पूर्वोत्तर भारत के बाद अब दक्षिण भारत भी हुआ कांग्रेस मुक्त, पुडुचेरी से तो बड़े बेआबरू हो कर बाहर निकले

5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को जोरदार झटका दिया. न तो राहुल गाँधी का एब्स दिखाना काम आया और न समंदर में छलांग लगा कर मछली पकड़ना. असम के चाय बागानों में प्रियंका गांधी का पत्तियां तोडना भी कोई कमाल नहीं दिखा सका. पूर्वोत्तर भारत तो पहले ही कांग्रेस मुक्त हो गया था. अब दक्षिण भारत भी कांग्रेस मुक्त हो गया. कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना, केरल और पुडुचेरी, इनमे से किसी भी राज्य में कांग्रेस सत्ता में नहीं है. जबकि इन चुनावों से पहले तक कांग्रेस की सत्ता पुडुचेरी में थी, जो चुनावों से कुछ दिन पहले ही छिन गई थी. तमिलनाडु में कांग्रेस, DMK के साथ सत्ता में साझीदार बनी है लेकिन इस गठबंधन में कांग्रेस की हालत जूनियर पार्टनर से भी गई गुजरी है.

AINRC के अध्यक्ष एन. रंगासामी जिन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन कर कांग्रेस का गेम बिगाड़ दिया

यानि कि पूर्वोत्तर भारत के बाद अब दक्षिण भारत भी कांग्रेस मुक्त हो चुका है. इन चुनावों ने ये साबित कर दिया कि देश का मतदाता अब राहुल गाँधी को कोई भाव नहीं देता. चाहे राहुल गाँधी कितना भी चीखें और चिल्लाएं. पुडुचेरी में पिछले 5 सालों से वी. नारायणसामी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी. लेकिन 22 फरवरी को ही पुडुचेरी की सत्ता से हट गई जिसके बाद वहां राष्ट्रपति शासन लग गया था. कांग्रेस को उम्मीद थी कि चुनावों में उसे सफलता मिलेगी और वो फिर से सत्ता हासिल कर लेगी. लेकिन ऐसा हो न सका. पुडुचेरी में कांग्रेस और डीएमके गठबंधन को ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) और बीजेपी के गठबंधन के हाथों शिकस्त मिली. सबसे ख़ास बात ये रही कि बीजेपी को यहाँ कांग्रेस से ज्यादा सीटें आई.

पुडुचेरी में कांग्रेस ने अपने 15 कैंडिडेट खड़े किए जिनमें सिर्फ दो को जिताने में कामयाब रही. जबकि भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की. अब कांग्रेस के ये दो विधायक कब तक उसके साथ बने रहेंगे ये भी देखने वाली बात है. क्योंकि देश के हर राज्य में कांग्रेस छोड़कर जाने वाले विधायकों की लिस्ट अगर बनानी शुरू की जाए तो दिन ख़त्म हो जाएगा. कांग्रेस के विधायक पाला बदल कर बनी बनाई सरकार गिराकर कांग्रेस को सदमा देने में एक्सपर्ट हो गये हैं.

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