुरक्षा की उनकी जिम्मेदारी थी….. प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को रहने के लिए यही स्थान दिया था और इसके साथ ही ये अधिकार भी दिया कि जो भी भक्त मेरे दर्शनों हेतु अयोध्या में आएगा उसे मुझसे पहले तुम्हारा दर्शन पूजन करना ही होगा…… हनुमान गढ़ी में आज भी छोटी दीपावली के अवसर पर आधी रात को अंजनिपुत्र का जन्मदिन उत्साह से मनाया जाता है… इस मंदिर के एक टीले पर बने होने के कारण मंदिर तक जाने के लिए आपको लगभग 76  ऊँची सीढि़यां चढ़नी होंगी…. जिसके पश्चात आप हर समय फूल-मालाओं से सुशोभित पवनपुत्र हनुमान की 6 इंच की प्रतिमा के दर्शन कर पाएंगे…. मुख्य मंदिर परिसर में बाल हनुमान के साथ-साथ अंजनी माता की भी प्रतिमा है…. इस मंदिर के आस पास जामवंत और सुग्रीव के भी मंदिर बने हुए है….  मंदिर परिसर के अंदर मां अंजनी व बाल हनुमान की मूर्तियाँ भी विराजमान है जिसमें बाल हनुमान ,मां अंजनी की गोद में लेटे हुए हैं…

इस मन्दिर निर्माण के पीछे जो कहानी है वो बड़ी दिलचस्प है… कहानी के मुताबिक दसवीं शताब्दी के मध्य में सुल्तान मंसूर अली… लखनऊ और फैजाबाद का शाशक हुआ करता था….. एक बार जब सुल्तान मंसूर अली का पुत्र बुरी तरह से बीमार हो गया…..और उसकी जान बचने की कोई भी उम्मीद नजर नहीं आ रही थी…. रात का समय था…. और उसके बीमार पुत्र की सांसे टूटने लगी तो आखिर में थके हारे उम्मीद छोड़ चुके शाशक ने किसी के कहने पर हनुमान के चरणों में जाकर माथा टेक दिया…….. कुछ ही घंटो बाद उसके बेटे की धड़कने पुन: चलने लगीं……जिसके पश्चात अवध नवाब ने न सिर्फ हनुमान गढ़ी मंदिर का जीर्णोंद्धार करवाने की घोषणा की बल्कि तांम्रपत्र पर लिखकर ये भी घोषणा करवा दी कि कभी भी इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई अधिकार नहीं होगा……और न ही इस मन्दिर के चढ़ावे पर कोई कर वसूला जाएगा…… इसके साथ ही नवाब ने 52 बीघा जमीन भी हनुमान गढी व इमली वन निर्माण के लिए मुहैया करवाई थी… 18वीं सदी में नागा साधुओं ने हनुमान गढ़ी को मुसलमानों से आजाद कराया था…..पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या नगरी न जाने कितनी बार बसी और उजड़ी….. लेकिन फिर भी हनुमान गढ़ी हमेशा अपने मूल रूप में रही…….. हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक प्रभु श्रीराम ने जब लंका पर विजय प्राप्त की तो उसके प्रतीक रूप में लाए गए कुछ निशान भी इसी हनुमान गढ़ी में रखे गए थे जिनको किसी खास अवसर पर बाहर निकालने की परम्परा है… हनुमान गढ़ी की ये कहानी हमने आपको इसलिए सुनाई क्यूंकि राम मंदिर के साथ इसका इतिहास भी जुड़ा है जो आपको जानना चाहिए….