तपती धुप में सड़क पर बिखरे गेहूं चुनती गरीब लड़की की तस्वीर के पीछे की सच्चाई आई सामने, फोटोग्राफर पर उठे सवाल

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लॉकडाउन की वजह से मजदूरों और गरीबो को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इसमें कोई शक नहीं है. लॉकडाउन में कई समाजसेवी संस्थाएं और कई ऐसे लोग सामने आये जो गरीबों के लिए राहत शिविर चला रहे हैं और उनतक राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं. लेकिन इन सब के प्बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो चर्चा बटोरने के लिए गरीबों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं और उनको लेकर झूठी मार्मिक कहानियां गढ़ रहे हैं. उज्जैन के दैनिक भास्कर में छपी ऐसी ही एक कहानी सवालों के घेरे में हैं.

दरअसल उज्जैन के दैनिक भास्कर में एक तस्वीर छपी जिसमे एक गरीब लड़की सड़क पर गेहूं के दाने चुन रही है. इस तस्वीर के साथ कैप्शन दिया गया कि 41 डिग्री तपमान में 10 साल की लड़की आरती सड़क पर बिखरे गेहूं के दाने चुन रही है ताकि अपने भाई बहनों की भूख मिटाने का इंतजाम कर सके. तस्वीर और कैप्शन वाकई मार्मिक था. इसलिए सोशल मीडिया ने इसे हाथों हाथ लिया और ये तस्वीर जमकर शेयर होने लगी. लेकिन जल्द ही इस तस्वीर की असलियत सामने आ गई और फिर दैनिक भास्कर की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे. सोशल मीडिया पर लोगों ने बायकाट दैनिक भास्कर ट्रेंड भी चलाया.

अब इस तस्वीर को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है. युवा उज्जैन नाम के एनजीओ ने इस तस्वीर की असलियत सामने लाने के लिए एक वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में उन्होंने गेहूं चुनने वाली लड़की और उसकी माँ से बातचीत की. लेकिन उन दोनों माँ-बेटी की बातें अखबार में छपी तस्वीर और रिपोर्ट से बिलकुल अलग थी. युवा उज्जैन के लोगों ने उस माँ-बेटी को राहत सामग्री दी. उन्होंने उस बच्ची से पूछा कि जो गेहूं उसने सड़क से बटोर था उसका क्या किया तो बच्ची ने बताया कि बकरी को खिला दिया. लड़की ने ये भी बताया कि गेहूं बीनने के लिए उससे फोटो खींचने वाले शख्स ने कहा था. वो पहले से वहां गेहूं नहीं बीन रही थी.

लड़की की माँ ने बाते कि फोटो खींचने वाले ने गेहूं के दाने बिखेरवाए और फिर उन्हें चुनने के लिए लिए कहा. लड़की और उसकी माँ की बातें सुनने के बाद लगता है कि चर्चा बटोरने और मार्मिक स्टोरी गढ़ने के लिए फोटोग्राफर ने कोशिश तो अच्छी की लेकिन उसकी पोल खुल गई. इसी तरह का एक मामला बिहार में सामने आया था जहाँ बच्चों को पैसे देखर मेढक पकड़ने और खाने को कहा गया और फिर स्टोरी बनाई गई कि लॉकडाउन में गरीब बच्चे मेढक खाने को मजबूर हैं जबकि उनके घर में पर्याप्त राशन मौजूद था और उनके गाँव में राहत शिविर भी चल रहा था.