सिक्किम को अलग देश मानती है केजरीवाल सरकार, सिविल डिफेंस की भर्ती विज्ञापन में सिक्किम को बताया अलग देश

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कोरोना संकट से जूझ रही दिल्ली सरकार अब एक नए विवाद में फंस गई है. सिविल डिफेंस के सदस्यों की भर्ती के लिए निकाले गए एक विज्ञापन ने दिल्ली सरकार को सवालों के घेरे में ला दिया है. इस विज्ञापन में दिल्ली सरकार ने एक बड़ी चूक कर दी. भारत के राज्य सिक्किम को नेपाल और भूटान की तरह अलग देश बता दिया. इस विज्ञापन में मुख्यमंत्री अर्विसं केजरीवाल ककी फोटो भी छपी हुई है. अपनी आदत के अनुसार दिल्ली सरकार ने विभिन्न अखबारों में इस विज्ञापन को छपवाया. लोगों की नज़र जैसे ही इस विज्ञापन पर पड़ी लोग भड़क गए.

सिविल डिफेंस वालंटियर्स की भर्ती के लिए निकाले गए इस विज्ञापन में अप्लाई करने के लिए प्रात्रता कॉलम में लिखा गया कि अप्लाई करने वाला भारत का नागरिक हो या नेपाल, भूटान या सिक्किम का नागरिक हो और दिल्ली में निवास करता हो. इस तरह से इस विज्ञापन में सिक्किम को नेपाल और भूटान की तरह अलग देश की कैटेगरी में रख दिया गया. इस विज्ञापन के बाद भाजपा भी दिल्ली सरकार पर हमलावर हो गई.

दिल्ली सरकार का विज्ञापन

देश का बच्चा बच्चा जानता है कि सिक्किम भारत का अभिन्न अंग है फिर दिल्ली सरकार से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई ये सोचने वाली बात है और दिल्ली सरकार को इसका जवाब देना ही होगा. साल 1975 में सिक्किम भारत का अभिन्न अंग बना था. 23 अप्रैल, 1975 को लोकसभा में सिक्किम को भारत का 22 वां राज्य बनाने के लिए संसोधन विधेयक पेश किया गया. जिसे 299-11 के मत से पास कर दिया गया.

1947 में जब भारत आजाद हुआ तो भारत के साथ सिक्किम की संधि हुई, जिसके अंतर्गत सिक्किम की रक्षा, संचार और विदेश मामले भारत की ओर से देखा जाना तय हुआ और सिक्किम की आजादी बरकरार रखी गई. 1953 में चोग्याल को शासन में मदद करने के लिए एक स्टेट काउंसिल बनाई गई थी. ये काउंसिल वहां की जनता खुद तय करती थी. जनता 1973 तक अप्पना काम करती रही. 1970 की शुरुआत तक राज्य में राजनीतिक उथल पुथल चलती रही जिसके कारण राजशाही को हटाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना की मांग वहां की जनता करने लगी थी. उसके बाद 1975 में सिक्किम भारत का 22 वां राज्य बन गया.