भारत में आतंकी चाँद से नहीं पाकिस्तान से आते हैं : यूरोपियन यूनियन

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“भारत में आतंकी चाँद से नहीं आते बल्कि ये पड़ोसी मुल्क से ही आते हैं”. “वो पाकिस्तान ही है, जहां आतंकी साजिश रचकर यूरोप में हमलों को अंजाम देते हैं”. इस तरह का बयान सुनकर आप सोचेंगे कि ये भारत सरकार के किसी मंत्री या फिर भाजपा के किसी नेता का बयान है लेकिन नहीं ये बयान एक ऐसी जगह से आया है जिससे पाकिस्तान को बहुत उम्मीदें थी. ये बयान आया है यूरोपियन यूनियन की संसद से. पहली बार किसी संसद ने आतंकवाद फैलाने के आरोप सीधे सीधे पाकिस्तान पर लगाए हैं. पाकिस्तान को ये बयान सुनकर गुस्सा तो बहुत आएगा लेकिन वो कर भी क्या सकता है. जब बबूल के पेड़ बोये हैं तो उससे आम तो नहीं पा सकता न.

कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को यूरोपीय यूनियन की संसद ने तगड़ा झटका दिया है. यूरोप की संसद (EU) में कई सांसदों ने एक सुर में पाकिस्तान की तीखी आलोचना की है. संसद में चर्चा के दौरान पोलैंड के नेता और EU सांसद रिजार्ड जार्नेकी ने कहा कि “भारत दुनिया का सबसे महान लोकतंत्र है. वहां आतंकी चांद से नहीं आते हैं. वे पड़ोसी देश से ही आ रहे हैं. ऐसे में हमें भारत को समर्थन देना चाहिए. हमें भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य में होने वाली आतंकी घटनाओं पर गौर करने की जरूरत है.”

इटली के नेता और EU सांसद फुलवियो मार्तुसिलो ने कहा कि “पाकिस्तान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी दे रहा है. उन्होंने स्थानीय हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान ही है, जहां आतंकी साजिश रचकर यूरोप में हमलों को अंजाम देते हैं.”

11 साल में पहली बार यूरोपीय संसद ने कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा की और खुले तौर पर भारत का समर्थन किया है. साथ ही संसद ने पाकिस्तान को ये सलाह भी दी कि दुनिया भर में दौड़ने की बजाये द्विपक्षीय बातचीत से मामले को हल करे.

पिछले दो महीनों से पाकिस्तान को हर तरफ से बस झटके ही मिल रहे हैं. पूरी दुनिया में उसे कहीं भी कश्मीर पर साथ नहीं मिल पाया. अब पाकिस्तान की सारी उम्मीदें यूनाइटेड नेशन पर टिकी है जहाँ इमरान खान जनरल असेम्बली में कश्मीर का मुद्दा उठाने वाले हैं. साथ ही डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात कर एक बार फिर कश्मीर में मध्यस्थता की मांग करने वाले हैं. हालाँकि इससे पहले यूनाइटेड नेशन के सुरक्षा परिषद् की बैठक बंद कमरे में हो चुकी है लेकिन वहां चीन के अलावा कोई भी पाकिस्तान के साथ खड़ा नहीं हुआ. दुनिया के सभी बड़े देश भारत के साथ खड़े हैं इसलिए यूनाइटेड नेशन जनरल असेम्बली में इमरान खान के भाषण का कोई प्रभाव पड़ने वाला है नहीं. लेकिन निराशा और जहालत पाकिस्तान की नियति बन चुकी है और इसे उसे आगे भी झेलना है.