मुस्किल में उद्धव सरकार, शरद पवार ने बुलाई अपने मंत्रियों की आपात बैठक

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महाराष्ट्र की सरकार में खीच तान बंद होने का नाम नहीं ले रही है. आये दिन महाराष्ट्र के महागठबंधन सरकार में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस तीनो अलग सरकार चला रहें हैं. दो दिन पहले की बात है जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने के मामले में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है. उद्धव के इस कदम के बाद शरद पवार के तेवर कुछ अलग ही नजर आये ऐसा लगा कि एनसीपी प्रमुख उद्धव के इस फैसले से खुश नहीं हैं शरद पवार ने आज एनसीपी के सभी 16 मंत्रियों की बैठक बुलाई है. दरअसल, एल्गार परिषद केस की जांच का जिम्मा भी एनआईए को दे दिया गया है.

आपको बता दें की एल्गार परिषद केस पुणे में भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का मानना है कि 31 दिसंबर 2017 को कुछ लोगों ने भड़काऊ भाषण दिया था. जिसकी वजह से अगले ही दिन महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क उठी थी. पुणे पुलिस का दावा है कि एल्गार परिषद कार्यक्रम को माओवादियों का समर्थन हासिल था, इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया था.

एनसीपी चीफ शरद पवार ने कुछ दिन पहले कोल्हापुर में एक रैली के दौरान मोदी सरकार पर जांच को राज्य से वापस अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया था. शरद पवार का कहना था कि ‘भीमा कोरेगांव मामले में महाराष्ट्र सरकार कुछ एक्शन लेने वाली थी, इसलिए केंद्र ने एल्गार परिषद के मामले को अपने हाथ में ले लिया. कानून व्यवस्था पूरी तरह से राज्य के हाथ में होनी चाहिए, लेकिन हैरानी वाली बात है कि राज्य सरकार ने केंद्र के इस फैसले का पुरजोर विरोध नहीं किया’.

वहीँ बीजेपी मौका को भुनाने से नहीं चुकती है. केंद्र सरकार के फैसले को लेकर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने एल्गार परिषद केस की जांच का जिम्मा एनआईए को दिए जाने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा, ‘भीमा कोरेगांव मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेजने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को धन्यवाद देता हूं. शरद पवार इसका विरोध कर रहे थे क्योंकि उन्हें डर था कि एनआईए की जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी.’

एल्गार परिषद केस पुणे में भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का मानना है कि 31 दिसंबर 2017 को कुछ लोगों ने भड़काऊ भाषण दिया था. इस भाषण के अगले ही दिन भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क उठी थी. पुणे पुलिस का दावा है कि एल्गार परिषद कार्यक्रम को माओवादियों का समर्थन हासिल था, इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया था.

महाराष्ट्र के  गृह मंत्री अनिल देशमुख जो एनसीपी कोटे से सरकार में मंत्री है उनका कहना है की महराष्ट्र सरकार  भीमा कोरेगांव की जाँच के लिए एसआईटी गठित करना चाहती थी. लेकिन उद्धव ठाकरे के फैसले को लेकर विवाद हो गया है. क्योकि एनसीपी और कांग्रेस दोनों के इस केस को लेकर अलग विचार है जो उद्धव से मेल नहीं खाते है. देखना है की आज एनसीपी प्रमुख सरकार को लेकर क्या फैसला लेती है या ये खीचतान ऐसे ही चलती रहेगी.