तो इस चिढ़ से डोनाल्ड ट्रंप ने उड़ाया भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी का मजाक

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अभी हाल में में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी का मजाक उड़ाया है।
दरअसल भारत अफगानिस्तान में लाइब्रेरी बनवा रहा है जिसको लेकर ट्रम्प ने मोदी साहब की खिंचाई की है। उन्होंने कहा है कि पांच घण्टे की मीटिंग में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी लाइब्रेरी बनवाने की ही बात करते रहे।

अब आप सोच रहे होंगे कि 5 घण्टे तक भला कौन लाइब्रेरी की बात करता है शायद डोनाल्ड ट्रम्प ने बोर होकर ये बयान दे दिया होगा। लेकिन रुकिए जनाब,असल मे ये बोरियत नही बल्कि एक तरह की फ्रस्ट्रेशन या फिर यूँ कहे कि खुन्नस है। और इसके पीछे की वजह भारत द्वारा अफगानिस्तान में लगातार किए जा रहे विकास के काम है। आज हम आपको बताएंगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति की इस चिढ़ की क्या क्या वजह है। चलिए शुरू करते है।

1) अमेरिका को शायद डर है कि अफगानिस्तान में पीएम मोदी की बदौलत लाइब्रेरी खुलने से वहां के युवाओं को पढने का मौका मिल जाएगा तो वो आतंक की राह पर जाने से कतराएंगे और देश की तरक्की के बारे में सोचेंगे। फिर अमेरिका अपने हथियार किसको और कैसे बेचेगा ।

2) इतना सब जानते है की तालिबान को हथियारों की सप्लाई करके अफगानिस्तान की बर्बादी की कहानी खुद अमेरिका ने तैयार की थी और बाद में जब हालत गंभीर होने लगी तो अपने आपको सुपर पावर, विश्वचिन्तक और लोकतंत्र का हितकारी दिखाने के लिए सैनिकों की तैनाती कर दी। जब भारत अफगानिस्तान के लिए विकास का रास्ता तैयार कर रहा है तो उसको जलन हो रही है।

3) अफगानिस्तान में भारत पिछले कई सालो से विकास करा रहा है। 2015 में अफगानी संसद और सरकारी भवनों के निर्माण में मदद करना हो,अफगानी छात्रों को दी जाने वाली स्‍कॉलरशिप हो या वहां के युवाओं के सशक्तिकरण का प्रयास हो। ये सब भारत वहां करता आया है।
कांग्रेसी नेता अहमद पटेल की माने तो भारत अब तक वहाँ रेल,सड़क,ऊर्जा,संचार जैसे क्षेत्रों में 2100 करोड़ की मदद कर चुका है। अब अमेरिका को लग रहा है कि अफगानिस्तान की सरकार का रुख अमेरिका की तरफ कम और भारत की तरफ ज्यादा है तो
उससे जलन होना भी तय है।

4)अफगानी हितों के लिए भारत सरकार के सहयोगी रवैये को वहां के नागरिक भी बखूबी जानते है जबकि अमेरिका को वहां के लोग उनकी बर्बादी का कारण समझकर हीनभावना से देखते है। शायद ट्रम्प साहब की चिढ़ का एक कारण ये भी है।

5) अमेरिका अफगानिस्तान से अपने 7000 सैनिकों को वापिस बुला रहा है। धीरे धीरे अपनी सेना बुलाने के पीछे अमेरिका का तर्क है कि उसको करोड़ो रुपए की चपत लग रही है इसलिए वो अपने जवानों को वापिस बुला रहा है। जबकि हो सकता है कि अमेरिका फिर से अपने हथियारों के धंधे को बढ़ावा देकर अफगानिस्तान में फिर से तालिबान जैसे किसी संगठन को तैयार करने की फिराक में हो पर उसे भारत की मौजूदगी का डर सता रहा हो। इतना अमेरिका भी बखूबी जानता है कि जब तक भारत का अफगानिस्तान को लेकर मोरल डाउन नही किया जाएगा तब तक भारत अफगानिस्तान से नही हटेगा शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पीएम मोदी का खुलेआम ऐसे मजाक उड़ाना भी उसी कड़ी का हिस्सा है।

बाकी आपको क्या लगता है अपनी राय कमेंट बॉक्स में हमे जरूर दे।

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