भाजपा भले ही दिल्ली विधानसभा चुनाव बुरी तरह हार गई हो और उसका वनवास 5 साल और बढ़ गया हो. लेकिन इस हार में भी भाजपा के लिए खुशखबरी है. हार के बावजूद दिल्ली ने भाजपा को मुस्कुराने का मौका दे दिया है. इसकी वजह से वोटों में आई उछाल.

दोनों राजनीतिक पार्टियों भाजपा और कांग्रेस का भले ही बुरा हाल हुआ हो दिल्ली में लेकिन कांग्रेस का जहाँ सूपड़ा साफ़ हो गया, उसका वोट प्रतिशत साढ़े चार प्रतिशत तक आ गया वहीँ भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ गया है. ओवरऑल अगर देखें तो भाजपा के वोट में 6 फीसदी का उछाल आया. इसके अलावा 70 विधानसभा सीटों में से 63 सीटों पर भाजपा के वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई. इन 63 सीटों में से 20 सीटों पर तो भाजपा के वोट शेयर में 10 प्रतिशत तक का उछाल आया. नज़फगढ़ में भाजपा का वोट शेयर 21 प्रतिशत बढ़ गया.

आम आदमी पार्टी ने भले ही 62 सीटें जीती हो लेकिन 38 सीटों पर उसके वोट शेयर में गिरावट दर्ज की गई. करावल नगर विधानसभा सीट पर आप को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. यहाँ आप के वोट शेयर में 13 प्रतिशत की गिरावट आई. 27 सीटों पर आप और भाजपा दोनों के वोट शेयर बढे.

इन नतीजों से ये बात साफ़ हुई है कि लोगों का कांग्रेस पर से भरोसा पूरी तरह से उठा गया. लोगों ने मन बना लिया था कि या तो आप को वोट देना है या भाजपा को. कांग्रेस के बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं. इसी वजह से 66 में से 63 सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.