बिहार को ‘आत्मनिर्भरता’ की ओर ले जाने वाली पहल

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क्या कृषि जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़े जा सकते हैं? एक आम चुनावी विश्लेषक से पूछा जाए, तो संभवतः वो इसका जवाब ना में देगा. कुछ वर्षों पहले एक पैदल मार्च निकालकर सरकार का विरोध करने की कोशिश हुई थी. महाराष्ट्र में हुए इस प्रयास से कैसे लोग जुड़े थे, उसका अंदाजा इस बात से भी लगता है कि उनमें से कुछ अब देश विरोधी कोशिशों के लिए संगीन धाराओं में जांच झेल रहे हैं. फिर अनेक राज्यों में चुनाव भी हुए और बात आयी गयी हो गयी. उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्य जहाँ से बड़े किसान आन्दोलन और नेता हुए हैं, वहां भी अब चुनावों से पहले कृषि की चर्चा सुनाई नहीं देती.

फिर ऐसा क्या है कि बिहार चुनावों से ठीक पहले कृषि की बात हो रही है? पहले तो मुख्यमंत्री नितीश कुमार कह चुके कि राज्य की आबादी का करीब 75 फीसदी हिस्सा कृषि पर निर्भर है, और अब कई बड़ी योजनाओं का उद्घाटन भी होने जा रहा है. शायद लोगों को याद हो कि कभी प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार को बड़े पैकेज देने की घोषणा की थी. जब किये गए चुनावी वादे पूरे होने लगते हैं तो लोगों की आशा भी बढ़ने लगती है. वो दौर जब दादी से लेकर आगे की तीन पीढ़ियों तक चुनाव सिर्फ गरीबी हटाने के मुद्दे पर ही लड़ लिए जाते थे, शायद बीत चला.

किसानों के लिए जो राज्य सरकार की योजनाएं इस बार बिहार में नजर आई वो परंपरागत कृषि से जुड़ी थीं. ये सीधा खेतों, सिंचाई, खाद-बीज जैसे मुद्दों पर अटकी रही. दूरदर्शिता का उदाहरण तब नजर आने लगा जब प्रधानमंत्री के बिहार आने की घोषणा हुई. कृषि से ही जुड़े कई दूसरे क्षेत्र भी होते हैं. पशुपालन तो सीधा जुड़ा हुआ होता ही है, साथ ही मत्स्य पालन भी कृषि को एक बेहतर आय का क्षेत्र बनाने में मददगार हो सकता है. बिहार में कई ऐसे हिस्से हैं जहाँ मत्स्य पालन एक लाभ का व्यवसाय होता. आजादी के सत्तर वर्षों बाद अब कहीं जाकर केंद्र का ध्यान इस और गया है.

अपने कार्यक्रम के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी 10 सितंबर को ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ के तहत 107 करोड़ की लागत की परियोजना के शुरुआत की घोषणा करेंगे. सीतामढ़ी के डुमरा में 5 करोड़ की लागत से बखरी मछली बीज फार्म, 10 करोड़ की लागत से रोग निदान और गुणवत्ता परीक्षण हेतु किशनगंज के मत्स्य पालन कॉलेज, पूसा में समेकित मात्स्यिकी उत्पादन प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन, मधेपुरा में 1 करोड़ की लागत से मत्स्य चारा मिल, पटना स्थित बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में जलीय रेफरल प्रयोगशलाएं, और पटना के मसौढ़ी में 2 करोड़ की लागत से फिश ऑन व्हील्स और 2.87 करोड़ की लागत से कृषि विश्वविद्यालय का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री इसी दिन करेंगे.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर में कुल 74 करोड़ की विभिन्न योजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित है. इस योजना में 11 करोड़ की लागत से बने स्कूल ऑफ एग्रीबिजिनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के भवन का उद्घाटन होगा। इसके साथ ही ब्वायज हॉस्टल (27 करोड़), स्टेडियम (25 करोड़), और इंटरनेशनल गेस्ट हाउस (11 करोड़) का शिलान्यास भी प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। इनके अलावा भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 84.27 करोड़ की लागत से पूर्णिया सीमेन स्टेशन, 8.06 करोड़ की लागत से बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में इम्ब्रयो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (ईटीटी) एवं आईवीएफ लैब और 2.13 करोड़ की लागत से बेगूसराय, खगड़िया, समस्तीपुर, नालंदा व गया में तैयार सेक्स सॉर्टेड सीमेन परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी करेंगे.

संभवतः ये पिछले कई दशकों में पहली बार हो रहा है जब करीब 300 करोड़ की परियोजनाएं सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए एक बार में शुरू की जा रही हैं. बदलाव ऐसे ही एक दिन अचानक आता है. कृषि क्षेत्र के बदलावों का बिहार में स्वागत है.

  • आनंद कुमार (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)