राजनाथ बोले जवानों के माता-पिता को खुद पत्र लिखकर देंगे धन्यवाद

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12000 फीट की ऊंचाई, काराकोरम रेंज, सियाचिन ग्लेशियर, दुनिया का सबसे ऊंचा सैन्य क्षेत्र, हर वक़्त भूस्खलन और हिमस्खलन का ख़तरा, हाड़ कंपा देने वाली और खून जमा देने वाली ठण्ड, और इस ठण्ड में तैनात देश के वीर जवानों पर जब नज़र पड़ती है तो मन में बस यही सवाल उठते हैं कि,

आखिर कौन है जो देता है इन वीर जवानों को इतना हौसला?

आखिर कौन भरता है इनमें इतनी गर्मी जो इनके खून को जमने ही नहीं देती?

और जब कभी हमारे मन में ये सवाल उठते हैं तो हर सवाल का बस एक ही शब्द में जवाब भी मिल जाता है, देशभक्ति. और सच भी है, ये देशभक्ति ही तो है जो माइनस 50 डिग्री की ठण्ड में भी इन्हें सीना ताने खड़े रहने की ताकत देती है.

सेना की इस ताकत और जज्बे में चार चाँद लग जाते हैं तब जब देश की राजनीति भी सेना को थोड़ा सा सहारा दे दे. देश के नए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी सेना की ताकत में ऐसे ही चार चाँद लगाने सोमवार 3 जून को सियाचिन दौरे पर पहुंचे.

इस दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ़ रणवीर सिंह और सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत भी मौजूद थे. उन्होंने इस दौरे पर सेना के सभी जवानों के जज्बे को सलाम किया और उनकी बहादुरी को सराहा.

अपने इस दौरे की फोटोज को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर भी किया. उन्होंने देश की सेना के सम्मान में एक ट्वीट करते हुए लिखा कि,

रक्षा मंत्री के रूप में सियाचिन का दौरा करने और वहाँ तैनात सेना के जवानों के धैर्य और साहस को क़रीब से देखने के बाद मेरा यह संकल्प और दृढ़ हुआ है कि अपने कार्यकाल के दौरान सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा से जुड़े मेरे हर फ़ैसले के केंद्र में इस देश की सेनाओं के जवान रहेंगे

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सियाचिन वॉर मेमोरियल पर माल्यार्पण किया और सभी शहीदों को हाथ जोड़कर नमन किया. उन्होंने शहीदों को याद करते हुए कहा,

‘1100 से ज्यादा जवान सियाचिन ग्लेशियर की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं. राष्ट्र हमेशा उनकी सेवा और उनके बलिदान का ऋणी रहेगा.’

इसके अलावा राजनाथ सिंह ने यहाँ देश की रक्षा में तैनात देश के वीर जवानों से बातचीत भी की. इस दौरान उन्होंने जमकर देश की सेना की तारीफ़ की और साथ ही उनके जज्बे, उनकी बहादुरी को सलाम किया.

उन्होंने देश के जवानों से बातचीत करते हुए उन जवानों के माता-पिता को भी धन्यवाद दिया और साथ ही उनसे ये भी कहा कि वो उनके माता-पिता को खुद चिट्ठी लिखकर धन्यवाद देंगे कि उन्होंने आप लोगों को देश की सेवा में भेजा.

रक्षा मंत्री ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि,

मुझे सियाचिन में तैनात अपने हर उस सैनिक पर गर्व है जो हमारी मातृभूमि की रक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं.”

इस सबके अलावा उन्होंने जवानों के साथ जलपान भी किया और यहाँ तैनात सबसे निपुण फील्ड कमांडर्स के साथ उन्होंने यहाँ के सुरक्षा इंतजामों का मुआयना कर उनको भी जानने और समझने की कोशिश की.

सेना के जवानों के साथ काफी वक़्त गुज़ारने के बाद वो चिनार कोर के मुख्यालय, बादामीबाग कैंट भी गए. यहाँ जाकर उन्होंने उन इंतजामों के बारे में जाना जो सेना ने पाकिस्तान की तरफ से की जाने वाली गड़बड़ों से निपटने के लिए किये हैं.

ऐसा नहीं है कि देश के किसी रक्षा मंत्री ने पहली बार सियाचिन का दौरा किया है. राजनाथ सिंह से पहले निर्मला सीतारमण, मुलायम सिंह यादव, शरद पंवार और जॉर्ज फ़र्नांडिस भी जवानों से मिलने सियाचिन जा चुके हैं.

लेकिन जो भी हो जवानों को जब-जब राजनीति अपने बराबर में कंधे से कंधा जोड़ खड़ी नज़र आती होगी तो उन्हें गर्व तो होता ही होगा, हिम्मत तो मिलती ही होगी, ज़ोश तो आता ही होगा और अच्छा भी लगता ही होगा कि देश की राजनीति उनका भी ख़याल रख रही है, क्योंकि वो पूरे देश का ख्याल रखते हैं.

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