अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत माइनस में पहुंची, जानिये आपको कितना चुकाना होगा पेट्रोल और डीजल के दाम

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सोमवार के दिन बाज़ार में हाहाकार मच गया. अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत शून्य से भी नीचे यानी कि माइनस में पहुँच गई. जिस वजह से अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत बोतलबंद पानी से कम हो गई. डब्ल्यूटीआई (अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) का वायदा भाव सोमवार को -$3.70 प्रति बैरल के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. ऐसा पहली बार हुआ है जब कच्चे तेल की कीमत निगेटिव में पहुँच गई हो.

तेल की इस हालत के पीछे जिम्मेदार कोरोना है. कोरोना की वजह से दुनिया भर में लॉकडाउन है. फैक्ट्रियां बंद है, ट्रांसपोर्ट बंद है. जिस कारण तेल की खपत में इतनी कमी आ गई कि कोई भी तेल खरीदने को तैयार नहीं है. अमेरिका के पास एक तरह से कच्चे तेल का भंडार क्षमता से अधिक हो चुका है. वहां स्टोरेज सुविधाएं अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंच चुकी हैं. अब वो कच्चा तेल तभी भण्डार कर सकता है जब पहले से जमा स्टॉक खाली हो. हालाँकि कच्चे तेल की कीमतों में ये गिरावट सिर्फ मई के लिए जून के लिए अभी भी वायदा भाव ज्यादा है.

भारत में क्या होगा असर

अमेरिका में भले ही कच्चे तेल का भाव निगेटिव में पहुँच गया हो लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपको पेट्रोल डीजल सस्ता मिलने लगेगा. तेल की गिरती कीमतों की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान तो होगा लेकिन भारत की जनता को फायदा होगा इसकी उम्मीद नहीं के बराबर है. आइये इसे समझते हैं.

साल की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल यानी 30.08 रुपए प्रति लीटर था. 10 मार्च को होली थी. होली के बाद भारत में कोरोना ने पाँव पसारने शुरू किये. 12 मार्च को कच्चे तेल की कीमत 38 डॉलर प्रति बैरल यानी 17.79 रुपए प्रति लीटर हो गई. वहीं 1 अप्रैल को कच्चे तेल की कीमत गिरकर 23 डॉलर प्रति बैरल यानी प्रति लीटर 11 रुपए पर आ गई.

इसके बावजूद दिल्ली में 1 अप्रैल को पेट्रोल का बेस प्राइस 27 रुपए 96 पैसे तय किया गया. इसमें 22 रुपए 98 पैसे की एक्साइज ड्यूटी लगाई गई. 3 रुपए 55 पैसा डीलर का कमीशन जुड़ गया और फिर 14 रुपए 79 पैसे का वैट भी जोड़ दिया गया. अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 69 रुपए 28 पैसे हो गई. इसी वजह से भले ही अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमत लुढ़क जाए, आपको ज्यादा पैसे ही चुकाने होंगे.