सामने आई वजह, मोदी सरकार द्वारा गठित पीएम केयर्स फण्ड से इसलिए बेचैन है कांग्रेस

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कोरोना के खिलाफ जंग में फण्ड इकठ्ठा करने के लिए मोदी सरकार ने पीएम केयर्स का गठन किया. इस फण्ड के गठन के साथ ही लोगों ने इसमें दिल खोल कर डोनेट किया ताकि कोरोना के खिलाफ जंग में आर्थिक सहयोग कर सकें. लेकिन कांग्रेस इससे चिढ गई. उसे पीएम केयर्स का औचित्य समझ नहीं आया. कांग्रेस का कहना है कि पहले से ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) है तो फिर कोरोना के लिए पीएम केयर्स क्यों? एक शख्स ने तो पीएम केयर्स के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी. जिस पर आज सुनवाई होनी है.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस इससे क्यों चिढ़ी हुई है? इसका इस्तेमाल तो आपदा के वक़्त देश में ही होना है. तो हम आपको बताते हैं कांग्रेस पीएम केयर्स से क्यों चिढ़ी हुई है. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का गठन 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था. इसका मकसद उस वक़्त बंटवारे के बाद पाकिस्तान से विस्थापित हो कर आये शरणार्थियों की मदद करना था. तब उसकी संचालन समिति के सदस्यों में कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भी शामिल होता था. साल 1985 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने इस फंड का पूर्ण नियंत्रण प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के हाथ में दे दिया. उसके बाद से इस फण्ड का कितना पैसा, किस आपदा पर खर्च होगा, यह सिर्फ प्रधानमंत्री की सिफारिश पर तय होने लगा.

लेकिन पीएम केयर्स में बदलाव किया गया. इसमें संचालन समिति में कांग्रेस के अध्यक्ष का नाम नहीं होता बल्कि इसका गठन चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में किया गया है। प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हैं. जबकि रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री ट्रस्ट के सदस्य हैं. पीएम केयर्स ट्रस्ट में जमा पैसा किस आपदा में कितना खर्च किया जाए, इसका फैसला प्रधानमंत्री अकेले नहीं ले सकता बल्कि मंत्रियों एवं नामित सदस्यों को सामूहिक तौर पर लेना होगा. पीएम केयर्स PMNRF के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी है क्योंकि संचालन सिर्फ प्रधानमंत्री के हाथ में न रहकर कमिटी को सौंप दिया गया है. कमिटी मेम्बर्स से विचार विमर्श के बाद ही इन पैसों का इस्तेमाल किया जा सकता है. पीएम मेयर्स में कांग्रेस के अध्यक्ष की भूमिका ख़त्म कर दी गई और शायद यही वजह है कि कांग्रेस पीएम केयर्स से चिढ़ी हुई है.