ये तीन ब्रह्मास्त्र दिलाएंगे पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बहुमत

पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस को हटाना उतना ही मुश्किल है जितना गुजरात से बीजेपी को.. लेकिन गुजरात से बीजेपी के ना हटने का कारण है वहां हुआ विकास.. और पश्चिम बंगाल की राजनीति सिर्फ और सिर्फ ममता बनर्जी की मनमानियों पर चलती है..  खैर चुनाव है और चुनाव में जीत के लिए रणनीतियां बनती हैं..

ना केवल पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को हटा राज्य में विकास लाना चाहती है बल्कि खुद बीजेपी भी चुनावी मैदान में अपने ब्रह्मास्त्र के दम पर पश्चिम बंगाल में जीत का झंडा गाढ़ देने के लिए तमाम रणनीतियों पर काम कर रही है..

अब हम आपको बतायेंगे कि वो कौन से तीन ब्रह्मास्त्र हैं जो बीजेपी को पश्चिम बंगाल में बहुमत दिला सकते हैं  

पश्चिम बंगाल की बात की जाये तो ये 42 लोकसभा सीटों के साथ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरा सबसे महत्वपूर्ण राज्य हैं.. जहाँ पर बीजेपी के पास सिर्फ 2 सीट्स हैं.. दार्जिलिंग और आसनसोल.. इसलिए बहुमत के लिए बीजेपी को कम से कम 20 सीट्स पर अपना कब्ज़ा जमा लेना है..  

1) इन 20 सीट्स में 6 सीट्स अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षित है,

2) इसके अलावा, नौ सीटें सीमा से लगी हुई हैं. घुसपैठ और विभाजन जैसे मुद्दों पर इन सीटों पर बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है.

3) राज्य में सात चरणों में चुनाव होंगे जिससे प्रत्येक चरण पर प्रमुख सीट्स पर ध्यान केन्द्रित कर ने का वक़्त मिलेगा प्रत्येक चरण की प्रमुख सीटों पर बीजेपी ध्यान केंद्रित करके अपने कैडर को तैनात करेगी. जिससे चुनाव जीता जा सके.

पहले चरण में बीजेपी कूच बिहार (एससी) और अलीपुरद्वार (एसटी) पर नजर गड़ाए हुए है. दूसरे चरण में जलपाईगुड़ी (एससी) और रायगंज को टार्गेट करेगी. तीसरे चरण में बीजेपी मालदा उत्तर और लाबूरघाट पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी. चौथे चरण में कृष्णानगर और बोलपुर (SC) पर ध्यान केंद्रित है. पांचवें चरण में श्रीरामपुर, बैरकपुर, बोंगोन (एससी) और हावड़ा को लक्षित किया जाएगा. जबकि छठे में पुरुलिया, बांकुरा, झारग्राम (एसटी) और मेदनीपुर के आदिवासी बहुल सीटों को लक्षित किया जाएगा. अंतिम चरण में कोलकाता की दो सीटों दम दम और बारासात पर फोकस रहेगा.

यह वो तीन रणनीतियां हैं जिन्हें बंगाल चुनाव का आधार बनाया गया है, इनके अलावा बीजेपी सीपीएम के वोटबैंक को साधने की पूरी कोशिश कर रही है. वह वाम मोर्चे के छोटे दलों के पुराने गढ़ों में पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रही है और  माकपा के कमजोर करने में जुटी हुई  है.

भारतीय जनता पार्टी के बंगाल प्रभारी मुकुल रॉय के मुताबिक पार्टी पिछले काफी समय से कई परियोजनाओं की मांगों को पूरा करने में राज्य में प्रयासरत है और उम्मीद जाता रही है कि पार्टी के कार्यों और रणनीतियों का यकीनन लोकसभा चुनाव 2019 में फायदा मिलेगा और बंगाल में राजनीती का एक नया अध्याय लिखा जायेगा   

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