नक्लसी ने किया ब्लास्ट लेकिन उसे बचाने के लिए आठ किलोमीटर पैदल चल जवान!

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सेना के जवान गाड़ियों में बैठकर जा रहे थे लेकिन अचानक ब्लास्ट होता है और पूरी गाडी के जवान एक साथ खत्म हो जाते हैं. कुछ इसी तरह का हमला हमारे जवानों पर होता है, हमला जमीन के नीचे सड़क पर आईईडी बिछा कर किया गया था. जिसपर गाडी पहुँचते ही ब्लास्ट और जवान खत्म!
छत्तीसगढ़ और झारखंड में अक्सर नक्सलियों और जवानों के बीच लड़ाई की घटनाएँ सामने आती रहती हैं लेकिन हाल ही में सेना के जवानों ने नक्सलियों के लिए जो किया वो नक्सलियों के दिल को भी छू जाएगा! दरअसल झारखंड में तैनात कांस्‍टेबल राजकमल ने उस नक्सली की जान बचाई, जो सीआरपीएफ के जवानो का खून का प्यासा था. लिंगा और उसके कॉमरेड ने सुरक्षाबलों की टुकड़ी पर आईईडी ब्‍लास्‍ट के जरिए हमला बोला था। इसके बाद इन्‍होंने बटालियन के जवानों पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी थी. यह पूरी घटना 18 जनवरी की है. बटालियन को कोरसेरमेटा, हिदांपरा और गोटपल्‍ली के घने जंगल में नक्‍सलियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी. इसके बाद बटालियन ने इन्‍हें खत्‍म करने की मंशा से जंगल में प्रवेश किया था, जहां उनपर आईईडी से हमला किया गया. इसके बाद कोबरा बटालियन और नक्‍सलियों के बीच हुई सीधी गोलीबारी में एक नक्‍सली गंभीर रूप से घायल हो गया था. इस नक्‍स‍ली को सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर स्थल से निकालकर रांची के राजेंद्र इंस्टिट्यूट मेडिकल साइंसेज (RIMS) में भर्ती कराया, लेकिन जब उसे भर्ती करवाया गया तबतक उसका काफी खूब बह चुका था उसे तुरंत खून चढाने की जरुरत थी. जब इस बात की खबर कांस्टेबल रतन मंजुलकर, समेत परविंदर और मेहबूब पीरा ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए खून दान देने के लिए तैयार हो गये. आपको जानकर हैरानी होगी कि घायल नक्सली लिंगा सोडी को बचाने के लिए सेना के जवानो को लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, आठ किलोमीटर… वो भी अपने पीठ पर लादकर लिंगा को लादकर…यहाँ आज कोई एक किलोमीटर ऐसे ही पैदल नही चलना चाहता..यहाँ आपको बता दें कि कांस्‍टेबल राजकमल ने अपना खून नक्सली को दिया, जो कोबरा बटालियन से आते हैं, जो नक्सलियों के लिए किसी काल से कम नही होते…


ये कोई पहला मौका नही जब जवानों ने इस तरह की मिशाल पेश की हो, इससे पहले भी पिछले साल 8 फरवरी को पलामू में एक महिला नक्सली मंजू बैगा एनकाउंटर में घायल हो गई थी. घायल नक्सली को सीआरपीएफ ने घटनास्थल से निकाल अस्पताल में भर्ती कराया था. इस महिला नक्सली को सीआरपीएफ के कांस्टेबल गुलज़ार ने खून दिया था.
आखिर हमारे देश के सेना के जवानों में कौन सा खून भरा है जो अपने दुश्मनों को छोड़ते भी नही है और पूरी कोशिश रहती है कि उन्हें मरने भी नही देते. दरअसल भरतीय अर्धसैनिक बल और नक्सलियों के बीच जब भी एनकाउंटर होते हैं तो अक्सर जवानो का मकसद सिर्फ उन्हें मारकर खत्म करना नही होता बल्कि उन्हें सही रास्ते पर लाना भी होता है….इसी की मिशाल इन जवानों ने पूरे देश को दिखा दी है.