तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ एकजुट हुए सीपीएम और कांग्रेस

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2019 लोकसभा चुनाव में सीपीएम और कांग्रेस मिलकर लड़ेंगे चुनाव, ममता बनर्जी के खिलाफ

चुनाव का बिगुल फूंका जा चूका है . सभी पार्टियों ने अपनी कमर कास ली है . हर तरफ गठबंधन के चर्चे हैं . कहीं यूपी कहीं बिहार तो कहीं बंगाल.

बंगाल में तो आलम ही अलग है. जहाँ कुछ दिनों पहले तक एनडीए को हराने के लिए पूरा विपक्ष ममता बनर्जी के रैली में एकजूट हो गए थे वहीं आज कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन का मन बना रहे.

पश्चिम बंगाल के लोकसभा की 42 सीटें हैं. दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में 34 सीटें जीती थीं. जबकि 2 सीटें बीजेपी, 4 कांग्रेस और 2 सीपीएम ने जीती थीं. वहीं सीपीएम और कांग्रेस ने साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. इस बीच पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस और लेफ्ट के लिए सीटों का बंटवारे पर बात बन गई है. रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि सीपीएम 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट के बीच गठबंधन पर चर्चा काफी दिनों से चल रही थी. इसी साल मार्च के शुरुआती दिनों में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा समेत दूसरे नेताओं ने राहुल को राय दी कि ममता के बजाय सीपीएम से कांग्रेस को गठबंधन करना चाहिए.

कांग्रेस नेताओं ने राहुल को बताया कि सीएम ममता बनर्जी राज्य में चुनावी लड़ाई बीजेपी बनाम टीएमसी रखना चाहती हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि टीएमसी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के नेताओं को भी तोड़ती है.

पार्टी के नेताओं से राय लेने के बाद राहुल गांधी सीनियर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी से मिले. यहां दोनों नेताओं के बीच सीटों के बंटवारे पर डील फाइनल हुई. बता दें कि कांग्रेस पर दबाव बढ़ाने के लिए 8 मार्च को सीपीएम ने रायगंज और मुर्शिदाबाद से अपने कैंडिडेट की घोषणा भी कर दी थी. इन दोनों सीटों पर इस बार भी मौजूदा सांसद मोहम्मद सलीम और बदरूद्दोजा खानरायगंज और मुर्शिदाबाद से चुनाव लड़ेंगे.

हालांकि रायगंज और मुर्शिदाबाद के सीटों को लेकर पेच फस रहा था लेकिन अब उन सीटों पर सीपीएम का कब्जा है . लेकिन सीपीएम एंड कांग्रेस ने आपस में बात कर के यह फैसला किया की उन जागहों पर  कांग्रेस कैंडिडेट नहीं उतारेगा रायगंज से मोहम्मद सलीम और मुर्शिदाबाद से बदरुद्दोजा खान सांसद हैं. हालांकि कांग्रेस नेता कहते हैं कि ये दोनों सीटें कांग्रेस की परंपरागत गढ़ हैं. कांग्रेस के मुताबिक 2014 में चौतरफा मुकाबले की वजह से रायगंज सीट से मोहम्मद सलीम चुनाव जीते थे.

बहरहाल 2019 के लोकसभा चुनाव में यह देखना रोचक होगा कि इस गठबंधन का  कैसा असर पड़ता है तृणमूल कांग्रेस की सीटों पर.