टीवी डिबेट शो में सीपीआई नेता ने मौलाना को कह दिया कुछ ऐसा कि तिलमिला उठे, जानिए क्या हुआ फिर

देश में जहाँ एक तरफ कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है वहीँ दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण के आरोप को लेकर भी राजनीति गर्म हो गयी है. इस मुद्दे को लेकर टीवी चैनल में डिबेट भी रखी गयी. सीपीआई नेता अमीर हैदरी जैदी और मौलाना और आल इंडिया इमाम एसोसिएशन के साजिद रशीदी शामिल हुए.

जानकारी के लिए बता दें बता दें टीवी चैनल पर बहस के दौरान सीपीआई नेता अमीर हैदर जैदी ने मौलाना कुछ ऐसा कह दिया कि वो तिलमिला उठे. मौलाना साजिद रशीदी उस समय बिलबिला गये जब सीपीआई नेता अमीर हैदरी ने उन्हें टोंका-टोंकी के दौरान मौलाना को उलेमा-ए-फसाद करार दिया. इतना ही उन्होंने सवाल भी उठा दिया कि आखिर उन्हें किस आधार पर टीवी डिबेट में बैठाया गया है. जिसके बाद मौलाना ने सीपीआई नेता को भाषा संभालने की हिदायत दी.

सीपीआई नेता के कटाक्ष के बाद एंकर से मौलाना आकर पूछने लगे कि क्या मैं उठा जाऊं? दरअसल चर्चा में मौलाना ने अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्यपाल का यह बयान, सिर्फ एक सियासी बयान है, उनकी पद की गरिमा कहती है कि आप सिर्फ एक धर्म जाति के लोगों की खबर न रखें, आपके लिए सब बराबर हैं. उन्होंने कहा कि आप और राज्यपाल क्यों जानना चाहते हैं कि कितने जमाती हैं. उन्होंने कहा कि राज्यपाल क्यों जानना चाहते हैं कि कितने मुसलमान कोरोना से संक्रमित हों? राज्यपाल को ये जानने की जरुरत नहीं है.

मौलाना की इस बात पर सीपीआई नेता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या उलेमा-ए-फसाद आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बैठे हैं? बंगाल में ममता सरकार है. उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी मुख्य विपक्षी दल हैं. उन्हें सवाल पूछने का बिलकुल अधिकार है, पर उलेमा-ए-फसाद का क्या मतलब बनता है कि वह टीवी डिबेट में जाकर बैठे हैं.