चुनावी चौपाल में आज बातें पूर्वांचल की: भाग-2

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पूर्वांचल राजनीति के पिछले भाग में हमने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से कुछ जिले लिए थे, और आपको बताया था कि 2019 लोकसभा चुनावों में क्या रहेगा उन जिलों का माहौल. उसी क्रम में आइये ले चलते हैं आपको कुछ और जिलों की चुनावी यात्रा पर जो छूट गए थे.

चंदौली

साल 1997 में वाराणसी से अलग होकर बना था एक अलग जिला चंदौली. चंदौली से वर्तमान सांसद हैं भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता महेंद्र नाथ पांडेय. ये उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी हैं. और इनके पास स्वास्थय और परिवार कल्याण संबंधी मामलों की स्थाई समिति की अध्यक्षता भी है.

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के नेता अनिल वर्मा को हराकर इस सीट पर जीत फ़र्ज़ की. वहीं यहां से सबसे पहले सांसद त्रिभुवन नारायण सिंह थे. इसके अंतर्गत मुगलसराय, सकलडीहा, सैय्यदरजा, अजगरा, शिवपुर विधानसभा हैं.

साल 2011 में हुई जनगणना की मानें तो चंदौली की जनसंख्या करीब 20 लाख है, जिसमें करीब 10 लाख से ज्यादा पुरुष, और साढ़े 9 लाख के करीब महिलाएं हैं. चंदौली में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का एक बड़ा तबका शामिल है.

2011 की जनगणना बताती है कि जिले में अनुसूचित जाति की आबादी 4 लाख 46 हज़ार 7 सौ 86 दर्ज की गयी, और अनुसूचित जनजाति की आबादी 41 हज़ार 7 सौ 25.

इस सीट पर अगर मतदाताओं के झुकाव को लेकर बात की जाए तो, हवा महेंद्र नाथ पाण्डेय के पक्ष में ही बहती नज़र आ रही है, लेकिन फिर भी भारतीय जनता पार्टी और सपा बसपा गठबंधन के बीच का मुकाबला देखने लायक होगा.

जौनपुर

जौनपुर लोकसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में है, इसकी ज्यादातर सीमा प्रतापगढ़ और प्रयागराज जिले से लगी हुई है. यहाँ देखने लायक काफी कुछ है. यही वज़ह है कि ये पर्यटकों को बहुत लुभाता है. जामा मस्जिद, शाही किला और शाही ब्रिज जैसी और भी कई जगहें हैं जिनको देखने के लिए बहुत से पर्यटक यहाँ आते रहते हैं. इस लिहाज़ से देखा जाए तो ये उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों में से एक है.

यहाँ की लोकसभा सीट से सांसद हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता कृष्ण प्रताप. साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के दिग्गज नेता धनंजय सिंह को हराकर इस सीट को अपने नाम किया.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के अभिनेता रवि किशन ने भी कांग्रेस के टिकट पर यहाँ से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें बहुत कम वोट मिले.

जौनपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं, जिनके नाम बदलापुर, शाहगंज, जौनपुर, मल्हनी, मुंगरा बादशाहपुर हैं. इनमें से दो सीटें भारतीय जनता पार्टी, दो समाजवादी पार्टी, और एक सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है.

जिले की करीब 90 प्रतिशत आबादी हिन्दू है और मुस्लिम आबादी करीब 10 प्रतिशत है.

जौनपुर जिले में एक और लोकसभा सीट है, जिसका नाम मछलीशहर है. जौनपुर की यह लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है.

बात अगर अबतक की राजनीति की करें तो अभी तक यहां अभी तक कोई दिग्गज या कोई छोटा मालूम नहीं पड़ता. यहाँ भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में तीन तरफ़ा मुकाबला चलता ही रहा है, ऐसे में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. अब देखना है कि इस साल कौन है जो यहाँ से बाज़ी मार ले जाता है.

अम्बेडकरनगर

राम मनोहर लोहिया की जन्मभूमि वाली इस लोकसभा सीट के इतिहास पर नज़र डाली जाए तो पता चलता है कि इसका इतिहास बहुत पुराना नहीं है. 29 सितम्बर 1995 को अम्बेडकरनगर के जिला बन जाने के बाद भी करीब 19 साल तक लोकसभा सीट का नाम नहीं बदला गया.

चावल, गुड़ और चीनी के उत्पादन के लिए चर्चित इस जिले की लोकसभा सीट का नाम अकबरपुर ही रहने दिया गया, और सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रखा गया. 19 साल बाद 2009 में इसका नाम बदलकर जनपद के नाम पर अम्बेडकरनगर रखा गया, और लोकसभा सीट को सामान्य किया गया.

इस लोकसभा सीट के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. जिनके नाम अकबरपुर, जलालपुर,कटेहरी,टांडा और गोशांईगंज हैं.

इस सीट की एक और खासियत ये भी है कि बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती खुद इस सीट से 3 बार सांसद रह चुकी हैं. क्षेत्र से मायावती को तीन बार अपना सांसद चुना गया, लेकिन उन्होंने तीनों बार सांसद पद से इस्तीफा दे दिया.

इस लोकसभा क्षेत्र के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने के दौरान एक जो सबसे मजेदार बात हमें पता चली वो ये थी कि साल 1991 में इस सीट पर हार- जीत का फैसला सिर्फ 127 वोटों के अंतर से हुआ था.

नाम बदलने के बाद, साल 2009 में जिले का पहला सांसद बहुजन समाज पार्टी के राकेश पांडेय को चुना गया, और उसके बाद साल 2014 में दूसरे सांसद बने भारतीय जनता पार्टी के हरिओम पांडेय, जो अभी तक यहाँ से सांसद हैं.

क्षेत्र में चर्चे तो इस बार भी भारतीय जनता पार्टी के ही है, लेकिन ये राजनीति है, इसमें कब क्या होगा पक्का नहीं कहा जा सकता. फैसला तो जनता के विश्वास और नेता जी के करवाए विकास पर ही निर्भर करेगा.

सुल्तानपुर

पारिजात वृक्ष, धोपाप मंदिर, लोहरामाउ देवी मंदिर, सीताकुंड, आदि सुल्तानपुर जनपद की प्रमुख जगहों में से हैं. ये जिला उत्‍तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ा ही ख़ास जिला है. गांधी परिवार के वरुण गांधी बारतीय जनता पार्टी के टिकट पर इसी सीट से सांसद हैं.

सुलतानपुर विधान सभा में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. जिनके नाम इसौली, सुल्तानपुर, सदर, लम्भुआ और कादीपुर हैं. इनमें से कादीपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.

बात अगर शुरुआत से अबतक के चुनावों के बारे में करें तो पता चलता है कि सुल्तानपुर सीट पर अबतक कांग्रेस आठ बार, भारतीय जनता पार्टी चार बार, बहुजन समाज पार्टी दो बार, जनता दल ने एक बार, और जनता पार्टी एक बार अपनी जीत दर्ज करा चुकी है.

समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर आजतक अपना खाता नहीं खोल पाया है. उसे आजतक इस सीट पर कभी जीत नहीं मिल सकी है. सुलतानपुर लोकसभा सीट हमेशा से वीवीआईपी नेताओं का चुनावी क्षेत्र रहा है.

राजीव गांधी और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं की सीट अमेठी से पहले सुलतानपुर जनपद में ही थी. ये बात तब की है जब अमेठी अलग जिला नहीं बना था. फ़िलहाल गांधी परिवार के ही सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के नेता वरुण गांधी यहाँ से सांसद हैं.

पिछली लम्बी चली सरकारों का हाल, और जनता के बीच का माहौल देखने के बाद ऐसा महसूस हो रहा है कि भारतीय जनता पार्टी 2019 में भी फिर से बाजी मार ले जायेगी.

गाज़ीपुर

विश्वनाथ प्रसाद गहमरी की कर्मभूमि गाजीपुर सीट, उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में वाराणसी के बाद दूसरी घमासान वाली सीट बन गई है. जहाँ एक तरफ वाराणसी से पीएम मोदी मैदान में उतरे हैं, वहीं दूसरी तरफ गाजीपुर में उतरे हैं केंद्र सरकार के मंत्री मनोज सिन्हा.

साल 2014 में गाजीपुर सीट के चुनाव परिणाम ने बहुत से चुनावी पंडितों को झटका दिया था. दरअसल इस सीट से भारतीय जनता पार्टी ने मनोज सिन्हा को टिकट दिया था. और कोई यह दांव लगाने को तैयार नहीं था कि मनोज सिन्हा को इस सीट से जीत मिलेगी.

चुनाव का नतीज़ा आया तो ‘मोदी लहर’ ने समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी व कांग्रेस समेत और भी दूसरे दलों के उम्मीदवारों के पांव हिला दिए. मनोज सिन्हा केंद्रीय रेल व संचार राज्यमंत्री भी हैं.

पहले ऐसी अफवाहें आ रही थीं कि साल 2019 का लोकसभा चुनाव मनोज सिन्हा गाजीपुर से नहीं लड़ेंगे, लेकिन मनोज सिन्हा ने साफ़ कर दिया थे कि वो चुनाव लड़ेंगे तो बस गाज़ीपुर से ही. और ऐसा ही हुआ भी. वो एक बार फिर गाजीपुर सीट से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, और इस सीट से उनके दोबारा खड़े होने जाने पर माहौल भी भारतीय जनता पार्टी का ही बनता नज़र आता है.

अयोध्या

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या, राममनोहर लोहिया की जन्मभूमि अयोध्या, कुंवर नारायण और राम प्रकाश द्विवेदी की जन्मभूमि अयोध्या. 6 नवम्बर 2018 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका नाम फैजाबाद से बदल कर अयोध्या कर दिया. राम जन्मभूमि, नागेश्वर मंदिर, हनुमान गढ़ी, सीता की रसोई, गुरुद्वारा ब्रह्मकुण्ड, गुप्तार घाट, गुलाब बाड़ी, बहुबेगम का मकबरा और कलकत्ता क़िला यहां के प्रमुख एवं प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से हैं.

देश में जबसे चुनाव शुरू हुए तबसे अभी तक अयोध्या सीट पर कांग्रेस पार्टी को सबसे ज्यादा बार जीत मिली है. कांग्रेस ने इस सीट को 7 बार अपना बनाया और भारतीय जनता पार्टी ने 4 बार.

साल 2009 में इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्ज़ा था. और डॉ. निर्मल खत्री इस सीट से सांसद थे. इसके बाद 2014 में फिर से भारतीय जनता पार्टी को यहाँ से जीत मिली, और यहाँ के सांसद बने लल्लू सिंह.

भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान सांसद लल्लू सिंह, चौथी बार यहाँ से मैदान में हैं. लल्लू सिंह अयोध्या सीट से भारतीय जनता पार्टी का चेहरा बन चुके हैं. इसकी एक वज़ह ये भी है की साल 1989 से लेकर 2007 तक लल्लू सिंह लगातार यहाँ विधायक चुने जाते रहे हैं. साल 2012 में उन्हें पहली बार यहाँ से हार का सामना करना पड़ा था, और फिर 2014 की मोदी लहर ने उन्हें सीधे लोकसभा पहुंचा दिया.

भगवान श्री राम की धरती अयोध्या से कभी भारतीय जनता पार्टी तो कभी समाजवादी पार्टी को जीत मिलती रही है. 2014 में जब लल्लू सिंह चुने नहीं गए थे, तब इस सीट से 1991, 1996, और 1999 में विश्व हिन्दू परिषद के कट्टर हिंदूवादी छवि के नेता रहे विनय कटियार को जीत मिलती रही. वे अटल भिहारी बाजपेई और लाल कृष्ण आडवाणी युग से भारतीय जनता पार्टी के ख़ास चेहरों में से हैं.

भारतीय जनता पार्टी के लिए ये सीट हमेशा से ही अच्छी रही है. और इस बार भी लल्लू सिंह को अपनी जीत का पूरा भरोसा है.

जिले अभी और भी हैं, पूर्वांचल की चुनावी चर्चा में अभी बहुत कुछ बाकी है, और ये बहुत कुछ आपको मिलेगा हमारे अगले विडियो में, इसलिए बने रहिये हमारे साथ.

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