गोवा के दो मतदान केंद्र पर दिव्यांगजनों ने दिया मतदान में योगदान, हो रही है तारीफ

504

चुनावी मौसम है हर तरफ चुनाव की बातें हो रही हैं, नेताओं की बातें हो रही हैं, भाषणों की चर्चा है.. लेकिन आज हम आपको चुनाव से जुडी एक ऐसी खबर बताने जा रहे हैं जो इन सबसे अलग है… चुनाव आयोग लगातार मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है. सिर्फ मतदाताओं को ही नही बल्कि चुनाव आयोग और सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए उचित व्यवस्थाएं भी दी जा रही हैं. इसका एक जीता जागता उदाहरण गोवा में देखने को मिला. गोवा में दो मतदान केन्द्र ऐसे चलाए जा रहे है जिसमें सभी कर्मचारी दिव्यांग हैं. गोवा मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा दो ऐसे मतदान केन्द्र तैयार किए गए हैं जहां मतदान केन्द्र का पूरा दारोमदार दिव्यांग जन ही संभाले हुए हैं. नोडल अधिकारी ने बताया कि दिव्याग्जानों को भी मतदान के इस पर्व में हिस्सा लेने का पूरा अधिकार हैं. उनके साथ अलग तरह का व्यवहार नही किया जाएगा. सभी लोग समान है किसी को क्षमता को कम नही आंका जाना चाहिए. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नोडल अधिकारी नारायण गाड ने कहा कि किसी वजह से ये भले ही ये शारीरिक रूप से कमजोर हो लेकिन इनके अंदर काम करने की क्षमता किसी से कम नही है.

आपको बता दें कि इस मतदान केंद्र में दिव्यन्ग्जनों के लिए किसी तरह की सुविधा की कमी नही है. उनपर विशेष ध्यान दिया गया है. आने-जाने के लिए रेलिंग, व्हील चेयर चढ़ाने के लिए रैंप और दूसरी सहूलियत का भी खासा ध्यान दिया गया है. जिससे किसी मतदाता को किसी प्रकार की असुविधा ना हो.. गोवा में वो मतदाता केंद्र जिन्हें दिव्यांग जन संभाल रहे हैं इसे देखने के बाद ये बिलकुल नही लगता कि ये किसी अन्य मतदान केंद्र से अलग है. 933 वोटरों वाला ये मतदान केंद्र पर किसी मतदाता को बिना किसी दिक्कत के मतदान कराने में सक्षम है.

दिव्यांग जनों के संरक्षक और सरकार द्वारा बनाये गये नोडल अधिकारी ताहा हाजिक का कहना है कि “यह एक जज्बा है जो हमें आम इंसान को भी दिखाना है कि हम वास्तव में महत्वपूर्ण वोटर हैं जो अपनी जिम्मेदारियां समझते हैं और देश की उन्नति में अपना योगदान भी देते हैं.

हम निश्चय ही उत्साहित हैं की गोवा सरकार की इस पहल से सम्मान के साथ मुख्यधारा में जुड़ने का अवसर भी मिला है.” हालाँकि अब हम इस बात से इनकार नही कर सकते हैं कि जिस तरह महज 30 लोगों ने जो जज्बा दिखाया है वो जज्बा सैकड़ों लोग मिलकर भी दिखा पाते. यह जिम्मेदारियां इन्हें सरकार की तरफ से दी गयी है लेकिन ये अपने काम को सही ढंग से करके ये साबित कर दिया है कि दिव्यांगजन भी किसी काम को करने में असमर्थ नही है. हालाँकि दिव्यांगजनों द्वारा दो मतदान केंद्र संभाला जाना चुनाव आयोग और सरकार द्वारा की गयी एक अच्छी पहल है. इससे उनका मनोबल बढेगा और अन्य दिव्यांगजनों का भी हौसला बढेगा.

चुनाव आयोग भी इस बार दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए उचित व्यवस्था की जा रही हैं. उनकी मदद के लिए कर्मचारी तैनात किये गये हैं. मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी उसके कुछ दिन बाद एक फैसला लिया कि विकलांगों को अब दिव्यांगजनों के नाम पुकारा जाएगा. कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी जब वाराणसी गये थे तब भी उन्होंने दिव्यांगजनों से मुलाक़ात की थी. जिसका विडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. किसी ने प्रधानमंत्री मोदी की उन्ही के सामने मिमिक्री की थी तो किसी ने पीएम मोदी से मदद मांगी थी.. हालाँकि इन सबके बावजूद जिस तरह से इस बार दिव्यांगजन लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा ले रहे हैं वाकई में इसकी तारीफ की जानी चाहिए.