शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों में पड़ गई फूट,धरना खत्म करने के लिए होने लगी कहासुनी

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दिल्ली की बात करें तो पिछले 70 दिन से शाहीन बाग चर्चा का विषय बना हुआ है. शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी को लेकर अभी भी धर’ना बंद होने का नाम नही ले रहा है. शाहीन बाग में धर’ना देने वाले लोगो की मांग है कि सीएए और एनआरसी को वापस लिया जाये. शाहीन बाग का मसला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है और उच्च न्यायालय ने अपना आदेश दे दीया है. लेकिन उसके बाद भी शाहीन बाग में धर’ना ख’त्म होने का नाम नही ले रहा है. लेकिन इस कानून के विरो’ध में एक’जुट हुए प्रदर्श’नकारियों में नेतृत्व और अगुवाई करने वाला कोई नहीं है. जिसको लेकर शाहीन बाग के लोगो के बीच मत’भेद भी है. शाहीन बाग में आए दिन लोग आपस में इस बात को लेकर झग’ड़ा कर रहे हैं.

शाहीन बाग में प्रदर्श’नकारीयों ने कई बार कोशिश की थी कि वो अमित शाह से मिलने जायें लेकिन ऐसा नही हो पाया. उनकी ये भी मांग थी कि मोदी सरकार अपने किसी नुमांइदे को उनके पास भेजे जो उनकी बतों को सुने और सरकार के सामने रखे और हम लोगो की मांगे पूरी करें. शाहीन बाग में प्रदर्श’नकारी पीछे हटने का नाम नही ले रहे हैं. इसकी वजह से ये प्रद’र्शन खींचता जा रहा है और वैसे-वैसे लोगो के बीच दूरियें बढती जा रही है.

शाहीन बाग की मौजूदा स्थिति फिलहाल यह है कि कोई भी मंच पर चढ़ कर कभी भी कुछ बोल देता है. जिसे वहां पर मौजूद कुछ लोग उस बात का सर्थन करते है.तो कुछ लोग वि’रोध करते है. वहीं मीडिया के सामने कौन रहेगा, इसको लेकर भी तना’तनी देखी जाती है. अगर कोई शख्स मीडिया के सामने आकर कुछ बोलता है तो दूसरा शख्स उसी बात को मीडिया के सामने ही नका’र देता है. जो लोग वहां धर’ना दे रहे है उनमें आपस में ही मतभेद सामने आ रहे हैं.

शाहीन बाग में अब दादियों के नाम पर वहां के लोगों ने राजनीति  करना शूरु कर दिया है. बता दें कि अब शाहीन बाग की राजनीति कुछ बुजुर्ग महिलाएं जो प्रद’र्शन करने आई थी. उनके नाम पर चलती दिख रही है. जो दंबग दादी के नाम से मशहूर हैं. अब शाहीन बाग की स्थिति यह है कि जब वहां पर कोई बात नहीं सुनता तो लोग दादी को आगे कर देते हैं और उनसे ही जो बात कहलवाने वाली होती है वो दादी से कहलवा देतें ह,. और लोग उसको मान लेते है. लेकिन यहां पर भी लोगो के बीच मतभेद दिखता नजर आ रहा है. क्योकि दूसरे लोग दादी से उसी बात को बाद में खारिज भी करवा देते है.

तो अब देखा जा सकता है कि लोग शाहीन बाग में धरना दे रहे है. या सिर्फ टाइम पास कर रहे है,या फिर अभी भी किसी सरकार की देन है. ये सब देखने वाली बात है. क्योकि वहां पर लोगो के सबके अलग अलग मत हैं और एक दूसरे से किसी की पटरी नही खाती है.