लॉक डाउन 2.0 के लिए सरकार ने उठाये हैं कुछ ऐसे कदम जिनसे बेहतर होगी अर्थव्यवस्था, ये क्षेत्र साबित होंगे…

576

आज कोरोना का दंश झेल रहा है भारत कहीं न कहीं अपने को सँभालने में लगा हुआ हैं. भारत को अपनी इकॉनमी के साथ साथ किसानो को भी देखना हैं. क्योकि देश तो पूरी तरह से लॉकडाउन है. परन्तु किसानो के लिए कुछ भी बंद नहीं हैं.  जिसको देखते हुए राज्य सरकार ने पहले शुरू किया हैं. लॉक डाउन के बीच करना भी जरुरी है क्योकि ये सीजन खेती और किसानी का ही चल रहा हैं.

लॉक डाउन में कुछ छेत्रों को आराम देने की बात कही गई है लेकिन कुछ शर्तों पर. आज जिन—जिन क्षेत्रों को लॉकडाउन के बीच सरकार की ओर से संजीवनी मिली है, उनका पूरा योगदान देखा जाए तो यह जीडीपी के 50 फीसदी के करीब तो हो ही जाता है. हमारे देश के किसान की बात करें तो कहीं न कहीं इन लोगों के हाथ में भी जीडीपी को बढ़ाने का जिम्मा है.

किसानो के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी नवीनतम गाइडलाइन में खेती—बाड़ी और इससे जुड़े उद्योग को करीब-करीब अनलॉक कर दिया है. अब न सिर्फ किसान खेती कर सकेंगे बल्कि फलों की खेती या बागवानी, कृषि वानिकी, पशुपालन, मछली पालन और इससे जुड़े अन्य कार्यों को भी छूट मिल गई है. यही नहीं, अब रासायनिक खाद, उन्नत बीज और कीटनाशक बनाने वाली कंपनियां भी चल सकेंगी. यूं तो अर्थव्यवस्था में कृषि और इससे संबंधित क्षेत्र का योगदान घट कर करीब 15 फीसदी ही रह गया है, लेकिन इससे देश की आधी जनसंख्या न सिर्फ जुड़ी है बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने का भी सबसे बड़ा जरिया है.

गृह मंत्रालय ने अपने नवीनतम गाइडलाइन में ग्रामीण इलाकों में चलने वाले लगभग सभी उद्योग-धंधों को इजाजत दे दी है. उन इलाकों में परंपरागत उद्योग तो चलेंगे ही, नवीनतम तकनीक से चलने वाले आईटी पेरिफेरल उद्योग को भी काम करने की इजाजत मिल गई है. बता दें बैंक पहले से ही खुले थे लेकिन अबकी बार सम्पूर्ण वित्य छेत्र को खोल दिया गया हैं.सरकार ने गाँव में मंरेगा मजदूर को भी काम अकरने के लिए छूट दे दी हैं. ये बहुत जरूरी भी है क्योकि किसान के लिए ये उनकी रोजी रोटी हैं.  ये वक़्त भी उन सभी किसानो के लिए भुत अमूल्य हैं जिसको देखते हुए गृह मंत्रालय ने ये आदेश दिया हैं.A