यूरोपियन सांसदों के दौरे से जल उठे कईयों के दिल, ओवैसी को भी करारा जवाब!

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 23 यूरोपियन सांसद कश्मीर के दौरे पर गये.. इस दौरे को लेकर तमाम तरह के विवाद हुए, हो रहे हैं और होते रहेंगे.. एक NGO द्वारा 27 यूरोपियन सांसदों का कश्मीर का दौरा तय किया गया था लेकिन इनमे से चार सांसद कश्मीर नही गये.. बताया गया कि ये चार सांसद अपनी कुछ शर्तों के साथ कश्मीर जाना चाहते थे..जिसे सरकार ने मामने से इंकार कर दिया. क्यों इंकार किया गया है इसके कारण अभी सामने नही आया है .इसको लेकर अब एक और राजनीति शुरू हो गयी है.. राजनीति तो तब से हो रही है जब से इन सांसदों का दौरा तय किया गया.. विपक्ष और वाम दलों के साथ साथ कांग्रेस ने सरकार को घेरने की कोशिश की कि हमे तो नही जाने दिया जाता वो इन्हें क्यों जाने दिया गया इस पर बीजेपी की तरफ से जवाब था कि जो जाना चाहे जाए, किसी पर रोक नही है.

खैर यूरोपियन सांसदों के दौरे को राष्ट्रीय शर्मिंदगी कहा जा रहा है..कह भी सकते हैं आजादी है कहने की…कोई कह रहा है मोदी ने अपनी छवि चमकाने के लिए ये सब किया है.. तो कोई कह रहा है कि जितने सांसद आये हैं सब दक्षिणपंथी विचारधारा के हैं.. मुस्लिम विरोधी हैं… सब कुछ कह सकते हैं..कहने का अधिकार सबको है. इसी तरह असदुद्दीन ओवैसी ने इन्ही सांसदो के जरिये मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि सरकार नाजी समर्थकों को कश्मीर भेज रही है। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों को कश्मीर भेजा जा रहा है, जो नाजी विचारधारा के समर्थक रहे हैं और खुद का फासिस्ट कहते रहे हैं.

यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के ही एक सांसद ने ओवैसी को जवाब दिया है. डेलिगेशन में शामिल फ्रेंच के नेता और सांसद थियरी मरिआनी ने कहा कि मैंने कई अखबारों और टीवी पर देखा, जिसमें हमें नाजी समर्थक बताया गया। यह सुनकर मुझे हैरानी हुई। उन्होंने कहा कि किसी को भी इस तरह कहने से पहले हमारे बारे में जान लेना चाहिए। ‘मेरी एक सलाह है कि लोगों को कुछ भी कहने से पहले किसी के बारे में पढ़ लेना चाहिए।’ मरियानी ने कहा कि मैं मंत्री रहा हूं और अलग-अलग पदों पर 14 बार चुना गया हूं. ये सब उन्ही यूरोपीय प्रतिनिधि मंडल में शामिल एक सांसद ने कहा है. जिनपर ओवैसी आरोप लगा रहे थे.. खैर इंडिया टूडे की तरफ से भी एक ट्वीट सामने आया है इसमें लिखा गया था कि 17 यूरोपीय सांसदों की प्रोफाइल चेक करने पर पता चला है कि 8 कट्टर इस्लाम के विरोधी है! इसके बाद तो इन सभी सांसदों को इस्लाम विरोधी बताया जाने लगा.. लेकिन वे तो थे कट्टर इस्लाम विरोधी! खैर प्रोपगेंडा यहाँ भी चल गया…

यहाँ आपको एक बात सोचनी चाहिए कि क्या कट्टर इस्लाम विरोधी होना पाप है? गुनाह है? अगर कोई कट्टर हिन्दू विरोधी बन जाता है.. कट्टर छोडिये हिन्दू विरोधी भी बन जाता है तो उसे लोग बुद्धिजीवी बना देते हैं.. सेक्युलर बना देते हैं.. ऐसे में अगर कुछ लोग इनमें से.. जो कश्मीर गये हैं..वे कट्टर इस्लाम विरोधी है तो गलत क्या है? लेकिन हाँ ध्यान रहे कट्टर इस्लाम विरोधी! क्योंकि कट्टर इस्लाम के नाम पर लोगों ने देश को और विश्व को क्या दिया है ये हम सभी जानते हैं और देख रहे हैं.

खैर अब आगे बढ़ते हैं. कश्मीर में आये पहले विदेशी प्रतिनिधि मंडल के आने से भारत की कई राजनैतिक पार्टियाँ परेशान है… इसे राष्ट्रीय शर्मिंदगी बता रही है… लेकिन यही नेता थे जो कुछ समय पहले तक कह थे कि आख़िरकार कश्मीर में किसी को जाने की इजाजत क्यों नही मिल रही है? इमरान खान भारत को चुनौती देकर कहते थे कि विश्व के बड़े नेता कश्मीर में जाकर वहां के हालात देखें…. अब एक प्रतिनिधि मंडल कश्मीर में घूमने के बाद अगर कह था है कि वहां सबकुछ ठीक है..कंट्रोल में है.. लोग भारत के साथ रहना चाहते हैं.. तो इसमें अब ये खोजा रहा है कि ये दक्षिणपंथी हैं.. कट्टर इस्लाम विरोधी है. पता नही क्या क्या?


लेकिन सवाल तो ये है कि जब सरकार ये कह रही है कि कश्मीर में स्थिति सामान्य है.. तब विपक्ष आखिर इस बात पर इतना हो हल्ला क्यों करता है.. कश्मीर के मसले पर भारत विरोधी बयानबाजी क्यों करता है वो भी ऐसे में जब पाकिस्तान इनके बयानों के जरिये भारत को नीचा दिखाने की हिमाकत कर चुका हैं.. इससे हमारे देश के नेता कोई सबक नही लेते बल्कि वही गलती दोबारा दोहराने में विश्वास रखते हैं शायद…