चुनावी चौपाल में आज बातें पूर्वांचल की

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देश का माहौल चुनावी है, और राजनीतिक अखाड़े सज चुके हैं. भारी- भरकम, दुबली- पतली सभी पार्टियों ने एक- दूसरे के खिलाफ ताल ठोंक दी है, एक- दूसरे को ललकार दिया है. हमारी टीम चुनाव के इस माहौल पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है, और हर इलाके का विश्लेषण कर आपके सामने लाने की कोशिश में है.
तो आइये इसी कड़ी में आपको मिलवाते हैं उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से यानी पूर्वांचल की राजनीति से. पूर्वांचल क्षेत्र में जो मुख्या जिले आते हैं, वो हैं,

बहराइच, बलिया, बस्ती, गोंडा, प्रयागराज, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, आजमगढ़, मऊ, वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, अम्बेडकरनगर, सुल्तानपुर, अयोध्या, गाज़ीपुर, मिर्ज़ापुर, सोनभद्र, संत रविदास नगर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, प्रतापगढ़, और बहराइच.

1.बहराइच:

हमारी इस लिस्ट का पहला जिला बहराइच उत्तर प्रदेश के अति पिछड़े इलाकों में से एक है. नेपाल सीमा से सटा होने के कारण अति संवेदनशील भी. ये अपने अन्दर गंगा जमुनी तहजीब को समेटे हुए नज़र आता है, क्योंकि यहाँ महाराजा सुहैलदेव का, मरी माता का मंदिर भी है, और मसूद सैयद सलार की दरगाह भी. यहाँ का हिन्दू मुस्लिम अनुपात करीब 60- 40 का है.

यहाँ के लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं, जिनका नाम है बहराइच, नानपारा, मटेरा, बलहा और महसी. फिलहाल इन सीटों में से चार सीटें भारतीय जनता पार्टी के खेमे मैं हैं और एक समाजवादी पार्टी के. क्षेत्र में करीब 24 लाख 65 हज़ार मतदाता हैं. और इन मतदाताओं में करीब 13 लाख पुरुष और 11 लाख महिलायें हैं.

यहाँ की सांसद हैं साध्वी सावित्री बाई फुले. इन्होने साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर यहाँ से जीत हासिल की. लेकिन इस बार वो भाजपा का हाथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं. दूर से देखने पर मालूम होता है कि बहराइच में बयार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बह रही है. ऐसा लगता है कि सांसद सावित्री बाई फुले का साथ छोड़ जाना, और सपा- बसपा का गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. लेकिन अलग- अलग मीडिया संस्थानों की ज़मीनी पड़ताल देखने पर आसार मिले जुले नज़र आते हैं. यहाँ 6 मई को मतदान होना है, और नतीजे देखकर पता चल ही जाएगा कि असलियत क्या है.

2.बलिया:
लिस्ट का दूसरा जिला बलिया राजनीति में ख़ास भूमिका रखता है. स्वतन्त्रता आन्दोलन में अपनी ख़ास जगह रखने वाला बलिया, एक लम्बे वक़्त तक विकास से दूर रहा है. लेकिन यहाँ की राजनीति में फिलहाल खासी चहल- पहल दिखाई दे रही है.

बलिया लोकसभा सीट के अंतर्गत उत्तरप्रदेश विधानसभा की पांच सीटें आती हैं. इनके नाम हैं बलिया नगर, मोहम्मदाबाद, ज़हूराबाद, फेफना और बौरिया. यहाँ के मौजूदा सांसद हैं भारतीय जनता पार्टी के भरत सिंह.
यहाँ की करीब 92 प्रतिशत आबादी हिन्दू है और करीब 6 प्रतिशत मुस्लिम. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में करीब 17 लाख 68 हज़ार 2 सौ इकहत्तर लोगों ने यहाँ मतदान किया था. और इन लोगों में 55 प्रतिशत पुरुष व 44 प्रतिशत महिलायें थीं.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने वीरेंद्र सिंह मस्त का टिकट फाइनल किया है. उन्कोप टिकट मिलने से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में काफी जोश है. लेकिन देखने वाली बात ये है कि पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के गढ़ में क्या भारतीय जनता पार्टी फिर से अपनी जगह बना पायेगी या नहीं.

3.बस्ती:
तीसरे नंबर का जिला बस्ती भी उत्तर प्रदेश के पिछड़े हुए जिलों की लिस्ट में शामिल है. यहाँ की हालत सुधर तो रही है लेकिन बहुत ही धीमी रफ़्तार से. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बस्ती से भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर खड़े हरीश द्विवेदी को जीत मिली थी. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 17 लाख 87 हज़ार 4 सौ 76 लोगों ने मतदान किया.


इन मतदाताओं में से 8 लाख 24 हज़ार 8 सौ 31 मतदाता महिलाएं थीं, और 9 लाख 62 हज़ार 5 सौ 8 मतदाता पुरुष. बस्ती क्षेत्र में पिछले एक लम्बे अरसे से सोशल मीडिया पर ये अफवाहें फ़ैलाई जा रही थीं कि इस बार भारतीय जनता पार्टी हरीश द्विवेदी को टिकट नहीं देगी. लेकिन लोगों के इस तरह के दावे गलत साबित हुए.


भारतीय जनता पार्टी ने इस बार भी हरीश द्विवेदी को ही जिले से अपना उम्मीदवार चुना. जिले में एक लम्बे समय से सपा और बसपा का बोलबाला रहा है, लेकिन फिलहाल यहाँ से भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा मज़बूत मालूम पड़ता है.

4.गोंडा:
गोंडा उत्तर प्रदेश के सबसे उपजाऊ जिलों में से एक है. इस जिले के अंतर्गत 1,817 गाँव आते हैं. यहाँ की अधिकतम आबादी शहरों में रहती है, लेकिन फिर भी शिक्षा के मामले में ये क्षेत्र अबतक काफी पिछड़ा हुआ है. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 5 सीटें आती हैं.

इन सीटों के नाम गोंडा, उतरौला, मेहनौन, मनकापुर, और गौरा हैं. से वर्तमान सांसद हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता कीर्ति वर्धन सिंह. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 17 लाख 10 हज़ार 8 सौ 25 लोगों ने मतदान किया. इन कुल मतदाताओं में 45 प्रतिशत महिलायें और 54 प्रतिशत पुरुष शामिल हैं. यहाँ की 79 प्रतिशत आबादी हिन्दुओं की है और 19 प्रतिशत मुस्लिमों की.

5.प्रयागराज:
संगम नगरी प्रयागराज बहुत से मामलों में सिर्फ पूर्वांचल का ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरप्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है. यहाँ की लोकसभा सीट दिग्गजों की सीट रही है. यहाँ से लाल बहदुर शास्त्री, वीपी सिंह, डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी, अमिताभ बच्चन, हेमवती नंदन बहुगुणा, रेवती रमण और जनेश्वर मिश्र भी चुनाव लड़ चुके हैं. भारतीय जनता पार्टी के लिए इस जिले की सीट कभी बहुत अच्छी नहीं रही. लेकिन एक लम्बे अरसे के बाद साल 2014 में श्यामाचरण गुप्ता को यहाँ से जीत मिली थी.

इस साल भव्य महाकुम्भ का केंद्र रहा प्रयागराज अब चुनाव के महाकुम्भ में डुबकी लगा रहा है. सियासी माहौल गर्म हैं. कुछ दिन पहले तक बहुत सी अफवाहें वोटर्स को भ्रमित करती रहीं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की तरफ से रीता बहुगुणा जोशी का नाम सामने आने के बाद से विरोधी खेमे में बाहरी तौर पर चुप्पी पसरी है, और भीतर बहुत हलचल है. वज़ह है कि रीता बहुगुणा जोशी अभी हाल ही में कांग्रेस को छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई हैं. वो प्रयागराज की मेयर भी रह चुकी हैं. उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाने के बाद से कांग्रेस को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनकी वज़ह से कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में ना चले जाएँ.

यहाँ की कुल आबादी करीब 60 लाख है. इसके अंतर्गत कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. जिनके नाम हैं मेजा, करछना, इलाहाबाद दक्षिण, बारा और कोरांव. इन पांच सीटों में से कोरांव और बारा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है. फिलहाल प्रयागराज की कुल चार सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है और करछना सीट सपा के पास है.

6.गोरखपुर:
बाबा गोरखनाथ की नगरी गोरखपुर. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नगरी गोरखपुर. यहाँ की सीट उत्तरप्रदेश की सियासत में ख़ास महत्व रखती है. ये लोकसभा सीट हमेशा से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रही है. यहाँ की जनता का झुकाव हमेशा से ही मठ की तरफ रहा है.

साल 1991 से साल 2014 तक हर लोकसभा चुनावों में यहाँ से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ही जीतते रहे, और साल 1998 से लेकर 2017 तक योगी आदित्यनाथ यहाँ से सांसद रहे. साल 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनको सांसद का पद छोड़ना पड़ गया.

हाल ही में सांसद प्रवीण निषाद ने सपा और बसपा को एक करारा झटका दिया है. हाल ही में सांसद प्रवीण निषाद ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है, और ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो भारतीय जनता पार्टी के टिकट से चुनाव भी लड़ सकते हैं.

7.महाराजगंज:
महाराजगंज पूर्वी उत्तर प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों में से आता है. पुराने वक़्त में ये गोरखपुर से ही कटकर अलग हुआ था. 90 के दशक से पहले ये राजनेता और स्वतन्त्रता सेनानी सिब्बन लाल सक्सेना का अभेद गढ़ हुआ करता है. वो सबसे पहले कांग्रेस में थे, लेकिन सम्मान ना मिलने के कारण पार्टी को छोड़कर, अपना अलग राजनीतिक दल बनाकर राजनीति में उतरे, और लगातार जीतते रहे.

लेकिन साल 1990 के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने लगातार अपनी पकड़ बनाए रखी. 1990 के बाद हुए कुल सात लोकसभा चुनावों में से 5 भारतीय जनता पार्टी ने जीते. महाराजगंज लोकसभा के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनके नाम फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महाराजगंज और पनियारा हैं.

महाराजगंज जिले की आबादी 26.8 लाख है. कुल आबादी में 13.8 लाख पुरुष और 13 लाख महिलाएं हैं. यहाँ की 81.8 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की है, और 17.1 प्रतिशत मुस्लिमों की. फिलहाल तो यहाँ हवा भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में ही बह रही है लेकिन, फिर भी ये राजनीति है, और राजनीति में रणनीति हर वक़्त मजबूत रखनी ही होती है.

8.देवरिया:

संत देवरह बाबा की धरती देवरिया पूर्वांचल की उन ख़ास सीटों में से है जिसपर जमकर राजनीति होती है. साल 2014 में यहाँ की सीट पर भारतीय जनता पार्टी से कलराज मिश्र को जीत मिली थी. कलराज मिश्र भारतीय जनता पार्टी के एक कद्दावर नेता हैं, लेकिन पिछले काफी वक़्त से कलराज मिश्र के चुनाव ना लड़ने की ख़बरों से बाज़ार गर्म है. और चर्चा है कि उनकी जगह शलभमणि त्रिपाठी को उतारा जाएगा.

देवरिया लोकसभा के अंतर्गत 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इनके नाम देवरिया, तमकुही राज, फाजिलनगर, पथरदेवा, रामपुर कारखाना हैं. यहाँ कुल मतदाताओं की संख्या 18 लाख 6 हज़ार 9 सौ 26 दर्ज की गयी थी. इन मतदाताओं में 9 लाख 97 हज़ार 3 सौ 14 मतदाता पुरुष, और 8 लाख 9 हज़ार 3 सौ 19 मतदाता महिलायें हैं.

इस सीट पर एक लम्बे वक़्त से कांग्रेस का दबदबा रहा है. लेकिन पिछले एक लम्बे अरसे से कांग्रेस की हालत यहाँ ठीक नहीं दिखी. समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पिछले काफी वक़्त से बारी- बारी यहाँ की राजनीति में आगे हैं. इसी क्रम में इस बार भी आसार भारतीय जनता पार्टी के ही नज़र आते हैं. लेकिन ये हमको भी देखना है कि इस बार की राजनीति यहाँ से क्या खबर लाती है.

9.आजमगढ़:
आजमगढ़ पूर्वांचल की सबसे ज्यादा चर्चित सीटों में से एक है. ये एक लम्बे वक़्त से समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है. ये सीट सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की सीट के रूप में जानी जाती है, लेकिन अब भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ़ निरहुआ की वज़ह से इसके चर्चे हो रहे हैं.

दिनेश लाल यादव उर्फ़ निरहुआ अभी हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं, और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें आजमगढ़ सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. इस बार के चुनाव में मुलायम सिंह यादव की जगह आज़मगढ़ से चुनाव में उतर रहे थे उनके बेटे अखिलेश यादव, और भारतीय जनता पार्टी का अखिलेश यादव के खिलाफ दिनेश लाल यादव को मैदान में खड़ा कर देना एक बड़ा फैसला है.

यहाँ की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के रमाकांत यादव का नाम काफी चर्चित रहा. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को कड़ी टक्कर दी थी. मुलायम सिंह यादव को उनसे जीतने के लिए अपने गढ़ में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.

कुल पांच विधानसभा सीटें हैं जो आज़मगढ़ के अंतर्गत आती हैं. इनके नाम हैं गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़, मेहनगर. इन पांच सीटों में से एक भी सीट भारतीय जनता पार्टी के पास नहीं है.

ऐसे में रमाकांत यादव की टिकट काटकर दिनेश लाल यादव को टिकट दिया गया है. अब देखना ये है कि भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ़ निरहुआ राजनीति में कितना कमाल दिखा पाते हैं.

10.वाराणसी:
लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की ‘हॉटसीट’ कही जाने वाली, महादेव और माँ गंगा की नगरी वाराणसी पर सभी की नज़रें टिकी रहती हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद इस जगह से खड़े होकर ताल ठोंकते हैं.

एक गणना की मानें तो वाराणसी में 2.5 लाख ब्राह्मण, 3.25 लाख वैश्य, 2 लाख पटेल, 1.25 लाख भूमिहार,1.50 लाख दलित, 80 हजार यादव, और 3 लाख मुस्लिम वोटर्स हैं.

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वाराणसी को कांग्रेस का गढ़ कहते हैं, वो कहते हैं कि एक समय था जब वाराणसी कांग्रेस का अभेद किला होता था, लेकिन यह बात सच नहीं है. अबतक हुए कुल चुनावों में यहाँ 7 चुनाव कांग्रेस ने जीते हैं और 6 भारतीय जनता पार्टी ने.

साल 1991 से इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी ही कायम है. कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सिर्फ एक चुनाव का अंतर है, और यहाँ का सियासी माहौल ऐसे इशारे दे रहा है कि ये अंतर भी इस बार ख़त्म हो जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर बनारस सीट से खड़े हैं. यहाँ की जनता 19 मई को सातवें चरण के चुनाव में उनकी किस्मत को एवीएम में कैद कर देगी.

फिलहाल पूर्वांचल की राजनीति में इतना ही. बाकी जिलों की जानकारी हम आपको देंगे पूर्वांचल राजनीति के अगले भाग में, इसलिए बने रहिये हमारे साथ, नमस्कार.

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