अब सीआरपीएफ ने उठाये प्रियंका गांधी पर सवाल, बताया उस दिन का पूरा हाल

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यूपी पुलिस पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अब खुद ही सवालों  के घेरे में आ गयी है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कि सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ ने अपने बयान को जारी करते हुए कहा कि  प्रियंका गांधी कि सुरक्षा में यूपी पुलिस के अधिकारी अभय मिश्रा से कोई चूक नहीं हुई है. उनके निजी स्टाफ ने  दौरे कि पूरी जानकारी नहीं दी थी. जिसकी वजह से अग्रिम सुरक्षा के इंतजाम नहीं हो सके.लेकिन पुख्ता  सुरक्षा के अभाव में भी कांग्रेस महासचिव को सुरक्षा दी गयी थी. दरअसल प्रियंका गांधी को कांग्रेस स्थापना दिवस के एक कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में जाना था. लेकिन महासचिव के निजी स्टाफ ने सीओ अभय मिश्रा को इसकी पूरी जानकारी नहीं दी. अधिकारी ने प्रियंका कि सुरक्षा में कोई गलती नहीं की.

सीआरपीएफ ने अपने बयान में कहा,’ प्रियंका गांधी बुलेटप्रूफ गाड़ी से नहीं स्कूटी से गयी और अपने साथ निजी सुरक्षा अधिकारियों को भी नहीं लेके गयी. तमाम सुरक्षा चुनोतियों के अभाव होने के कारण भी उनकी सुरक्षा में कोई गलती नहीं गयी. प्रियंका गांधी को सुरक्षा के अभाव होने कि जानकारी दी जा चुकी है और उनको बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के लिए सलाह भी दी गयी है’. इसी के साथ केंद्रीय मंत्री और मुज़फ्फरनगर के सांसद संजीव बालयान ने कहा कि ‘प्रियंका गांधी ने प्रोटोकॉल को तोड़ा है ताकि मीडिया में इसे दिखाया जाये अन्यथा बह ऐसा नहीं करती’. वहीं कांग्रेस ने इसे सुरक्षा में चूक बताया तो बीजेपी ने इसे नौटंकी करार किया.

बता दें प्रियंका गांधी पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी और कांग्रेस प्रवक्ता सदफ जफर से मिलने गयी थी. दरअसल देश भर में हो रहे संशोधित  नागरिकता कानून के विरोध में हिंसा भड़काने और विवाद को बढ़ने के आरोप में पुलिस ने उनको गिरफ्तार किया था. जिस वजह से प्रियंका गांधी को पुलिस ने उनसे मिलने नहीं दिया. इस पर प्रियंका गांधी ने आरोप लगते हुए कहा कि’ मैं अपना कार्यक्रम खत्म करके, बगैर किसी को कहे ताकि तमाशा न हो और डिस्टर्बेंस न हो इसलिए दारापुरी जी के परिवार से मिलने 4-5 लोगों के साथ गाड़ी में बैठ के आई थी. लेकिन रास्ते में पुलिस कि  एक गाड़ी आई और उन्होंने हमारी गाड़ी को रोक दिया और उन्होंने हमसे कहा कि आप नहीं जा सकते. हमने पूछा कि क्यों नहीं जा सकते? उन्होंने कहा हम आपको जाने नहीं देंगे. मैंने कहा कि मुझे रोकिए, मैं गाड़ी से उतर गई. मैंने कहा कि मैं पैदल जाऊंगी. मैं पैदल चलने लगी तो मुझे घेरा, मेरा गला दबाया, मुझे पकड़कर धकेला. ऐसा एक महिला पुलिसकर्मचारी ने किया. मैं गिर गई, उसके बाद मैं फिर चलती रही. थोड़ी देर बाद फिर मुझे रोका, फिर मुझे पकड़ा. उसके बाद मैं अपने कार्यकर्ता के साथ टूवीलर पर बैठकर चली गई. उसके बाद उन्होंने टूवीलर को भी घेरा.मैं फिर पैदल यहां तक आई हूं’.  

विवाद के बढ़ने के बाद प्रियंका गांधी अपने गले दबाने वाले बयान से पलट गयी और अब उन्होंने गले पर हाथ लगाने कि बात कही. जिस पर प्रियंका गांधी कि सुरक्षा में तैनात डॉक्टर अर्चना सिंह ने पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘यह बिल्कुल भी सच नहीं है,मैं प्रियंका गांधी की फ्लीट इंचार्ज थी.किसी ने भी उनके साथ बदसलूकी नहीं की, मुझे करीब साढ़े चार बजे सूचना मिली कि मैडम पार्टी कार्यालय ये अपने आवास पर जाएंगी. मैडम की फ्लीट तय समय के अनुसार रवाना की गई थी. फ्लीट का अगला हिस्सा उनके आवास की ओर मुड़ भी गया था, लेकिन मैम फ्लीट के साथ न जाकर सीधे जाने लगीं. मैं ये जानना चाहती थी कि मैडम कहां जाना चाहती हैं, ताकि उसे हिसाब से सुरक्षा इंतजाम किया जा सके. मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाई है, इस दौरान मेरे साथ भी धक्का-मुक्की हुई है’.