वोटिंग से पहले रमज़ान पर शुरू हुए नेताओं सियासत

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2019 की महाभारत यानि लोकसभा का ऐलान होते ही चुनाव तारीखों पर भी संग्राम शुरू हो गया है… कुछ विपक्षी दल जहां केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए चुनाव घोषणा की टाइमिंग पर सवाल उठा रहे हैं.. तो वहीं पवित्र माह रमजान के दौरान वोटिंग पर भी सियासी बयानबाजी होने लगी है…पहले हम आपको इस बयानबाजी की असली बजह से रूबरू करवाते है दरअसल वजह ये है कि कुल 543 में से 169 लोकसभा सीटों पर रमजान के दौरान वोटिंग होना … खासकर के यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली की अधिकतर सीटों पर आखिरी तीन चरण में ही मतदान होना है..विपक्षी नेता कह रहे हैं कि रमज़ान में वोटिंग होने से मुसलमानों को परेशानी होगी…वही दिल्ली में आप विधायक अमानतुल्लाह ने आरोप लगाते हुए कहा है, कि 12 मई को दिल्ली में वोटिंग का दिन रखा गया है. जबकि उस दिन जुमा भी होगा और रमज़ान का महीना भी होगा.. जिसके चलते मुसलमान कम वोट करेगा और इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा..

तो वही कोलकाता के मेयर और टीएमसी नेता फरहाद हकीम ने कहा है, “बिहार, यूपी और बंगाल में सात चरण में चुनाव होने हैं..और इन तीनों राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी काफी ज्यादा है…रोजे के दौरान वोटिंग करने में कुछ परेशानियां आएंगी. चुनाव आयोग को इसका ध्यान रखना चाहिए था..असल में बीजेपी नहीं चाहती कि अल्पसंख्यक यानि माइनॉरिटीज अपना वोट करें…


अब आपको ये भी बताते है कि बयान कुछ भी हों, लेकिन आंकड़े ये कहते हैं.. कि बीते साल पश्चिमी यूपी में लोकसभा की एक सीट कैराना और विधानसभा की एकसीट नूरपुर पर उपचुनाव हुए थे. ये दोनों सीट गवाह हैं कि रमज़ान होने के बाद भी सुबह से शाम तक लोग वोट देने के लिए डटे रहे थे… गौरतलब रहे कि दोनों ही सीट पर मुस्लिम वोटों की संख्या ज्यादा है…
उसके बाद बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा..ये सिर्फ सियासत हो रही है… रोज़े में लोग ऑफिस भी जाते हैं…रोज़ा रखकर मुसलमान जरूरी काम भी करते हैं. ये कोई पहला मौका नहीं है जब रमज़ान में चुनाव हो रहे हैं. कुछ लोग सियासत में रमज़ान को भी शामिल कर रहे हैं…ये तो रही नेताओ के बयानबाजी जो रमजान के उपर सियासत कर रही है अब हम आपको बतायेंगे कि लोगो का क्या पॉइंट ऑफ़ व्यू है … रमजान के वोटों को लेकर जो सियासत चल रही है इस पर Asaduddin Owaisi ने कहा है कि लोग जो बोल रहे है रमजान में वोट देना मुश्किल है वो बकवास है ..पार्टिया मुसलमानों का ठेका ना ले …इलेक्शन कमीशन से शिकायत करना गलत बात है ..


इस पर मक्शूद खान नाम के एक यूजर लिखते है .. यह argument पूरी तरह से बेतुका और हास्यास्पद है … हम आम तौर पर रमजान में काम करते हैं … किसी की special considerationआवश्यकता नहीं है
वही Md Adnan यूजर लिखते है यह सिर्फ एक वोट है मैराथन दौड़ नहीं। हम रमजान के दौरान ऑफिस को नहीं छोड़ते हैं, नहीं जानते कि इस मुद्दे को इशू क्यों बनाया जा रहा है तो हीना नाम की यूजर टोंट मरते हुए कहती है सही बात! इन्हें घर पर रहना चाहिए .. धर्म पहले .. अन्य कम महत्वपूर्ण चीजें इंतजार कर सकती हैं..
क्योंकि, इलेक्शन का क्या है..इलेक्शन तोह हर साल आता जाता है, रमजान तोह 5 साला मे एक बार आता है..और भी ऐसे लोग है जिन्होंने इसको इलेक्शन से ना जोड़ने का सन्देश दिया …

खैर देखा जाये तो इलेक्शन के टाइम पर राम नवमी और परशुराम जयंती भी पड़ रही है ..और नवरात्री के और दुर्गा पूजन के दौरान भी वोटिंग पड जाती है .. पर यहाँ रमजान पर राजनीति हो रही है। चुनाव आयोग को घेरा जा रहा है। बीजेपी को फायदा दिलाने का आरोप आयोग पर लगाया जा चुका है। आम आदमी पार्टी से लेकर टीएमसी तक बिना वजह रमजान पर राजनीति कर रहे हैं.. क्योंकि रमजान हो या होली या फिर हो क्रिसमस… कोई भी आवश्यक काम न तो कभी रुकता है न कभी रोका जाएगा.. ऐसा होता तो इन दिनों पुलिस, रेल, अस्पताल सब जगह छुट्टी होती.. लेकिन ऐसा होता नहीं है। क्योंकि पर्व-त्योहार उत्सव है, आवश्यकता नहीं ..हालाँकि लोगो ने इन पार्टियों के नेताओ को खूब साफ़ आइना दिखाया है .. इससे शायद इन लोगो के दिमाग में ये बात आगई हो की ये राजनीती का मुद्दा नहीं है. और ना इस पर ये घटिया राजनीती करनी चाहिए