नौकरी के पीछे न भागने की सलाह देकर गलत क्या कह दिया योगी आदित्यनाथ ने?

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पिछले दो दिनों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं और उनका एक बयान खूब वायरल हो रहा है जिसमे उन्होंने कहा है की युवा पढ़ लिख कर नौकरी के पीछे ना भागें. उनके इस बयान के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा और लेफ्ट विंग मीडिया को मौका मिल गया योगी पर निशाना साधने का. लेकिन योगी ने ऐसा क्या गलत कह दिया की उनकी आलोचना की जा रही है?

आइये पहले हम आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने कहा क्या था जिसपर इतना बवाल मचा हुआ है. गुरुवार 22 अगस्त को गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के चौथे दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा – “छात्रों को डिग्री मिलने के बाद नौकरी के पीछे भागने की जगह समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. छात्रों को सरकार की योजनाओं के लिए आगे आना चाहिए.” उन्होंने कहा कि “केंद्र सरकार ने 2024 तक हर घर नल लगाने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को पूरा करने में इंजीनियरिंग के छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं .“ और भी बहुत सी बातें कहीं मुख्यमंत्री ने. लेकिन एजेंडा चलाने के लिए सिर्फ एक लाइन की जरूरत थी तो एजेंडावादी लोगों ने अपने काम की लाइन उठा ली और हल्ला मचा दिया.

हाँ तो फिर सवाल ये है कि आखिर मुख्यमंत्री ने ऐसा क्या कह दिया की उनको आलोचना होने लगी? यही बात जब फिल्म 3 इडियट्स में रणचोड दास चांचड कहता है तो हम थियेटर में बैठ कर तालियाँ बजाते हैं, फिल्म को 200 करोड़ का बिजनेस करा देते हैं और फिल्म को 4 स्टार देते हैं लेकिन यही बात जब योगी आदित्यनाथ कहते हैं तो उसके लिए उनकी आलोचना क्यों हो रही है? और उनका कहना गलत भी तो नहीं था. उनका कहना था कि डिग्री के बाद युवा सिर्फ नौकरी या यूँ कहें सरकारी नौकरी के पीछे ना भागें बल्कि रचनात्मक कार्य करें, सामाजिक कार्यों में योगदान दें. तो इसमें इतना बवाल क्यों मचाना भाई.

सामाजिक कार्य और रचनात्मक कार्य कई तरह के होते हैं. एनजीओ खोल कर जरूरतमंद लोगों को प्रशिक्षित करना, स्टार्टअप शुरू कर के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी रचनात्मक और सामाजिक कार्य है. अगर कोई छात्र डिग्री हासिल कर के नौकरी करने की बजाये गाँव में ही कोई डेयरी फार्म खोलता है और उससे गाँव के किसानों को भी रोजगार और फायदा मिलता है तो ये काम भी रचनात्मक और सामाजिक कार्य में आता है. तो फिर ये काम गलत कैसे हो सकते हैं? या फिर इस तरह के काम को प्रोत्साहन देना गलत कैसे हो गया?

देश की आबादी लगातार बढ़ रही है और नौकरी कम हो रही है. अगर ऐसे में रचनात्मक या सामजिक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तो ये करना गलत कैसे हो गया? सोशल मीडिया के जमाने में एक मानसिकता ने लोगों के दिमाग में बस गई है या फिर यूँ कहें की एक फैशन सा चल निकला है. किसी के बयानों को समझे बिना ही उसपर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उसे ट्रोल कर दो या उसक मजाक उड़ा दो. ये फैशन इसलिए भी आज कल खूब चल रहा है क्योंकि सबको अपना एजेंडा चलाना है और सेट करना है. आप खुद विचार कीजिये, अगर आपको डिग्री करके के नौकरी के पीछे भागने की बजाये खुद का स्टार्टअप शुरू करके लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का अवसर मिले तो क्या ये गलत है? सोचिये और सोचने के बाद इस नतीजे पर पहुँचिये कि योगी आदित्यनाथ ने गलत कहा या सही कहा?